Bihar: पप्पू यादव की गिरफ्तारी पर मां शांति प्रिया का छलका दर्द, न्याय की मांग करते हुए जानें क्या-क्या कहा?
31 साल पुराने मामले में पूर्णिया सांसद पप्पू यादव की गिरफ्तारी से बिहार की राजनीति गरमा गई है। गिरफ्तारी के बाद जहां समर्थकों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया, वहीं सांसद की मां शांति प्रिया ने भावुक होकर बेटे की रिहाई की मांग करते हुए न्याय की गुहार लगाई है।
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बिहार की सियासत में पूर्णिया सांसद पप्पू यादव का नाम चर्चा में बना हुआ है। 31 साल पुराने एक मामले में पप्पू यादव की अचानक गिरफ्तारी से बिहार की राजनीति में उबाल आ गया है। एक ओर जहां इस कार्रवाई को लेकर समर्थकों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है और सड़कों पर विरोध प्रदर्शन जारी है, वहीं दूसरी ओर सांसद की बुजुर्ग माता शांति प्रिया का एक भावुक और मर्मस्पर्शी बयान सामने आया है। अपने बेटे की सलामती की दुआ मांगते हुए उन्होंने प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है।
'मेरे बेटे को छोड़ दीजिए'
पूर्णिया हवाई अड्डा रोड स्थित सांसद पप्पू यादव के निजी आवास पर मीडिया से बातचीत के दौरान शांति प्रिया अपने आंसू नहीं रोक सकीं। रूंधे गले से उन्होंने कहा कि पप्पू यादव को केवल एक राजनेता के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने भावुक होकर कहा, “मेरे बेटे को छोड़ दीजिए, वह समाज की सेवा करेगा। वह सिर्फ मेरा बेटा नहीं है, वह तो भगवान का बेटा है। वह इस धरती पर समाज की सेवा करने के लिए आया है। वह मेरा पुत्र होने से पहले जनता का पुत्र है और जनसेवा के लिए समर्पित है।”
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'मैं न्याय की मांग कर रही हूं'
अपनी बढ़ती उम्र और गिरते स्वास्थ्य का हवाला देते हुए शांति प्रिया ने कहा कि वह जीवन के अंतिम पड़ाव पर हैं और अपने बेटे को सिर्फ लोगों की मदद करते हुए देखना चाहती हैं। हालांकि, भावुकता के बीच उन्होंने सख्त शब्दों में भी चेतावनी दी। उन्होंने कहा, “मैं न्याय की मांग कर रही हूं कि मेरे पुत्र को छोड़ दीजिए। लेकिन याद रखिए, अगर उसे जेल में कुछ भी हुआ तो मैं किसी को नहीं छोड़ूंगी।” उन्होंने यह भी कहा कि पप्पू यादव निस्वार्थ भाव से जनता की सेवा करता आया है और उसे वही करने देना चाहिए।
समर्थकों का गुस्सा फूट पड़ा
इधर, सांसद की गिरफ्तारी की खबर मिलते ही पूर्णिया के विभिन्न इलाकों में समर्थकों का गुस्सा फूट पड़ा। समर्थकों ने इस कार्रवाई को राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बताया। शहर के प्रमुख चौराहों पर टायर जलाकर प्रदर्शन किया गया और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई। समर्थकों का कहना है कि तीन दशक पुराने मामले को आधार बनाकर एक लोकप्रिय जननेता की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है।