Petrol Diesel Price: पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने की मांग, जानें क्या बोले सांसद सस्मित पात्रा
पेट्रोल और डीजल की कीमतों का सीधा असर महंगाई, परिवहन लागत, लॉजिस्टिक्स खर्च, कृषि लागत, एमएसएमई सेक्टर के संचालन खर्च और आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है। यह अब भी जीएसटी के दायरे से बाहर है। इस बीच, राज्यसभा सांसद ने वित्त मंत्री से मुलाकात कर इसे जीएसटी की कर प्रणाली के तहत लाने के लिए प्रस्ताव सौंपा है। आइए इस बारे में विस्तार से जानें।
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विस्तार
राज्यसभा सांसद डॉ. सस्मित पात्रा ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात कर पेट्रोल और डीजल को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में शामिल करने को लेकर विस्तृत प्रस्ताव सौंपा। उन्होंने इस मुद्दे पर राष्ट्रीय स्तर पर संरचित और व्यापक चर्चा शुरू करने की मांग की।
डॉ. पात्रा ने अपने प्रस्ताव में कहा कि संविधान के अनुच्छेद 279ए(5) के तहत पेट्रोलियम उत्पादों को भविष्य में जीएसटी के दायरे में लाने का प्रावधान पहले से मौजूद है। उन्होंने कहा कि इस विषय पर पहले भी जीएसटी परिषद में चर्चा हो चुकी है, लेकिन मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए अब इस पर नए सिरे से व्यावहारिक और संतुलित विचार करने की जरूरत है।
सांसद बोले- कीमतों का सीधा असर आम लोगों की जिंदगी पर पड़ता है
सांसद सस्मित पात्रा ने कहा कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों का सीधा असर महंगाई, परिवहन लागत, लॉजिस्टिक्स खर्च, कृषि लागत, एमएसएमई सेक्टर के संचालन खर्च और आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग राज्यों में वैट की अलग दरें होने के कारण जीएसटी के तहत टैक्स समानता और एकीकृत बाजार का उद्देश्य पूरी तरह पूरा नहीं हो पा रहा है।
उन्होंने विशेष रूप से ओडिशा का उदाहरण देते हुए कहा कि यह राज्य खनन, उद्योग और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों का बड़ा केंद्र है। ऐसे में अगर पेट्रोल और डीजल को चरणबद्ध तरीके से जीएसटी में शामिल किया जाता है, तो माल ढुलाई और सप्लाई चेन की लागत कम हो सकती है। इससे उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी और आम लोगों, किसानों, ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों तथा एमएसएमई सेक्टर को राहत मिलेगी।
डॉ. पात्रा ने यह भी स्वीकार किया कि पेट्रोलियम उत्पादों पर राज्यों को मिलने वाला टैक्स राजस्व उनके लिए महत्वपूर्ण आय का स्रोत है। इसलिए उन्होंने पेट्रोल-डीजल को तुरंत बिना शर्त जीएसटी में शामिल करने के बजाय संतुलित और चरणबद्ध मॉडल अपनाने का सुझाव दिया।
कीमतें तय करने के लिए एक तय फॉर्मूला तैयार करने पर हो विचार
उन्होंने प्रस्ताव दिया कि जीएसटी परिषद पेट्रोल और डीजल के लिए अलग जीएसटी स्लैब, राज्यों के लिए ट्रांजिशनल मुआवजा, सीमित अवधि का राजस्व सुरक्षा उपकर (सेस) और वित्तीय स्थिरता के लिए एक तय फॉर्मूला तैयार करने पर विचार कर सकती है।
सांसद ने वित्त मंत्री से आग्रह किया कि इस मुद्दे पर सभी राज्यों के साथ व्यापक चर्चा कराई जाए और एक तकनीकी व वित्तीय विशेषज्ञ समूह का गठन किया जाए, जो पेट्रोलियम उत्पादों को चरणबद्ध तरीके से जीएसटी व्यवस्था में शामिल करने के मॉडल पर अध्ययन कर राष्ट्रीय सहमति बनाने का काम कर सकता है।
डॉ. सस्मित पात्रा ने कहा कि पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के तहत लाने का फैसला केवल टैक्स सुधार नहीं होगा, बल्कि यह देश में आर्थिक संतुलन, उद्योगों की प्रतिस्पर्धा और आम लोगों को राहत देने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है।