Satta Ka Sangram: आरजेडी नेता बोले- इस सरकार से सीवान की जनता ऊब गई है, जदयू ने किया पलटवार; खूब हुई बहसबाजी
Bihar Vidhan Sabha Chunav 2025: बिहार में 6 और 11 नवंबर को होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर चुनावी माहौल गर्म है। इसी सिलसिले में अमर उजाला का चुनावी रथ ‘सत्ता का संग्राम’ मंगलवार को सीवान पहुंचा। सुबह और दोपहर आम जनता तथा युवाओं से चर्चा में उनके मुद्दे जाने गए। अब राजनेताओं से चर्चा पक्ष-विपक्ष अपनी बात रख रहे हैं।
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बिहार में सियासी पारा हर दिन चढ़ता ही जा रहा है और इस बीच अमर उजाला का चुनावी रथ ‘सत्ता का संग्राम’ सीवान की धरती पर पहुंच चुका है। आज 14 अक्तूबर की शाम को राजनेताओं से जनता के मुद्दे पर सवाल पूछे जा रहे हैं और उनके दावों-वादों को तोला जा रहा है। किसके पक्ष में बह रही है हवा? जनता की उम्मीदें और सवाल क्या हैं? जानिए अमर उजाला के चुनावी रथ ‘सत्ता का संग्राम’ से, जहां हर राय, हर सवाल और हर उम्मीद बन रही है इस चुनावी कहानी का अहम हिस्सा।
इससे पहले सुबह टीम ने सीवान के मतदाताओं से खुलकर बातचीत की। चाय की प्याली पर चर्चा के दौरान आम लोगों ने अपनी राय साझा की।
चाय पर चर्चा के दौरान मतदाता बोले- अभी असमंजस की स्थिति है
स्थानीय निवासी सुनील कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार में अच्छा काम किया है। उन्होंने शराबबंदी लागू करके सही कदम उठाया है। हालांकि सीवान में लोग अभी भी थोड़े असमंजस में हैं। वहीं, पवन कुमार ने कहा कि बिहार की राजनीति अब भी जाति पर टिकी हुई है और टिकटों का बंटवारा भी उसी के आधार पर किया जाता है।
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वहीं, अनिल कुमार ने कहा कि अभी तक बिजनेसमैन के लिए कोई खास काम नहीं हुआ है। ज्यादातर काम सिर्फ फाइलों तक ही सीमित रहते हैं। सीवान की राजनीतिक स्थिति पर उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार ने पिछले 20 वर्षों में जितना विकास करना था, वह कर लिया है, अब लोग आगे बढ़ना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि एनडीए की ओर से जिस उम्मीदवार का नाम सामने आ रहा है, वह लोगों के दिल में जगह नहीं बना पा रहे हैं। मुद्दों की बात करें तो अनिल कुमार ने शिक्षा पर ज्यादा काम करने की जरूरत बताई और साथ ही कहा कि यहां बिजली की समस्या का समाधान भी जरूरी है।
वहीं, दोपहर में युवाओं से मिलकर चुनावी मुद्दों और वोटिंग रुझानों को समझा गया।
युवा विश्व सोनी ने कहा कि सीवान में अभी चुनावी माहौल पूरी तरह साफ नहीं हुआ है। यहां अब तक किसी ने नामांकन नहीं किया है, इसलिए इस समय कुछ तय कहना मुश्किल है। उन्होंने बताया कि सीवान की सबसे बड़ी समस्या स्वास्थ्य सेवाओं की कमी है। लोगों को इलाज के लिए बाहर जाना पड़ता है। इसके अलावा, शिक्षा का माहौल भी कमजोर है और कई युवा नशे की लत में फंस रहे हैं, जो चिंता का विषय है। स्थानीय निवासी जहीर अलाम ने कहा, 'टिकट की घोषणा होने के बाद ही यहां के माहौल का अंदाजा लग पाएगा। इस बार महागठबंधन की चुनाव बन रही है। मोहम्मद शहाबुद्दीन ने यहां पर बहुत ज्यादा विकास किया है। उन्होंने यहां पर स्टेडियम बनाया था।
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गुड्डू ने कहा कि यहां के मौजूदा विधायक ने अब तक कोई काम नहीं किया है, इलाके में विकास की बहुत जरूरत है और अब बदलाव होना चाहिए। शराबबंदी पर उन्होंने कहा कि शराब बंद करना सही कदम था, लेकिन अब युवा सूखा नशा करने लगे हैं, जिससे वे बुरी राह पर जा रहे हैं। तेजस्वी यादव को लेकर उन्होंने कहा कि अगर तेजस्वी यादव जीतते हैं, तो उम्मीद है कि वो युवाओं को नौकरी देंगे और रोजगार के मौके बढ़ाएंगे।
राजनेताओं से क्या-क्या बातें हुईं
इसी क्रम में शाम को राजनेताओं से चर्चा की गई, जिसमें राजग और महागठबंधन के नेताओं तथा समर्थकों ने अपनी राय रखी। आरजेडी के प्रवक्ता रविन्द्र कुमार ने बताया कि सीवान के लोग ऊब गए हैं। कई वादे किए गए हैं लेकिन वे पूरे नहीं हुए। बिहार में भ्रष्टाचार बहुत है। इस बार आठ की आठ सीट इंडिया गठबंधन के खाते में आएगी। वहीं रविन्द्र कुमार का जवाब दिया जनता दल यूनाइटेड के जिला प्रवक्ता पप्पी ने।
उनका कहना है कि 20 साल में गुंडागर्दी पूरी तरह से खत्म हो गया है। शिक्षा के क्षेत्र में यहां काम हुआ है। बिहार में दो एम्स हो गए हैं। गरीब घरों की बेटियों को लेकर सीएम चिंतित रहते हैं। राजद के नगर अध्यक्ष इंजीनियर रमेश कुमार ने इस बात का खंडन किया। उनका कहना है कि बिहार में 2005 के पहले जो हत्याएं होती थीं उससे तीन गुनी हत्याएं अब हो रही हैं। प्रदेश का जीडीपी जरूर बढ़ा है लेकिन प्रति व्यक्ति आय में बिहार सबसे पीछे है। 20 साल में कोई नया विश्वविद्यालय नहीं खुला है। ना ही केन्द्र शासित विश्वविद्यालय बन पाया है।
सीवान की जनता ने कहा कि तेजस्वी यादव में क्षमता है पर हर घर को नौकरी मिलना संभव नहीं है। तेजस्वी यादव नौजवानों के लिए कुछ कर सकते हैं। वहीं सरफराज अहमद ने कहा कि गरीब लोगों की एफआईआर दर्ज नहीं हो रही है। प्रिंस पासवान ने बताया कि बिहार में हर विश्वविद्यालय का सत्र पांच से छह साल लेट चल रहा है। वहीं बीएड करने वाले अमरनाथ पांडे ने कहा कि पहले बहुत अपराध होते थे। परिवर्तन का असर समय के साथ दिखाई देता है।
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