Bihar: करेह नदी में डूबने से तीन सगे भाइयों की मौत, मां की गोद एक ही दिन में सूनी, गांव में नहीं जला चूल्हा
Bihar: समस्तीपुर के शिवाजीनगर में करेह नदी में नहाने के दौरान तीन सगे भाइयों की डूबने से मौत से गांव में मातम छा गया। पोस्टमार्टम के बाद शव गांव पहुंचते ही कोहराम मच गया, वहीं ग्रामीणों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए सहायता नहीं मिलने की शिकायत की।
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समस्तीपुर जिले के शिवाजीनगर थाना क्षेत्र के बरियाही घाट पुल के समीप करेह नदी में नहाने के दौरान एक ही परिवार के तीन सगे भाइयों की डूबने से दर्दनाक मौत हो गई। इस हृदयविदारक घटना ने पूरे बोरज गांव सहित आसपास के इलाके को झकझोर कर रख दिया है।
हर आंख नम और गांव में पसरा था मातम
घटना के बाद तीनों बच्चों के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। पोस्टमार्टम के उपरांत जैसे ही शव गांव पहुंचे, परिवार के लोगों की चीख-पुकार से पूरा माहौल गमगीन हो गया। हर आंख नम थी और गांव में मातम पसरा हुआ था। स्थिति ऐसी थी कि किसी भी घर में चूल्हा नहीं जला और पूरा गांव शोक में डूबा रहा।
एक साथ उठे तीन भाईयों के शव
ग्रामीणों के सहयोग से तीनों बच्चों के अंतिम संस्कार की सभी व्यवस्थाएं की गईं। इसके बाद परिजन और ग्रामीणों ने घर के आंगन से एक-एक कर तीनों भाइयों के शव को कंधे पर उठाकर करेह नदी किनारे ले जाकर अंतिम संस्कार किया। हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार तीन अलग-अलग चिताएं बनाकर परिवार के तीन सदस्यों ने मुखाग्नि दी और दाह संस्कार की प्रक्रिया पूरी की गई। मृतकों की पहचान आदित्य, कार्तिक और हर्ष के रूप में हुई है, जो तीनों सगे भाई थे। बताया जाता है कि इनके पिता सुदर्शन झा एक गरीब और भूमिहीन परिवार से हैं। वे अपने परिवार के भरण-पोषण और बच्चों की पढ़ाई के लिए दिल्ली में गार्ड की नौकरी करते हैं और अपने बच्चों को वहीं रखकर पढ़ा रहे थे।
एक भाई को बचाने में तीनों ने गंवाई जान
परिवार रामनवमी पर्व के अवसर पर गांव आया हुआ था और मंगलवार को दिल्ली लौटने का टिकट भी बना हुआ था। इसी बीच सोमवार को तीनों भाई गांव के पास करेह नदी को देखकर नहाने चले गए। नहाने के दौरान हंसी-मजाक करते समय एक भाई का पैर फिसल गया और वह गहरे पानी में चला गया। उसे बचाने के प्रयास में अन्य दोनों भाई भी नदी में कूद पड़े और देखते ही देखते तीनों डूब गए।
बच्चों को डूबते हुए देखते रहे बेबस पिता
घटना के समय पिता भी पास में मौजूद थे, लेकिन उन्हें तैरना नहीं आता था। बावजूद इसके उन्होंने अपने बच्चों को बचाने का भरसक प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। इसके बाद उन्होंने ग्रामीणों को सूचना दी। स्थानीय ग्रामीणों और मल्लाहों की मदद से तीनों शवों को नदी से बाहर निकाला गया। ग्रामीणों ने बताया कि इस घटना से पूरा परिवार टूट चुका है। पीड़ित मां आशा देवी और बुजुर्ग दादी इस सदमे को सहन नहीं कर पा रही हैं और उनकी तबीयत लगातार बिगड़ी हुई है। गांव में हर व्यक्ति इस घटना से स्तब्ध और दुखी है।
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प्रशासन पर ग्रामीणों ने लगाए आरोप
ग्रामीणों ने प्रशासन के प्रति नाराजगी भी जताई है। उनका कहना है कि घटना के दिन अधिकारियों द्वारा सहायता का आश्वासन दिया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस मदद नहीं पहुंची है। दाह संस्कार के दौरान भी कोई जिम्मेदार पदाधिकारी मौजूद नहीं था। पंचायत मुखिया पति राम पुकार मंडल ने बताया कि घटना की जानकारी स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों को दे दी गई है और पंचायत स्तर पर हर संभव सहयोग किया जा रहा है।