Rupee Rebound: आरबीआई के कड़े कदमों से रुपये ने पकड़ी रफ्तार, डॉलर के मुकाबले 93.14 पर पहुंचा
आरबीआई के सख्त कदम से रुपये ने ऐतिहासिक निचले स्तर से वापसी करते हुए डॉलर के मुकाबले 93.14 पर शानदार रिकवरी की है। कच्चे तेल में उबाल, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और रिकॉर्ड जीएसटी कलेक्शन के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था का पूरा हाल जानने के लिए पढ़ें।
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विदेशी पूंजी की लगातार निकासी और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के त्वरित और सख्त नीतिगत कदमों ने घरेलू मुद्रा को बड़ी राहत दी है। गुरुवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 156 पैसे (1.6 प्रतिशत) की शानदार रिकवरी के साथ 93.14 (अस्थायी) के स्तर पर बंद हुआ। जानकारों के अनुसार, यह पिछले 12 से अधिक वर्षों में रुपये की एक दिन की सबसे बड़ी बढ़त है।
इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में गुरुवार को रुपया 94.62 पर खुला और कारोबार के दौरान 188 पैसे के भारी उछाल के साथ 92.82 के उच्च स्तर तक पहुंच गया। अंत में यह अपने पिछले बंद स्तर से 156 पैसे मजबूत होकर 93.14 पर बंद हुआ। गौरतलब है कि पिछले शुक्रवार को रुपया 94.84 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर बंद हुआ था और सोमवार को इसने 95 का चिंताजनक स्तर भी पार कर लिया था।
इस भारी गिरावट को थामने के लिए आरबीआई को 'ऑनशोर फॉरवर्ड मार्केट' में बैंकों को प्रतिबंधित करने के लिए कई अहम कदम उठाने पड़े:
- 27 मार्च, 2026 के एक सर्कुलर में केंद्रीय बैंक ने बैंकों के लिए रुपये पर 'नेट ओपन पोजिशन' की सीमा 100 मिलियन डॉलर तय कर दी है और 10 अप्रैल तक इसके अनुपालन का सख्त निर्देश दिया है।
- बुधवार को घोषित नए उपायों में, विदेशी मुद्रा का लेन-देन करने वाले बैंकों को 'नॉन-डिलीवरेबल डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट' की पेशकश करने से रोक दिया गया है।
- इसके अतिरिक्त, किसी भी रद्द किए गए विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट को दोबारा बुक करने पर भी पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है।
मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी ने इस रिकवरी पर कहा, "नियामक प्रतिबंधों का अनुपालन करने के लिए बैंकों ने डॉलर की बिकवाली की, जिससे रुपये ने 12 वर्षों से अधिक समय का सबसे बड़ा एक दिवसीय लाभ दर्ज किया"।
रुपये में मजबूती के बावजूद आर्थिक मोर्चे पर चुनौतियां बरकरार
रुपये को मिले इस नीतिगत सहारे के बावजूद व्यापक आर्थिक मोर्चे पर चुनौतियां बरकरार हैं:
- कच्चा तेल और डॉलर: वैश्विक तेल बेंचमार्क 'ब्रेंट क्रूड' वायदा बाजार में 6.84 प्रतिशत के बड़े उछाल के साथ 108.08 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। वहीं, डॉलर इंडेक्स 0.60 प्रतिशत बढ़कर 100.05 पर कारोबार कर रहा है।
- शेयर बाजार और विदेशी निकासी: गुरुवार को घरेलू शेयर बाजार में तेजी रही; सेंसेक्स 185.23 अंक (1.80%) चढ़कर 73,319.55 पर और निफ्टी 33.70 अंक (0.15%) बढ़कर 22,713.10 पर बंद हुआ। हालांकि, बुधवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने 8,331.15 करोड़ रुपये के शेयरों की भारी शुद्ध बिकवाली की है।
- जीएसटी संग्रह: घरेलू मोर्चे से राहत की खबर यह है कि आयात और घरेलू बिक्री में तेजी के दम पर मार्च में सरकार का जीएसटी राजस्व लगभग 9 प्रतिशत बढ़कर 2 लाख करोड़ रुपये के पार हो गया है, जो 2025-26 वित्तीय वर्ष का तीसरा सबसे बड़ा मासिक संग्रह है।
आंकड़े बताते हैं कि 28 फरवरी, 2026 को पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद से रुपये में 4 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आ चुकी है और मार्च 2026 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में मुद्रा डॉलर के मुकाबले लगभग 10 प्रतिशत कमजोर हुई है। विश्लेषक अनुज चौधरी का अनुमान है कि 10 अप्रैल की समयसीमा से पहले बैंक अपनी ओपन पोजीशन कम करना जारी रखेंगे, जिससे रुपये में सकारात्मक रुख बना रह सकता है। हालांकि, 'ग्लोबल रिस्क-ऑफ सेंटीमेंट' और महंगे कच्चे तेल की वजह से रुपये पर ऊपरी स्तरों पर दबाव बना रहेगा। निकट भविष्य में डॉलर-रुपया स्पॉट मूल्य के 92.20 से 93.20 रुपये की सीमा में कारोबार करने की उम्मीद है।