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वो शहर जहां हर वक्त मंडराती रहती है मौत, डर के साये में जीते हैं लोग

Sat, 04 Jan 2020 10:37 AM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सोनू शर्मा Updated Sat, 04 Jan 2020 10:37 AM IST
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Metsamor City in Armenia live with nuclear reactors
मेट्समोर शहर, अर्मेनिया - फोटो : Social media

मेट्समोर को कभी दुनिया का सबसे खतरनाक न्यूक्लियर पावर प्लांट बताया गया था क्योंकि यह भूकंप के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र में बना है। यह अर्मेनिया की राजधानी येरेवन से सिर्फ 35 किलोमीटर (22 मील) दूर स्थित है। यहां से टर्की की सरहद के उस पार बर्फ से ढंके माउंट अरारात की झलक दिखती है। 

Metsamor City in Armenia live with nuclear reactors
मेट्समोर न्यूक्लियर पावर प्लांट - फोटो : Social media

1970 के दशक में यह न्यूक्लियर पावर प्लांट चेरनोबिल के साथ ही बनाया गया था। उन दिनों मेट्समोर रिएक्टर से विशाल सोवियत संघ की ऊर्जा की बढ़ती जरूरतें पूरी होती थी। सोवियत संघ ने 2000 तक अपनी जरूरत की 60 फीसदी बिजली परमाणु ऊर्जा से बनाने का लक्ष्य रखा था, लेकिन 1988 में सब कुछ बदल गया। 6.8 तीव्रता के भूकंप ने अर्मेनिया में तबाही मचा दी। भूकंप में करीब 25,000 लोग मारे गए। सुरक्षा कारणों से परमाणु बिजलीघर को बंद कर देना पड़ा, क्योंकि प्लांट के सिस्टम में बिजली की आपूर्ति में बाधा आ रही थी। मेट्समोर रिएक्टर में काम करने वाले कई कर्मचारी पोलैंड, यूक्रेन और रूस में अपने घर लौट गए। 

Metsamor City in Armenia live with nuclear reactors
मेट्समोर न्यूक्लियर पावर प्लांट - फोटो : Social media

30 साल बाद आज भी मेट्समोर प्लांट और उसका भविष्य अर्मेनिया में चर्चा का विषय है। इस पर लोगों की राय बंटी हुई है। यहां का एक रिएक्टर 1995 में दोबारा शुरू किया गया था, जहां से अर्मेनिया की जरूरत की 40 फीसदी बिजली मिलती है। आलोचकों का कहना है कि यह परमाणु रिएक्टर अब भी बहुत खतरनाक है क्योंकि यह जिस इलाके में बना है, वहां भूगर्भीय हलचल होती रहती है। दूसरी तरफ इसके समर्थक हैं, जिसमें सरकारी अधिकारी भी शामिल हैं। उनका कहना है कि रिएक्टर को मूल रूप से स्थायी बैसाल्ट ब्लॉक के चट्टानों पर बनाया गया है। इसमें बाद में भी कुछ तब्दीलियां की गई हैं, जिससे यह पहले से ज्यादा सुरक्षित हो गया है। इस तकरार के बीच ही मेट्समोर न्यूक्लियर प्लांट और शहर में रहने वालों की जिंदगी चले जा रही है। 

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Metsamor City in Armenia live with nuclear reactors
मेट्समोर शहर, अर्मेनिया - फोटो : Social media

मेट्समोर शहर का नाम परमाणु रिएक्टर के नाम पर ही रखा गया है। सोवियत संघ के इस शहर को मॉडल सिटी के रूप में बसाया गया था। इसे एटमोग्राद कहा जाता था। बाल्टिक से लेकर कजाकिस्तान तक पूरे सोवियत संघ से प्रशिक्षित श्रमिकों को यहां लाया गया था। यहां 36,000 निवासियों को बसाने की योजना थी। उनके लिए कृत्रिम झील, खेल-कूद की सुविधाएं और एक सांस्कृतिक केंद्र बनाया गया था। शुरुआती दिनों में यहां की दुकानें सामान से भरी रहती थीं। उन दिनों येरेवन तक में यह चर्चा होती थी कि मेट्समोर में सबसे अच्छी क्वालिटी का मक्खन मिलता है। भूकंप आया तो शहर में कंस्ट्रक्शन का काम रोक दिया गया। झील खाली कर दी गई। 

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Metsamor City in Armenia live with nuclear reactors
मेट्समोर शहर, अर्मेनिया - फोटो : Social media

दो महीने बाद सोवियत संघ सरकार ने फैसला किया कि परमाणु बिजलीघर बंद कर दिया जाए। कॉकेशस क्षेत्र में तोड़फोड़ के कारण बिजली सप्लाई में बाधा का मतलब था कि प्लांट को सुरक्षित रूप से चलाना संभव नहीं रह गया था। आधे-अधूरे बने मेट्समोर में रहने वाले लोगों ने पाया कि शहर में उनके लिए रोजगार के बहुत कम मौके बचे हैं। फिर भी शहर की आबादी स्थिर नहीं रह पाई। जिस साल भूकंप आया, उसी साल अजरबैजान के विवादित नागोरनो कोराबाग इलाके में संघर्ष के कारण शरणार्थी मेट्समोर आने लगे। संघर्ष के पहले साल 450 से ज्यादा शरणार्थी मेट्समोर के बाहरी खाली इलाकों में आकर बस गए। अब उन लोगों ने अपने घर बना लिए हैं। वे उस जगह पर रह रहे हैं जहां एटमोग्राद का तीसरा हाउसिंग डिस्ट्रिक्ट बनाने की योजना थी।

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