ये तो आपको पता ही होगा कि धरती के 70 फीसदी हिस्से पर सिर्फ पानी ही पानी है। इसमें समुद्र से लेकर बर्फीली चट्टानें और नदियां सब आती हैं और शायद आप ये भी जानते होंगे कि दुनिया में कुल पांच महासागर हैं, जो अथाह हैं यानी उनकी कोई सीमा नहीं है। महासागरों के शुरुआती और अंतिम छोर का पता लगा पाना बेहद ही मुश्किल काम है। इनकी गहराईयों में न जाने कितने राज छुपे हुए हैं। इन्ही महासागरों से जुड़ा एक रहस्य हम आपको बताने जा रहे हैं, जिसके बारे में जानकर आप हैरान हो जाएंगे।
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हिंद महासागर (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : Pixabay
दरअसल, हिंद महासागर औपर प्रशांत महासागर अलास्का की खाड़ी में मिलते हैं, लेकिन हम ये कह सकते हैं कि ये दोनों महासागर मिलकर भी नहीं मिलते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि इनका पानी एक दूसरे में कभी मिश्रित नहीं होता है। हिंद महासागर का पानी अलग रहता है और प्रशांत महासागर का अलग।
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दो महासागरों के मिलकर भी न मिलने का अनोखा रहस्य
- फोटो : Social media
आप देख सकते हैं कि दोनों महासागरों का पानी अलग-अलग का है। एक नीला दिखाई दे रहा है तो एक हल्का हरा। कुछ लोग इस रहस्य को धार्मिक मान्यताओं से जोड़कर देखते हैं तो कुछ लोग इसे ईश्वर का चमत्कार मानते हैं। आइए जानते हैं आखिर क्यों इन दोनों महासागरों का पानी एक दूसरे से नहीं मिलता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
वैज्ञानिकों की मानें तो दोनों महासागरों के नहीं मिलने की वजह खारे और मीठे पानी का घनत्व, तापमान और लवणता का अलग-अलग होना है। माना जाता है कि जिस जगह पर दोनों महासागर मिलते हैं, वहां झाग की एक दीवार बन जाती है। अब अलग-अलग घनत्व के कारण दोनों एक दूसरे से मिलते तो हैं, लेकिन उनका पानी मिश्रित नहीं होता।
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दो महासागरों के मिलकर भी न मिलने का अनोखा रहस्य
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दोनों महासागरों के नहीं मिलने की एक और वजह बताई जाती है। माना जाता है कि अलग-अलग घनत्व के पानी पर जब सूरज की किरणें पड़ती हैं तो उनका रंग बदल जाता है। इससे ऐसा लगता है कि दोनों महासागर मिलते तो हैं, लेकिन उनका पानी एक दूसरे में मिल नहीं पाता।