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Bihar News: शिया समुदाय ने नहीं मनाई ईद, शोक और श्रद्धांजलि के रूप में याद किया गया दिन

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छपरा Published by: सारण ब्यूरो Updated Sat, 21 Mar 2026 03:47 PM IST
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सार

बिहार के छपरा में इस बार ईद का पर्व शिया समुदाय के लिए उत्सव नहीं बल्कि शोक और श्रद्धांजलि का दिन बन गया। ईरान के सर्वोच्च नेता अली हुसैनी खामनेई के निधन की खबर के बाद समुदाय ने सामूहिक रूप से ईद न मनाने का निर्णय लिया।

This time in Bihar, Eid was observed as a day of empathy and tribute, rather than as a festive celebration.
काली पट्टी बांधे हुए लोग - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

बिहार के छपरा में इस बार ईद का पर्व जहां आम तौर पर खुशी, मेल-मिलाप और उत्सव का प्रतीक होता है, वहीं शिया समुदाय के लिए यह दिन शोक और श्रद्धांजलि के रूप में बीता। कौमी एकता और भाईचारे के लिए प्रसिद्ध इस शहर में एक ओर जहां सुन्नी समुदाय ने हर्षोल्लास के साथ ईद मनाई, वहीं शिया समुदाय ने इस बार त्योहार नहीं मनाने का सामूहिक निर्णय लिया, जो चर्चा का विषय बना हुआ है। बताया जा रहा है कि ईरान के सर्वोच्च नेता अली हुसैनी खामनेई के निधन की खबर के बाद दुनिया भर के शिया मुसलमानों में शोक की लहर फैल गई है। इसी कड़ी में छपरा के शिया समुदाय ने भी इस वर्ष ईद को पारंपरिक उत्साह के साथ न मनाकर शोक दिवस के रूप में मनाया।
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मौलाना डॉ. सैयद मासूम राजा ने कही ये बात

शिया समुदाय के मौलाना डॉ. सैयद मासूम राजा ने बताया कि उनके सर्वोच्च नेता का निधन पूरे समुदाय के लिए अपूरणीय क्षति है। ऐसे में खुशी का त्योहार मनाना उचित नहीं समझा गया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय सामूहिक रूप से पूरी श्रद्धा और भावनाओं के साथ लिया गया है। शनिवार को ईद के मौके पर जहां सामान्यतः शहर में रौनक और जश्न का माहौल रहता है, वहीं छपरा में शिया समुदाय के बीच गम और सन्नाटा पसरा रहा। लोगों ने ईद की नमाज तो अदा की, लेकिन किसी प्रकार का उत्सव नहीं मनाया। नमाज के दौरान समुदाय के लोगों ने काली पट्टी बांधकर अपने नेता के प्रति शोक और श्रद्धांजलि व्यक्त की।
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श्रद्धांजलि सभा का हुआ आयोजन

नमाज के बाद एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। सभा में वक्ताओं ने अली हुसैनी खामनेई के व्यक्तित्व और उनके योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान पारंपरिक रूप से एक-दूसरे को ईद की मुबारकबाद देने की परंपरा भी नहीं निभाई गई। न तो लोगों ने नए कपड़े पहने और न ही किसी प्रकार की खुशियां मनाई गईं। पूरे शहर में शिया समुदाय के बीच गहरा शोक देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैले इस शोक का प्रभाव छपरा जैसे शहर में भी स्पष्ट रूप से दिखाई दिया, जहां इस बार ईद का दिन उत्सव के बजाय संवेदना और श्रद्धांजलि के रूप में याद किया गया।
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