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यादों में मनोहर परिकर...सादगी ऐसी कि निहारता रहूं
Mon, 18 Mar 2019 11:26 PM IST
Mukesh Jha
मुकेश झा, नई दिल्ली
मुकेश झा, नई दिल्ली
Published by: Mukesh Jha
Updated Mon, 18 Mar 2019 11:26 PM IST
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मनोहर परिकर
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''तेरी इस सादगी को देखके ये उलझन है, कौन सा फूल चुनूं तेरी बंदगी के लिए'', यह शेर किनका है ये तो मुझे नहीं मालूम पर जिनका (साभार के साथ) भी है 'मनोहर' है। सादा जीवन और उच्च विचार की मिसाल पेश करने वाले गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर परिकर का पार्थिव शरीर पूरे राजकीय सम्मान के साथ सोमवार शाम पंचतत्व में विलीन हो गया।
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चार बार गोवा के सीएम और देश के रक्षा मंत्री की जिम्मेदारी निभा चुके भाजपा नेता मनोहर परिकर ने जिंदगी के जितने बसंत देखे वह बेहद सादगी भरे थे। उनकी छवि बेहद सौम्य और शालीन थी। वह आम जीवन में जितने सहज और सरल थे उतने ही राजनीतिक जीवन में भी।
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सार्वजनिक जीवन में परिकर के लगन, समर्पण और जनता के प्रति स्नेह को देश हमेशा याद रखेगा। उनका राजनीतिक करियर भी बेदाग रहा। उनके लिए पक्ष और विपक्ष दोनों की सर्वस्वीकार्यता थी। सियासत में सादगी और ईमानदारी की मिसाल पेश करने वाले मनोहर गोपालकृष्णन प्रभु परिकर ने पैंक्रियाटिक कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के बाद रविवार को 63 साल की उम्र में अंतिम सांस ली।
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चचा गालिब की पंक्ति में कहें तो 'इस सादगी पे कौन न मर जाए ऐ खुदा...' वाकई परिकर जैसा मनोहर व्यक्तित्व आज के परिप्रेक्ष्य में शायद ही किसी राजनेता का हो। तभी तो देश के सबसे लोकप्रिय पर्यटन केंद्र गोवा का दृश्य सोमवार को मानो परिकर की याद में गमगीन हो गया हो। पूरे पणजी में 'मनोहर भाई अमर रहें' और' वंदे मातरम्' के नारे गूंज रहे थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण, वस्त्रोद्योग मंत्री स्मृति ईरानी, भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और गोवा की राज्यपाल मृदुला सिन्हा समेत कई नेताओं ने परिकर को श्रद्धासुमन अर्पित किए।
गोवा के मुख्यमंत्री के पद पर आसीन मनोहर परिकर की सादगी का आलम यह था कि वह मुख्यमंत्री पद पर रहने के दौरान अपने ऑफिस भी कभी कभार स्कूटी से चले जाते थे। इसलिए उन्हें स्कूटी वाला मुख्यमंत्री भी कहा जाता था। उनकी सादगी और काम के प्रति जोश और जज्बे की मिसाल ही तो थी कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझते रहने के बावजूद वह नाक में नली लगाकर दफ्तर जाते थे और लोगों से बड़ी सादगी के साथ मिलते भी थे।
इतना ही नहीं उन्होंने अमेरिका में लंबे समय तक इलाज कराने के बाद स्वदेश लौटते ही जोरदार जिजीविषा दिखाते हुए जनवरी के महीने में इस हालत में भी गोवा का बजट पेश किया था। बजट पेश के दौरान परिकर कुर्सी पर बैठे थे और उनकी नाक में ट्यूब डली हुई थी। इस दौरान के भाषण को भला कौन भूल सकता है। दरअसल, उन्होंने पूरे जोश के साथ कहा था, 'मैं पूरे जोश से भरा हुआ हूं और आज एक बार फिर वादा करता हूं कि मैं पूरी ईमानदारी, निष्ठा और समर्पण के साथ अपनी अंतिम सांसों तक गोवा की सेवा करूंगा। मुझमें काफी जोश है और मैं पूरी तरह होश में हूं।' आखिर किसी को क्या पता था कि उनकी जुबां से निकली यह बात देशवासियों के लिए शायद आखिरी अल्फाज होंगे।
चलते-चलते...तेरे न होने का शिकवा तुझसे कैसे लिखूं, आज मैं भी गमगीन हूं और मेरी कलम भी। तेरी सादगी को निहारने का दिल करता है, तमाम उम्र तेरे नाम करने का दिल करता है। यादों में मनोहर परिकर......!