Bihar: छोटा घर, बड़े सपने! फुटपाथ पर घड़ी ठीक करने वाले के बेटे का कमाल, इंटर आर्ट्स में बने बिहार के नंबर-2
पूर्णिया के लक्की अंसारी ने बिहार इंटरमीडिएट परीक्षा 2026 में आर्ट्स संकाय में 478 अंक (95.60%) के साथ पूरे राज्य में दूसरा स्थान हासिल किया। बेहद साधारण परिवार से आने वाले लक्की के पिता फुटपाथ पर घड़ी की मरम्मत करते हैं।
विस्तार
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा सोमवार को घोषित इंटरमीडिएट 2026 के परीक्षा परिणामों ने पूर्णिया को गौरवान्वित किया है। जिले के सहायक खजांची हाट (वार्ड 27) निवासी लक्की अंसारी ने आर्ट्स में पूरे बिहार में दूसरा स्थान (Rank 2) प्राप्त कर इतिहास रच दिया है। लक्की को कुल 478 अंक प्राप्त हुए हैं, जो 95.60 प्रतिशत के बराबर है।
सीमित संसाधनों में पाई बड़ी सफलता
लक्की अंसारी की यह सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि उनका पालन-पोषण बेहद सीमित संसाधनों में हुआ है। उनके पिता मो. इम्तियाज फुटपाथ पर घड़ी की मरम्मत का काम करते हैं। एक छोटे से घर में पांच सदस्यों के परिवार के साथ रहते हुए लक्की ने अपनी मेहनत से समाज में एक ऊंचा मुकाम हासिल किया है।
आर्थिक तंगी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि लक्की ने अपनी पढ़ाई के दौरान बीच में छह महीने तक एक मेडिकल स्टोर पर काम भी किया, ताकि वह परिवार की मदद कर सके। हालांकि, उनके माता-पिता ने हमेशा उन्हें पढ़ाई के लिए प्रेरित किया और काम का बोझ उन पर नहीं आने दिया।
मेहनत और तैयारी का राज
लक्की ने अपनी सफलता का श्रेय अपनी कड़ी मेहनत और शिक्षकों के मार्गदर्शन को दिया है। उन्होंने बताया कि वह रोजाना 6 से 7 घंटे तक पढ़ाई करते थे। उन्होंने अपनी तैयारी के लिए ऑफलाइन कोचिंग के साथ-साथ यूट्यूब का भी सहारा लिया। लक्की का कहना है कि छात्राओं की बड़ी संख्या के बीच यह स्थान हासिल करना उनके लिए बड़ी उपलब्धि है।
घर में जश्न जैसा माहौल
लक्की के घर में इस समय त्योहार जैसा माहौल है। अपनी सफलता पर लक्की कहते हैं, “टॉपर बनने से जो इज्जत मिलती है, वह बहुत अच्छा एहसास है। मेरे माता-पिता की आंखों में खुशी के आंसू देखकर मुझे अपनी मेहनत सफल लग रही है। यह मेरे लिए ईद का सबसे बड़ा तोहफा है।”
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भविष्य का सपना
अपनी सफलता से उत्साहित लक्की अब शिक्षा के क्षेत्र में ही करियर बनाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि वह आगे चलकर शिक्षक बनना चाहते हैं, ताकि शिक्षा के जरिए समाज के विकास में योगदान दे सकें। उनके चचेरे भाई मो. आदिल ने बताया कि लक्की सिर्फ एक अंक से राज्य टॉपर (रैंक 1) बनने से चूक गए, लेकिन उनकी इस उपलब्धि ने पूरे बिहार में पूर्णिया का नाम रोशन कर दिया है।
पिता की भावुक प्रतिक्रिया
फुटपाथ पर घड़ी की मरम्मत कर परिवार चलाने वाले लक्की के पिता मो. इम्तियाज अंसारी बेटे की सफलता की खबर सुनते ही भावुक हो गए। उन्होंने कहा, “आज मुझे जो खुशी हो रही है, उसे शब्दों में बताना मुश्किल है। मेरा बेटा शुरू से ही बहुत मेहनती रहा है। हमने उसे हमेशा कहा था कि मेहनत करो और एक दिन हमारा नाम रोशन करो। आज उसने यह बात सच कर दी है। एक पिता के लिए इससे बड़ी खुशी क्या होगी कि उसकी पहचान उसके बेटे की सफलता से हो। आज लक्की ने मेरा नाम पूरे बिहार में रोशन कर दिया है। मैं चाहता हूं कि वह आगे और बड़ी सफलता हासिल करे और समाज के लिए मिसाल बने। यह हमारे लिए खुदा का सबसे बड़ा इनाम है।”
लक्की की मां पम्मी अंसारी ने बेटे की दिन-रात की मेहनत को करीब से देखा है। उन्होंने कहा कि बेटे की इस सफलता पर उन्हें बहुत गर्व है। उन्होंने बताया कि लक्की रोजाना 7 से 8 घंटे तक पढ़ाई करता था। इसमें उसके कोचिंग शिक्षकों का भी बड़ा योगदान रहा है, जिन्होंने उसे सही दिशा दी।
उन्होंने यह भी कहा कि उनका घर बहुत छोटा है और उसी एक कमरे में पूरा परिवार रहता है। लक्की ने घर की तंगी को करीब से देखा है, शायद यही वजह थी कि उसके मन में कुछ बड़ा करने की चाह थी। वह अक्सर कहता था कि पहले वह शिक्षक बनेगा, फिर अपने पैरों पर खड़ा होकर आगे की पढ़ाई करेगा और शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देगा। भाई-बहनों में सबसे छोटा होने के बावजूद लक्की ने जो जिम्मेदारी और मेहनत दिखाई, आज उसी का फल पूरे परिवार को मिला है।