सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   UN Cuts India's 2026 GDP Forecast to 6.4% Amid West Asia Crisis, Yet Economic Growth Remains Robust

West Asia Crisis: यूएन ने 2026 के लिए भारत की विकास दर का अनुमान घटाया, फिर भी सबसे तेज अर्थव्यवस्था

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Wed, 20 May 2026 05:19 PM IST
विज्ञापन
सार

संयुक्त राष्ट्र ने पश्चिम एशिया संकट के कारण भारत की 2026 की जीडीपी विकास दर का अनुमान घटाकर 6.4% कर दिया है। देश की अर्थव्यवस्था पर महंगाई और वैश्विक झटकों के प्रभाव को विस्तार से समझें, अभी पढ़ें।

UN Cuts India's 2026 GDP Forecast to 6.4% Amid West Asia Crisis, Yet Economic Growth Remains Robust
GDP - फोटो : Adobestock
विज्ञापन

विस्तार

वैश्विक अनिश्चितताओं और पश्चिम एशिया में जारी तनाव का सीधा असर अब दुनिया भर की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के आर्थिक अनुमानों पर स्पष्ट रूप से पड़ने लगा है। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) ने हाल ही में वैश्विक आर्थिक झटकों का हवाला देते हुए वर्ष 2026 के लिए भारत की विकास दर (जीडीपी) के अनुमान को 6.6 प्रतिशत से घटाकर 6.4 प्रतिशत कर दिया है। संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक मामलों के विभाग (यूएन डीईएसए) द्वारा मंगलवार को जारी की गई नवीनतम रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि विकास दर के इस अनुमानित संशोधन के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक बना रहेगा।

वैश्विक झटके और महंगाई का दोहरा प्रहार

रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया का संकट वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक नया झटका साबित हो रहा है, जिसने विकास की रफ्तार को धीमा करने के साथ-साथ महंगाई के दबाव को फिर से बढ़ा दिया है। वर्ष 2025 में दर्ज 7.5 प्रतिशत की विकास दर से 2026 में 6.4 प्रतिशत तक की यह गिरावट मुख्य रूप से ऊर्जा आयात की बढ़ती लागत और सख्त होती वित्तीय स्थितियों के दबाव को दर्शाती है। यूएन डीईएसए में आर्थिक विश्लेषण और नीति प्रभाग के प्रभारी व वरिष्ठ अर्थशास्त्री इंगो पीटरले ने स्पष्ट किया कि पश्चिम एशिया का यह झटका सभी देशों में विकास को कम कर रहा है और महंगाई बढ़ा रहा है, जिससे नीति निर्माताओं के लिए गुंजाइश सीमित हो रही है। वैश्विक स्तर पर भी हालात चिंताजनक हैं, जहां 2026 के लिए वैश्विक जीडीपी वृद्धि का अनुमान अब महज 2.5 प्रतिशत आंका गया है, जो जनवरी के अनुमान से 0.2 प्रतिशत अंक कम है और महामारी से पहले के सामान्य स्तर से काफी नीचे है।

विज्ञापन
विज्ञापन

भारतीय अर्थव्यवस्था और मौद्रिक नीति की चुनौतियां

वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में भारत भी पूरी तरह सुरक्षित या इन झटकों से अछूता नहीं है। पीटरले के मुताबिक, भारत एक बड़ा ऊर्जा आयातक देश है, जिसके कारण यह विदेशी धन प्रेषण (रेमिटेंस) और अन्य वैश्विक झटकों के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाता है। इसके अलावा, वैश्विक स्तर पर लगातार बढ़ रही वित्तीय सख्ती भारत के लिए मौद्रिक नीति के संचालन को और अधिक जटिल बना सकती है। यूएन डीईएसए के निदेशक शांतनु मुखर्जी ने व्यापार के मोर्चे पर एक दीर्घकालिक संरचनात्मक मुद्दे की ओर इशारा करते हुए बताया कि जब आयात लागत बढ़ती है तो निर्यात पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ता है। जब फ्रेट लागत, लॉजिस्टिक्स और डीजल जैसे पेट्रोकेमिकल्स के दाम बढ़ते हैं, तो व्यवसायों के लिए लागत में वृद्धि होना तय है।

विज्ञापन
Trending Videos

मजबूत बुनियादी ढांचे से मिलेगी अर्थव्यवस्था को ताकत

तमाम बाहरी दबावों और ऊर्जा आयात की बढ़ती लागत के बावजूद, भारतीय अर्थव्यवस्था के बुनियादी आधार बेहद मजबूत स्थिति में हैं। इंगो पीटरले ने भारत के विकास को संरचनात्मक रूप से बेहद मजबूत बताया है। यह मजबूती मुख्य रूप से बेहतर उपभोक्ता मांग, लगातार हो रहे सार्वजनिक निवेश और सेवा निर्यात के शानदार प्रदर्शन पर टिकी है। अर्थव्यवस्था को गति देने वाले ये प्रमुख कारक आने वाले समय में भी काफी हद तक बरकरार रहने की उम्मीद है, जिससे भारत सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं की सूची में मजबूती से अपना स्थान बनाए रखेगा। मुखर्जी ने भी विश्वास जताया है कि अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की तरह भारत के पास इन झटकों को प्रबंधित करने के लिए पर्याप्त पॉलिसी स्पेस मौजूद है। 


आने वाले समय में अर्थव्यवस्था की स्थिरता मुख्य रूप से इस बात पर निर्भर करेगी कि केंद्रीय बैंक और राजकोषीय अधिकारी इन झटकों के प्रति कैसी प्रतिक्रिया देते हैं। मौजूदा वित्तीय बफर और राजकोषीय भंडार के खत्म होने से पहले इन बाहरी झटकों को कितनी कुशलता से संभाला जाता है, यही सबसे महत्वपूर्ण साबित होगा। लंबी अवधि के सकारात्मक दृष्टिकोण को दर्शाते हुए संयुक्त राष्ट्र की इस रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि वर्ष 2027 में भारतीय अर्थव्यवस्था एक बार फिर 6.6 प्रतिशत की मजबूत दर से आगे बढ़ सकती है। कुल मिलाकर, बाहरी चुनौतियां भले ही राह को मुश्किल बना रही हों, लेकिन भारत की मजबूत आंतरिक मांग इसे स्थिर बनाए रखेगी।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed