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Iran War: पश्चिम एशिया में जंग खत्म करने पर ट्रंप का दावा बाजार के लिए कितना अहम? जानिए विशेषज्ञों की राय

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Riya Dubey Updated Sat, 04 Apr 2026 05:02 PM IST
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सार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान पर आक्रामक हमले जारी रखने के बयान से वैश्विक बाजारों में हलचल बढ़ गई है। कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़कर 100 डॉलर के पार पहुंच गईं। विशेषज्ञों के अनुसार, होर्मुज में सप्लाई बाधित होने से यह बड़ा तेल सप्लाई शॉक बन गया है, जिससे कीमतों में और उतार-चढ़ाव संभव है।

How important is Trump's claim of ending the war in West Asia for the markets? Learn what experts say
शेयर बाजार का हाल - फोटो : Adobestock
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विस्तार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के यह कहने के बाद कि अमेरिका युद्ध को समाप्त करने की यह समयसीमा तय किए बिना ही ईरान पर आक्रमक रूप से हमला करना जारी रखेगा, जिसके बाद 2 अप्रैल गुरुवार को तेल की कीमतों में तेजी उछाल आया और शेयर बाजारों के सेंटिमेंट एक बार फिर नकरात्मक रूप से बदल गए। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका थोड़े समय में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को आसानी से खोल सकता है। उन्होंने कहा कि आगे ईरान के पावर प्लांट पर भी हमला किया जा सकता है।

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भारत में वैश्विक तेल कीमतों के अनुरूप, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमएसीएक्स) पर तेल की कीमतें शुक्रवार को आठ प्रतिशत तक बढ़कर करीब 109 डॉलर प्रति बैरल हो गई। बाजार के विशेषज्ञों ने कहा ट्रंप का यह फैसला कच्चे तेल कीमतों को बढ़ाएगा साथ ही शॉर्ट टर्म के लिए बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है। जानकार यह भी कह रहे हैं, कि राष्ट्रपति ट्रंप अपने बयानों को बदलते रहते है, इसलिए बाजार और निवेशक अधिक चिंतित हैं।

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मार्केट का माहौल फिर से नकरात्मक हो रहा

जियोजित इंवेस्टमेंट लिमिटेड के मुख्य निवेशक रणनीति डॉ. वीके विजयकुमार कहते है, राष्ट्रपति ट्रंप के इस एलान के साथ कि "हम अगले दो से तीन हफ्तों में ईरान पर बहुत बुरा असर डालेंगे" मार्केट का माहौल फिर से नकरात्मक हो गया है। कच्चा तेल लगभग पांच प्रतिशत बढ़कर 105 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है और अमेरिका की 10-ईयर बॉन्ड यील्ड फिर से बढ़कर 4.36 प्रतिशत हो गई है। जिससे सोने और चांदी की कीमतों पर थोड़ बहुत असर हुआ है।

एफपीआई ने भारी बिकवाली जारी रखी 

इसी बीच विदेशी संस्थागत निवेशक (एफपीआई) ने भारी बिकवाली जारी रखी है और 1 अप्रैल को 8331 करोड़ रुपये की बिक्री भारतीय शेयर बाजारों से की है। वे कहते हैं, कच्चे तेल की ऊंची कीमत, बढ़ता व्यापार घाटा बढ़ाने, रेमिटेंस में कमी का डर में वृद्धि और एफपीआई की लगातार बिकवाली, ये सब मिलकर रुपये पर भारी दबाव डाल रहे हैं, जो भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के डॉलर फ्यूचर्स डील्स पर रोक लगाने के फैसलों के बावजूद गिरता जा रहा है।


विजयकुमार कहा, राष्ट्रपति ट्रंप का यह बायान कि हम दो से तीन हफ्तो में काम पूरा कर लेंगे को सच नहीं माना जा सकता क्योंकि राष्ट्रपति अपने सभी विचारों में हमेशा एक जैसे नहीं रहे हैं, वे कभी भी अपनी बयानों को बदल सकते हैं। इसलिए निवेशक और बाजार अधिक चिंता में हैं।

शॉर्ट टर्म के लिए बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना

एलारा कैपिटल रिसर्च की उपाध्यक्ष व इकोनॉमिस्ट गरिमा कपूर बताती है कि ट्रंप ने पश्चिम एशियाई संकट के जल्द समाप्त होने के संकेत तो दे दिए हैं, लेकिन अगले दो से तीन हफ्तो में तनाव काफी बढ़ने की संभावना है, क्योंकि ट्रंप के निशाने पर ईरानी पावर और क्रूड फैसिलिटी हैं। अमेरिका का फोकस शासन बदलने और होर्मुज को खोलने से हट गया है। इन सबके बीच दो से तीन हफ्ते युद्ध जारी रखने की घोषणा ने कच्चे तेल कीमतों में अस्थिरता बनी रहेगी साथ शॉर्ट टर्म के लिए बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है।  

वॉल्यूम के हिसाब से यह इतिहास का सबसे बड़ी तेल सप्लाई शॉक

एचडीएफसी सिक्योरिटीज के प्रमुख रिसर्च के हेड देवर्ष वकील ने बताया कि, ट्रंप के भाषण की वजह से कच्चा तेल की कीमतें 5 प्रतिशत तक बढ़ गईं। ट्रंप ने एनर्जी और वैश्विक बाजार पर भी कड़ा रुख अपनाया और  बात पर जोर दिया कि अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने का बोझ नहीं उठाएगा और कहा कि अमेरिकी ताकत ने एक महीने की लड़ाई के बाद ईरान को कमजोर हालत में डाल दिया है। देवर्ष कहते हैं, ट्रंप ने युद्ध समाप्त करने की कोई तय समयसीमा नहीं बताई है, जिसकी वजह से कीमतें और बढ़ गई हैं। मौजूदा समय में होर्मुज बंद है, जिससे हर दिन लगभग 10 से 15 मिलियन बैरल सप्लाई में रुकावट आ रही है। वॉल्यूम के हिसाब से यह इतिहास का सबसे बड़ी तेल सप्लाई शॉक है।

कच्चे तेल की कीमतों का आउटलुक

कोटक सिक्योरिटीज के कमोडिटी और करेंसी रिसर्च हेड अनिंद्य बनर्जी के अनुसार, ब्रेंट को 95-96 डॉलर से ऊपर अच्छा सपोर्ट बना हुआ है, और 120 डॅालर शॉर्ट-टर्म सीलिंग के तौर पर काम कर रहा है। लेकिन बाजार अब केवल फंडामेंटल्स पर कारोबार नहीं कर रहा है, यह जियोपॉलिटिक्स और एस्केलेशन रिस्क पर कारोबार कर रहा है। वे कहते हैं, थोड़ी सी भी रुकावट से इन्वेंट्री में भारी कमी आएगी, टाइम स्प्रेड और बैकवर्डेशन ( बैकवर्डेशन में, तात्कालिक (स्पॉट) कीमत निकट-अवधि के बांड्स (फ्यूचर्स) की तुलना में अधिक होती है) में तेज उछाल आएगा, और वोलैटिलिटी बनी रहेगी।

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