लगभग हर हफ्ते में एक बार रात के नौ बजे लाखों तारों की रोशनी में राउल मार्टिनेज मोरालेस और अमांडा मैंड्री मंगल ग्रह का सर्वेक्षण करने की तैयारी करके निकलते हैं। राउल पूर्व खगोल भौतिकी वैज्ञानिक हैं और अमांडा को खगोलशास्त्र का जुनून है। लावा जमने से बनी चट्टानों को पार करके लाल रेत के टीलों तक पहुंचने से पहले वे सावधानी से अपने वैज्ञानिक उपकरणों को खोलना शुरू करते हैं। कई बार वे ज्वालामुखी के विशाल क्रेटर (जिसमें रॉकेट शिप भी समा जाए) के पास अपनी अस्थायी प्रयोगशाला बनाते हैं। अंधेरे में किसी पराये ग्रह की कोई चीज दिखने पर या उल्कापिंडों की बौछार होने पर या कोई नया तारा दिखने पर उनकी सरगर्मी बढ़ जाती है। मोरालेस का कहना है कि बचपन से ही वह दूसरे ग्रहों और दूसरी दुनिया के बारे में जानना चाहते थे। मंगल, बृहस्पति, शनि और चंद्रमा, ये सब उनको रोमांचित करते हैं।
धरती की वो जगह जहां मंगल ग्रह पर जाने की तैयारी करते हैं अंतरिक्षयात्री
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मोरालेस के आसपास का पूरा परिदृश्य किसी अन्य ग्रह का लगता है, लेकिन वे लाल ग्रह पर नहीं हैं। असल से वे मंगल से 5.46 करोड़ किलोमीटर दूर कैनरी आइलैंड के लैंजारोट में लॉस वोल्केन्स नैचुरल पार्क में हैं। यह स्पेन का द्वीप है, अंतरिक्ष नहीं। मैंड्री और मोरालेस यहां कॉस्मॉस तारामंडल चलाते हैं। मैंड्री कहती हैं कि यह अद्भुत जगह है। यह किसी भी अन्य जगह की तुलना में अंतरिक्ष के ज्यादा करीब है। यहां की गुफाएं चांद और मंगल पर मिली गुफाओं से मिलती-जुलती हैं। लैंजारोट में चंद्रमा और मंगल की सतह से विचित्र समानताएं हैं। इन समानताओं ने ही इसे अंतरिक्ष अन्वेषण के सबसे महत्वपूर्ण अनुसंधान केंद्रों में से एक बना दिया है। 1993 में यहां यूनेस्को बायोस्फीयर रिजर्व खोला गया था।
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी इसका इस्तेमाल अंतरिक्षयात्रियों के प्रशिक्षण और मार्स रोवर के परीक्षण के लिए करती हैं। वैज्ञानिक यहां सुदूर अंतरिक्ष के परिदृश्य की कल्पना करते हैं और अंतरिक्षयात्रियों को अंतरिक्ष के रोमांच के लिए तैयार करते हैं। यह द्वीप भौतिकी और भूगोल के नियमों को तोड़ता हुआ लगता है।
1730 से 1736 के बीच छह साल की अवधि में यहां कई ज्वालामुखी विस्फोट हुए थे। टिमानफया नेशनल पार्क में मोंटानास डेल फ़ुएगो के पास ज्वालामुखी से राख और लावा निकलने लगा था, जिसने द्वीप के एक चौथाई हिस्से को ढंक लिया था। ज्वालामुखी विस्फोटों के बाद यहां की जमीन को नया रूप और नया जीवन मिल गया।
लॉस वोल्केन्स नेचुरल पार्क और टिमानफया नेशनल पार्क चंद्रमा जैसी परिस्थितियों के लिए मशहूर हैं। यहां 100 से ज्यादा ज्वालमुखीय शंकु हैं। ज्वालामुखी के विशाल कटोरे, पत्थर बन चुके मैग्मा, लावा प्रवाह और रंगीन रेत 172 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले हुए हैं जो किसी अन्य ग्रह का आभास कराते हैं। यहां के वातावरण में भी एक भटकाव है। यहां की जमीन किसी अन्य ग्रह के रेगिस्तान जैसी लगती है, जहां समय रुका हुआ जान पड़ता है।