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Chaiti Chhath 2026: आस्था का महासैलाब, बिहार के घाटों पर उमड़ा जनसागर, छठी मैया के जयकारों से गूंजा माहौल

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरपुर/सारण/पूर्णिया/समस्तीपुर/दरभंगा Published by: Ashutosh Pratap Singh Updated Tue, 24 Mar 2026 07:51 PM IST
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सार

चैती छठ के पावन अवसर पर पूरे बिहार में आस्था और भक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिला। मुजफ्फरपुर, सारण, पूर्णिया, समस्तीपुर और दरभंगा समेत कई जिलों के छठ घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।

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पूजा करती महिलाएं - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

लोक आस्था और सूर्य उपासना का महापर्व चैती छठ पूरे बिहार में श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। मंगलवार को तीसरे दिन संध्या अर्घ्य के मौके पर राज्य के अलग-अलग जिलों में घाटों पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। हर तरफ छठी मैया के गीत, दीपों की रोशनी और भक्ति का अद्भुत माहौल देखने को मिला।
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पूजा करती महिलाएं - फोटो : Amar Ujala
मुजफ्फरपुर में घाटों पर उमड़ा जनसैलाब

मुजफ्फरपुर के प्रमुख छठ घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। बूढ़ी गंडक नदी के सिकंदरपुर सीढ़ी घाट, अखाड़ा घाट और आश्रम घाट पर हजारों की संख्या में व्रती और श्रद्धालु पहुंचे। दोपहर बाद से ही घाटों पर लोगों का आना शुरू हो गया था। शाम करीब 4 बजे से भीड़ तेजी से बढ़ने लगी और देखते ही देखते पूरा घाट श्रद्धालुओं से भर गया। व्रतियों ने पूरे विधि-विधान से नदी में खड़े होकर भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया। 

घाटों पर छठ गीतों की गूंज और दीपों की रोशनी ने माहौल को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया। प्रशासन की ओर से घाटों पर साफ-सफाई, रोशनी और सुरक्षा के खास इंतजाम किए गए थे। बैरिकेडिंग, बैनर-पोस्टर और पुलिस बल की तैनाती की गई, ताकि कोई भी श्रद्धालु गहरे पानी में न जाए और किसी तरह की घटना न हो।
 
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घाट पर मौजूद महिलाएं - फोटो : Amar Ujala
सारण में सरयू, गंगा और गंडक घाटों पर दिखी आस्था

सारण जिले में छठ के तीसरे दिन व्रतियों ने अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देकर अपनी कठिन तपस्या का अहम चरण पूरा किया। जिला मुख्यालय के पास सरयू, गंडक और गंगा नदी के घाटों पर भारी भीड़ उमड़ी। शहर से लेकर गांव तक तालाबों और कुओं के घाटों पर भी श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगा रहा। महिलाएं और पुरुष सिर पर सूप और टोकरी में प्रसाद लेकर घाट पहुंचे और पूरे विधि-विधान से पूजा की। छठ पर्व का तीसरा दिन ‘संध्या अर्घ्य’ के रूप में जाना जाता है, जिसे सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इससे पहले व्रतियों ने खरना के दिन गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद ग्रहण कर 36 घंटे के निर्जला उपवास की शुरुआत की थी।
 

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पूजा करते हुए लोग - फोटो : Amar Ujala
पूर्णिया में कड़ी धूप के बावजूद उमड़ी भीड़

पूर्णिया में भी छठ घाटों पर भारी भीड़ देखने को मिली। कड़ाके की धूप और उमस के बावजूद व्रतियों की आस्था में कोई कमी नहीं दिखी। पक्की तालाब, कला भवन घाट, सौरा नदी और गुलाबबाग घाट पर तिल रखने की जगह नहीं थी। महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सिर पर दउरा लेकर जल में खड़ी होकर सूर्य देव की आराधना करती नजर आईं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, डूबते सूर्य को अर्घ्य देने का विशेष महत्व होता है। कहा जाता है कि इस समय सूर्य देव अपनी पत्नी प्रत्यूषा के साथ होते हैं और इस समय दिया गया अर्घ्य जीवन की बाधाओं को दूर करता है। व्रतियों ने बताया कि यह व्रत परिवार की सुख-समृद्धि, संतान की लंबी आयु और घर में शांति के लिए रखा जाता है।
 

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पूजा करती हुईं महिलाएं - फोटो : Amar Ujala
समस्तीपुर में भी दिखा भक्तिमय माहौल

समस्तीपुर में बूढ़ी गंडक नदी के घाटों पर सैकड़ों श्रद्धालुओं ने डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया। छठ गीतों, ढोल-मंजीरे और जयकारों से पूरा माहौल गूंज उठा। महिलाएं दउरा लेकर जल में खड़ी होकर सूर्य भगवान की प्रतीक्षा करती नजर आईं। नगर निगम की ओर से साफ-सफाई, लाइटिंग, चेंजिंग रूम और पेयजल की व्यवस्था की गई थी, वहीं सुरक्षा के लिए पुलिस बल तैनात रहा।
 

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घाट पर मौजूद महिलाएं और बच्चे - फोटो : Amar Ujala
दरभंगा में घाटों पर विशेष तैयारी

दरभंगा में बागमती नदी और गंगासागर तालाब सहित जिले के विभिन्न घाटों पर छठ व्रतियों ने अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया। नगर निगम ने घाटों की साफ-सफाई और व्यवस्था को लेकर विशेष तैयारी की थी। शहर से लेकर गांव तक हर जगह भक्ति का माहौल बना रहा। ग्रामीण इलाकों में भी छठ पर्व को लेकर खास उत्साह देखा गया। मधुपुर गांव, रतनपुरा गांव सहित कई जगहों पर लोगों ने मिलकर छठ पूजा की। रतनपुरा गांव में पवन श्रीवास्तव के घर पर भी छठ पूजा का आयोजन हुआ, जिसमें महिलाओं ने मिलकर छठी मैया की आराधना की। 

तारडीह प्रखंड के एक स्कूल में बच्चों ने छठ पूजा पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया, जिसे देखकर लोग भावुक हो उठे। केवटी प्रखंड में 301 कन्याओं के साथ भव्य कलश यात्रा निकाली गई, वहीं सिंहवाड़ा में विल्व वृक्ष पूजन के साथ दुर्गा पूजा की शुरुआत हुई। छठ व्रती पूरी रात ‘कोसी भरने’ की परंपरा निभाएंगे, जिसमें दीप जलाकर सूर्य देव और छठी मैया की पूजा की जाती है। 

एक व्रती रुणा देवी ने बताया कि उन्होंने संतान की कामना से छठ व्रत रखा था, जो इस वर्ष पूरी हुई। उन्होंने इसे छठी मैया की कृपा बताया। चार दिनों तक चलने वाला यह पर्व नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य के साथ संपन्न होता है। पूरे बिहार में छठ पर्व आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक एकता की जीवंत तस्वीर पेश कर रहा है।
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