क्रूड का खौफनाक सफर: मिसाइलों के साये में भारत तक कैसे पहुंच रहा है आपका पेट्रोल और गैस? जानिए पूरी कहानी
क्या आप जानते हैं जंग के बीच भारत में कच्चा तेल कैसे पहुंच रहा है? कैसे एक भारतीय कप्तान वाले तेल टैंकर ने 'डार्क मोड' में पार किया होर्मुज जलडमरूमध्य। पढ़िए रोचक कहानी।
विस्तार
आपके गाड़ी की पेट्रोल हो गया घर में खाना बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाली रसोई गैस, क्या आपने कभी सोचा है पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के माहौल में यह भारत तक कैसे पहुंच रहा है? अगर नहीं तो हम आज आपको इस बारे में एक ऐसी कहानी बताएंगे जो हॉलीवुड की किसी थ्रिलर फिल्म से कम नहीं है। इस कहानी के केंद्र में है एक भारतीय कप्तान की अगुवाई में चलाया जा रहा 'शेनलोंग सुएजमैक्स' तेल टैंकर, जिसने मिसाइलों के साये से बचते हुए 1,35,335 मीट्रिक टन कच्चा तेल लेकर होर्मुज होते हुए मुंबई बंदरगाह तक की सुरक्षित यात्रा तय की है।
आइए आसान भाषा में समझते हैं कि वैश्विक आपूर्ति शृंखला को चालू रखने के लिए जहाजों को किन खतरों से गुजरना पड़ रहा है और यह हमारी पूरी यात्रा और दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए क्यों जरूरी है?
जहाज के डार्क मोड में समुद्री सफर का क्या मतलब है?
समुद्री व्यापार में जहाजों की पहचान, उनकी स्थिति और आवाजाही के लिए 'ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम' का इस्तेमाल होता है। यह सिस्टम इसलिए होता है ताकि दूसरे जहाजों और तटीय अधिकारियों को जानकारी मिलती रहे और समुद्र में कोई दुर्घटना न हो। लेकिन खतरे को देखते हुए इस सिस्टम को बंद कर दिया जाता है, जिससे जहाज समंदर में पूरी तरह से 'अदृश्य' या अनट्रेसेबल हो जाता है। 'शेनलोंग सुएज़मैक्स' के कैप्टन ने होर्मुज जलडमरूमध्य पार करते समय यही किया और 'डार्क मोड' में चले गए।
समंदर में ट्रैकिंग 'सिस्टम' बंद करने की नौबत क्यों आई?
इस इलाके में फिलहाल भारी जंग का माहौल है। जब से ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल का सैन्य अभियान शुरू हुआ है, ईरानी सेना ने रणनीतिक रूप से बेहद अहम 'होर्मुज जलडमरूमध्य' को प्रभावी रूप से बंद कर दिया है। यह वही समुद्री रास्ता है जहां से दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का करीब एक चौथाई हिस्सा और रोजाना 2 करोड़ बैरल से ज्यादा कच्चा तेल गुजरता है। पिछले दो हफ्तों में ईरान द्वारा कम से कम 16 जहाजों पर हमला किया जा चुका है और उसने इस क्षेत्र में आगे भी हमलों की चेतावनी दी है।
भारत के लिए यह कार्गो और रूट कितना जरूरी था?
ऊर्जा जरूरतों के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण है। लाइबेरिया के झंडे तले चल रहे इस टैंकर में सऊदी अरब के रास तनूरा बंदरगाह से लोड किया गया 1,35,335 मीट्रिक टन कच्चा तेल था। 9 मार्च को सिग्नल बंद करने के बाद यह जहाज एक दिन बाद वापस ट्रैकिंग सिस्टम पर दिखा और बुधवार को सुरक्षित मुंबई पहुंच गया। अब इस कच्चे तेल को उतार कर मुंबई की रिफाइनरियों में भेजा जाएगा, जिससे हमारी दैनिक जरूरतें पूरी होंगी।
क्या और भी जहाज इसी तरह का जोखिम उठा रहे हैं?
हां, अपनी सुरक्षा के लिए कई जहाज रडार सिस्टम को बंद करने का सहारा ले रहे हैं। ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, भारत, चीन और जापान जाने वाले दो सबसे बड़े क्रूड कैरियर वीएलसीसी, 3 सुएजमैक्स और एक पैनामैक्स टैंकर कम से कम 48 घंटों से एआईएस ट्रैकिंग सिस्टम से ऑफलाइन रहे हैं।
खाड़ी क्षेत्र में भारत के अन्य जहाजों और नाविकों की क्या स्थिति है?
हालात काफी संवेदनशील हैं। भारत सरकार के मुताबिक, फिलहाल फारस की खाड़ी क्षेत्र में 28 भारतीय झंडे वाले जहाज काम कर रहे हैं। इनमें से 24 जहाज (जिन पर 677 भारतीय नाविक सवार हैं) होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिम में हैं, जबकि चार जहाज (101 नाविकों के साथ) इसके पूर्व में स्थित हैं। खतरे का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बुधवार को गुजरात के कांडला पोर्ट आ रहे एक थाई जहाज पर भी इस जलडमरूमध्य में हमला हुआ, जिस पर नई दिल्ली ने कड़ी आपत्ति जताई है। समंदर के रास्ते तेल लाना अब एक बेहद जोखिम भरा काम बन गया है। भारतीय कैप्टन की ओर से 'डार्क मोड' में लाखों टन कच्चे तेल को सुरक्षित मुंबई तक लाना यह दर्शाता है कि दुनिया का ऊर्जा बाजार कितनी अनिश्चितताओं के बीच काम कर रहा है। जब तक पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक हालात सामान्य नहीं होते, आम आदमी के इस्तेमाल होने वाले तेल-गैस की सप्लाई चेन ऐसे ही भारी जोखिम के बीच चलती रहेगी।
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