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Bihar: परीक्षा के नाम पर प्रताड़ना! समस्तीपुर जंक्शन पर उमड़ा परीक्षार्थियों का सैलाब; व्यवस्थाएं ध्वस्त

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, समस्तीपुर Published by: दरभंगा ब्यूरो Updated Sun, 24 May 2026 10:30 PM IST
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सार

Bihar: बिहार संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा पर्षद (BCECEB) द्वारा आयोजित डिप्लोमा-सर्टिफिकेट प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा (DCECE) में शामिल होने जा रहे छात्रों को समस्तीपुर जंक्शन पर भारी अव्यवस्था का सामना करना पड़ा।  

Torture in name of exams flood of candidates gathered at Samastipur Junction arrangements collapsed
समस्तीपुर जंक्शन पर लगी छात्रों की भीड़ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

बिहार संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा पर्षद (BCECEB) द्वारा आयोजित डिप्लोमा-सर्टिफिकेट प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा (DCECE) में शामिल होने जा रहे छात्रों के लिए सफर किसी बुरे दुःस्वप्न जैसा साबित हो रहा है। 24 मई को होने वाली इस परीक्षा के लिए समस्तीपुर जंक्शन पर परीक्षार्थियों का ऐसा सैलाब उमड़ा कि स्टेशन की पूरी व्यवस्था ताश के पत्तों की तरह बिखर गई। भीषण गर्मी और ऊपर से ट्रेनों में तिल रखने की जगह न होना इस दोहरी मार ने छात्रों को मानसिक और आर्थिक रूप से तोड़ कर रख दिया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो स्टेशन की भयावह स्थिति को साफ बयां कर रहे हैं।


खचाखच भरी ट्रेनें 
समस्तीपुर जंक्शन के प्लेटफॉर्मों पर पैर रखने तक की जगह नहीं बची है। जैसे ही कोई ट्रेन प्लेटफॉर्म पर आकर रुकती है, उसमें सवार होने के लिए छात्रों के बीच जद्दोजहद शुरू हो जाती है। बोगियों के गेट तो दूर, खिड़कियों से भी छात्र अंदर घुसने को मजबूर हैं। भीषण गर्मी और उमस के बीच ट्रेनों में क्षमता से चार गुना अधिक भीड़ सफर कर रही है, जिससे किसी भी वक्त बड़ी अनहोनी की आशंका बनी हुई है।
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रातभर जागने को मजबूर
परीक्षा केंद्रों तक समय पर पहुंचने की आपाधापी में छात्र एक दिन पहले ही स्टेशनों पर डेरा डाल चुके हैं। समस्तीपुर जंक्शन के परिसर और प्लेटफॉर्मों पर हजारों छात्र जमीन पर चादर बिछाकर रात गुजारने को मजबूर दिखे। इस चिलचिलाती धूप और उमस भरी गर्मी में न तो पीने के पानी की मुकम्मल व्यवस्था दिखी और न ही सिर छुपाने की उचित जगह।
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‘होम सेंटर देते या स्पेशल ट्रेन चलाते’  
स्टेशन पर बदहाली का सामना कर रहे नाराज छात्रों ने बिहार सरकार और रेलवे प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। परीक्षा देने जा रहे छात्रों का कहना है कि सरकार को या तो सभी छात्रों को होम सेंटर (गृह जिला) आवंटित करना चाहिए था, या फिर परीक्षार्थियों की इतनी बड़ी संख्या को देखते हुए रेलवे को विशेष ट्रेनें (Exam Special Trains) चलानी चाहिए थीं। प्रशासन की इस लापरवाही के कारण छात्र मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित हो रहे हैं।

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प्रशासन की उदासीनता पर उठे सवाल
हर साल बिहार में बड़ी परीक्षाओं के दौरान रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों की यही स्थिति देखने को मिलती है, लेकिन इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस और मुकम्मल तैयारी नहीं की जाती। सवाल उठ रहा है कि क्या परीक्षा की तारीख तय करते समय इस बात का अंदाजा नहीं लगाया गया था कि लाखों की संख्या में छात्र सफर करेंगे? आखिर कब तक बिहार के छात्र सिर्फ एक परीक्षा देने के लिए अपनी जान जोखिम में डालते रहेंगे?
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