ICI: बुनियादी उद्योगों की विकास दर अप्रैल में 1.7% पर पहुंची, सीमेंट और स्टील से अर्थव्यवस्था को रफ्तार
अप्रैल 2026 में भारत के आठ प्रमुख बुनियादी उद्योगों की विकास दर 1.7 प्रतिशत रही। सीमेंट और स्टील सेक्टर में तेजी व कोयला-उर्वरक में गिरावट का पूरा माजरा समझने के लिए पढ़ें।
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वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी नवीनतम आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत के आठ प्रमुख बुनियादी (कोर) ढांचा क्षेत्रों ने अप्रैल 2026 में 1.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है। विकास की इस हल्की रफ्तार को मुख्य रूप से सीमेंट, स्टील और बिजली उत्पादन में हुई बढ़ोतरी से बड़ा सहारा मिला है। हालांकि, अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय यह है कि आठ में से पांच प्रमुख क्षेत्रों के उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई है, जिसने कुल वृद्धि दर को सीमित कर दिया।
सीमेंट, स्टील और बिजली सेक्टर का शानदार प्रदर्शन
आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल महीने में औद्योगिक गतिविधियों को सकारात्मक दिशा देने का काम मुख्य रूप से तीन प्रमुख क्षेत्रों ने किया है। पिछले साल के इसी महीने की तुलना में अप्रैल 2026 में सीमेंट उत्पादन में सबसे अधिक 9.4 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई। इसके बाद स्टील उत्पादन में 6.2 प्रतिशत की शानदार बढ़त देखी गई, जबकि बिजली उत्पादन भी सालाना आधार पर 4.1 प्रतिशत की दर से आगे बढ़ा। यह उछाल इस बात का स्पष्ट संकेत है कि देश में निर्माण और बुनियादी ढांचे से जुड़ी गतिविधियों में निरंतरता बनी हुई है।
कोयला और कच्चे तेल सहित पांच क्षेत्रों में भारी गिरावट
सकारात्मक आंकड़ों के विपरीत, ऊर्जा और उर्वरक क्षेत्र के प्रदर्शन ने समग्र वृद्धि पर भारी दबाव डाला है। पिछले साल के समान महीने की तुलना में अप्रैल 2026 में कोयला उत्पादन में 8.7 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई। इसी तरह, कृषि क्षेत्र से जुड़े उर्वरक (फर्टिलाइजर) उत्पादन का आंकड़ा भी 8.6 प्रतिशत तक सिकुड़ गया। ईंधन से जुड़े अन्य क्षेत्रों का हाल भी निराशाजनक रहा, जहां प्राकृतिक गैस के उत्पादन में 4.3 प्रतिशत और कच्चे तेल के उत्पादन में 3.9 प्रतिशत की कमी आई। वहीं, पेट्रोलियम रिफाइनरी उत्पादों का उत्पादन भी 0.5 प्रतिशत गिर गया। गौरतलब है कि ये आठ प्रमुख उद्योग मिलकर देश के औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में 40.27 प्रतिशत का भारी-भरकम हिस्सा रखते हैं, जिससे देश की औद्योगिक गतिविधि का सीधा आकलन होता है।
पश्चिम एशिया संकट का असर और विशेषज्ञों की राय
इस पूरे आंकड़े पर इक्रा (आईसीआरए) लिमिटेड के वरिष्ठ अर्थशास्त्री राहुल अग्रवाल ने अपना महत्वपूर्ण विश्लेषण पेश किया है। उनका मानना है कि पिछले वर्ष का आधार अनुकूल (फेवरेबल बेस इफेक्ट) होने के बावजूद कोर सेक्टर की यह वृद्धि काफी सुस्त रही है। अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि आठ में से पांच क्षेत्रों में उत्पादन का सिकुड़ना इस बात का संकेत है कि पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण कुछ क्षेत्रों की आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मार्च 2026 के संशोधित 1.2 प्रतिशत की तुलना में अप्रैल में जो 1.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, वह मुख्य रूप से बिजली और सीमेंट के कारण है। अग्रवाल का अनुमान है कि इस सुस्ती का असर अप्रैल 2026 के आईआईपी (आईआईपी) विकास आंकड़ों पर भी पड़ेगा, जो जल्द ही एक नए और बहुप्रतीक्षित आधार (बेस) पर जारी किए जाएंगे।
कुल मिलाकर, नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत में देश के औद्योगिक रुझान मिले-जुले नजर आ रहे हैं। मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, इससे पहले मार्च 2026 के लिए आठ प्रमुख उद्योगों की अंतिम विकास दर 1.2 प्रतिशत आंकी गई थी। वहीं, अप्रैल से मार्च 2025-26 की पूरी अवधि के लिए कुल संचयी विकास दर 2.7 प्रतिशत रही है। आगे चलकर यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वैश्विक भू-राजनीतिक दबावों के बीच देश का औद्योगिक उत्पादन सूचकांक आने वाले महीनों में कैसे खुद को संतुलित रखता है।