RBI: बैंकिंग सिस्टम में दो लाख करोड़ रुपये डालेगा आरबीआई, 10 अरब डॉलर के फॉरेक्स स्वैप व बॉन्ड खरीद का एलान
RBI Announcement: भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकिंग सिस्टम में दो लाख करोड़ रुपये की लिक्विडिटी डालने की घोषणा की है। 10 अरब डॉलर के फॉरेक्स स्वैप और 1 लाख करोड़ की बॉन्ड खरीद से बाजार को मिलेगी राहत। पढ़ें पूरी खबर।
विस्तार
वित्तीय प्रणाली में नकदी के प्रवाह को संतुलित करने और बाजार की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक ने घोषणा की है कि वह अलग-अलग तरीकों से बैंकिंग प्रणाली में दो लाख करोड़ रुपये से अधिक की नकदी डालेगा। यह निर्णय मौजूदा तरलता और वित्तीय स्थितियों की समीक्षा के बाद लिया गया है। विश्लेषकों का मानना है कि हाल ही में रुपये में देखी गई ऐतिहासिक गिरावट और बाजार में नकदी की तंगी को देखते हुए यह कदम बेहद जरूरी है।
आरबीआई की ओर से जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, इस दो लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि को सिस्टम में लाने के लिए तीन मुख्य उपकरणों का उपयोग किया जाएगा: फॉरेक्स स्वैप, ओपन मार्केट ऑपरेशंस (ओएमओ) और वेरिएबल रेट रेपो (वीआरआर)।
क्या है आरबीआई की पूरी योजना?
- USD/INR स्वैप नीलामी: केंद्रीय बैंक 4 फरवरी, 2026 को 10 बिलियन डॉलर (लगभग 91,000 करोड़ रुपये) की 'बाय/सेल स्वैप' नीलामी आयोजित करेगा। इसकी अवधि 3 वर्ष होगी। यह कदम विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह न केवल रुपये की तरलता बढ़ाएगा बल्कि विदेशी मुद्रा बाजार को भी गहराई प्रदान करेगा।
- सरकारी बॉन्ड की खरीद (ओएमओ): आरबीआई ने खुले बाजार संचालन के तहत कुल 1 लाख करोड़ रुपये के सरकारी बॉन्ड खरीदने की घोषणा की है।
- 50,000 करोड़ रुपये की पहली बॉन्ड खरीद खरीद 5 फरवरी को होगी।
- 50,000 करोड़ रुपये की दूसरी खरीद 12 फरवरी को की जाएगी।
- वेरिएबल रेट रेपो (वीआरआर): अल्पकालिक तरलता आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए, 30 जनवरी, 2026 को 25,000 करोड़ रुपये का 90-दिवसीय वीआरआर (वीआरआर) ऑपरेशन आयोजित किया जाएगा।
भारतीय रिजर्व बैंक ने अपने बयान में क्या कहा?
आरबीआई का यह हस्तक्षेप बाजार के लिए 'संजीवनी' का काम कर सकता है। हाल ही में रुपये के 91.93 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंचने के बाद, 10 बिलियन डॉलर की स्वैप नीलामी (लगभग 91,000 करोड़ रुपये) बाजार में डॉलर की आपूर्ति और रुपये की तरलता के बीच संतुलन बनाने में मदद करेगी। आरबीआई ने अपने बयान में साफ किया है कि इन उपायों मकसद 'व्यवस्थित तरलता की स्थिति' सुनिश्चित करना है। केंद्रीय बैंक ने बाजार को आश्वस्त किया है कि वह विकसित होती वित्तीय स्थितियों की निगरानी जारी रखेगा और जब भी आवश्यकता होगी, उचित कदम उठाएगा।
आरबीआई का यह कदम बताता है कि वह विकास की गति को बनाए रखने और बैंकिंग सिस्टम में फंड्स की कमी न होने देने के लिए प्रतिबद्ध है। बॉन्ड खरीद कार्यक्रम से बॉन्ड यील्ड्स को नियंत्रित रखने में भी मदद मिलने की उम्मीद है। इन उपायों के बारे में विस्तृत निर्देश अलग से जारी किए जाएंगे।