Gaza Peace Board: क्या अमेरिकी अगुवाई वाले गाजा पीस बोर्ड में भारत को होना चाहिए शामिल? जानें GTRI ने क्या कहा
GTRI रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी अगुवाई वाले गाजा पीस बोर्ड में शामिल होना भारत की बहुपक्षीय साख और फिलिस्तीन नीति के लिए जोखिम भरा हो सकता है। इसलिए औपचारिक सदस्यता से दूर रहकर मानवीय सहायता देना भारत के लिए बेहतर विकल्प माना गया है। आइए विस्तार से जानते हैं।
विस्तार
अमेरिकी अगुवाई वाले गाजा शांति बोर्ड में शामिल होने का निमंत्रण भारत के सामने एक जटिल रणनीतिक दुविधा खड़ी कर रहा है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, यह निमंत्रण ऐसे समय आया है जब गाजा युद्ध तीसरे वर्ष में प्रवेश कर चुका है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसके समाधान को लेकर मतभेद गहरे होते जा रहे हैं।
15 जनवरी 2026 को घोषित इस बोर्ड की अध्यक्षता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कर रहे हैं। इसका उद्देश्य युद्ध के बाद गाजा में स्थिरता और पुनर्निर्माण की निगरानी करना है, लेकिन यह पूरी तरह संयुक्त राष्ट्र के ढांचे से बाहर काम करेगा। यही बात भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय बताई गई है।
फलस्तीनी भागीदारी का अभाव
जीटीआरआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि बोर्ड में फलस्तीन का कोई प्रत्यक्ष राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, इससे किसी भी निर्णय की वैधता कमजोर होगी और यह व्यवस्था 'बाहरी तौर पर थोपी गई' मानी जा सकती है। भारत पारंपरिक रूप से फलस्तीनी आत्मनिर्णय और बहुपक्षीयता का समर्थक रहा है, ऐसे में इस ढांचे में शामिल होना उसकी दीर्घकालिक विदेश नीति से टकरा सकता है।
UN को दरकिनार करने पर सवाल
रिपोर्ट यह भी चेतावनी देती है कि संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को नजरअंदाज करना अंतरराष्ट्रीय कानून और बहुपक्षीय संस्थाओं को कमजोर करता है, ऐसे सिद्धांत जिनका भारत लगातार समर्थन करता आया है। इसके अलावा, मानवीय सहायता को सुरक्षा शर्तों से जोड़ने से आपात राहत में देरी हो सकती है, जबकि संघर्ष में अब तक 30,000 से अधिक फलस्तीनी की मौत की खबरें हैं।
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व्यावसायिक हितों को लेकर आशंका
रिपोर्ट में बोर्ड की व्यावसायिक प्रकृति पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। प्रमुख वित्तीय हस्तियों की मौजूदगी और ट्रंप के पुराने बयानों को देखते हुए आशंका जताई गई है कि पुनर्निर्माण में फलस्तीनी अधिकारों, सहमति और वापसी के बजाय रियल एस्टेट और व्यावसायिक परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जा सकती है।
ट्रंप की 'रिवेरा' सोच
गाजा को लेकर ट्रंप की विवादास्पद सोच पहले भी सामने आ चुकी है। फरवरी 2025 में उन्होंने गाजा को 'मिडिल ईस्ट की रिवेरा' बताते हुए इसके पुनर्विकास की बात कही थी। इसके बाद इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ व्हाइट हाउस बैठक में ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका को गाजा को अपने कब्जे में लेकर विकसित करना चाहिए। सितंबर 2025 में इन्हीं विचारों को एक 20-सूत्रीय योजना के रूप में औपचारिक रूप दिया गया, जिससे मौजूदा बोर्ड का रास्ता साफ हुआ।
बोर्ड की संरचना और फंडिंग
17 जनवरी को अंतिम रूप दिए गए इस कार्यकारी बोर्ड में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, जेरेड कुशनर और वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा सहित कई राजनयिक और वित्तीय दिग्गज शामिल हैं। अमेरिका ने शुरुआती तौर पर एक अरब डॉलर के पुनर्निर्माण पैकेज की घोषणा की है, लेकिन यह पूरी तरह सुरक्षा शर्तों से जुड़ा होगा।
हालांकि इस्राइल इस बोर्ड का औपचारिक सदस्य नहीं है, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार सुरक्षा और क्रियान्वयन पर उसका निर्णायक प्रभाव रहेगा, जबकि फिलिस्तीन को सीधे तौर पर कोई भूमिका नहीं दी गई है।