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Manufacturing Sector: विनिर्माण क्षेत्र के विस्तार की सबसे बड़ी बाधा क्या है? एसोचैम के सर्वे में हुआ खुलासा
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: रिया दुबे
Updated Thu, 15 Jan 2026 02:18 PM IST
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सार
एसोचैम के प्री-बजट सर्वे के अनुसार उद्योग जगत की सबसे बड़ी अपेक्षा बजट 2026-27 में घरेलू मैन्युफैक्चरिंग और ‘मेक इन इंडिया’ को मजबूत करने की है। उच्च अनुपालन बोझ, महंगी लॉजिस्टिक्स-ऊर्जा लागत और सस्ती पूंजी की कमी बड़ी बाधाएं हैं।
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Adobestock
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विस्तार
उद्योग जगत के एक बड़े हिस्से ने आगामी केंद्रीय बजट 2026-27 में घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने और 'मेक इन इंडिया' पहल को और मजबूत करने को शीर्ष प्राथमिकता बताया है। एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (ASSOCHAM) द्वारा हाल ही में कराए गए प्री-बजट सर्वे के अनुसार, उच्च अनुपालन बोझ, लॉजिस्टिक्स और ऊर्जा लागत व दीर्घकालिक पूंजी तक सीमित पहुंच, विनिर्माण के विस्तार में प्रमुख बाधाएं बनी हुई हैं।
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परंपरा के अनुसार बजट 1 फरवरी को पेश किया जाएगा। सर्वे में 55% प्रतिभागियों ने अगले 12 महीनों के लिए कारोबारी माहौल को लेकर आशावाद जताया, जबकि 32% तटस्थ और 13% निराशावादी रहे।
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बजट की सबसे बड़ी प्राथमिकता घरेलू विनिर्माण का विस्तार
- सर्वे के मुताबिक, आत्मनिर्भर और विकसित भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए बजट की सबसे बड़ी प्राथमिकता घरेलू विनिर्माण का विस्तार है।
- इसके बाद एमएसएमई को मजबूती, कर और अनुपालन प्रणाली का सरलीकरण, इन्फ्रास्ट्रक्चर व लॉजिस्टिक्स विकास, कौशल और रोजगार सृजन, व डिजिटल और एआई आधारित वृद्धि प्रमुख अपेक्षाएं रहीं।
- हालांकि सरकार की इन्फ्रास्ट्रक्चर कैपेक्स, GST 2.0 सुधार और पीएलआई (PLI) योजनाओं जैसी पहलें दिशा के लिहाज से सकारात्मक मानी गईं, लेकिन उनका जमीनी असर सीमित बताया गया।
- करीब 35% उत्तरदाताओं ने कहा कि इन उपायों से अब तक कम लाभ मिला है, जबकि 39% ने प्रभाव को मध्यम बताया।
विनिर्माण क्षेत्र के के समाने ये चुनौतियां
- विनिर्माण विस्तार में सबसे बड़ी बाधा के रूप में अनुपालन और नियामकीय बोझ सामने आया।
- इसके बाद वैश्विक मांग व बाजार पहुंच, कुशल श्रम की उपलब्धता, उच्च लॉजिस्टिक्स व ऊर्जा लागत, और तकनीक व ऑटोमेशन की कमी प्रमुख चुनौतियां रहीं। गुणवत्ता मानकों और प्रमाणन से जुड़ी अड़चनें भी उद्योग ने गिनाईं।
- विकास को तेज करने के लिए उद्योग ने सस्ती दीर्घकालिक पूंजी, क्रेडिट उपलब्धता में सुधार, और तकनीक उन्नयन, ऑटोमेशन व एआई अपनाने के लिए लक्षित कर प्रोत्साहनों की मांग की।
- साथ ही पीएलआई योजनाओं का विस्तार, इंडस्ट्री 4.0 से जुड़े कर प्रोत्साहन, महत्वपूर्ण कच्चे माल पर कस्टम ड्यूटी का युक्तिकरण, और औद्योगिक पार्कों, एसईजेड व औद्योगिक समूहों में तेज मंजूरी पर जोर दिया गया।
इन क्षेत्रों में भी ध्यान देने पर जोर
- सर्वे ने मैन्युफैक्चरिंग और एमएसएमई की सेहत के बीच गहरे संबंध को भी उजागर किया। देरी से भुगतान और वर्किंग कैपिटल की कमी को सबसे बड़ी समस्या बताया गया।
- समाधान के तौर पर कैश-फ्लो आधारित लेंडिंग, जीएसटी और ई-चालान डेटा से जुड़ा ग्रीन-चैनल क्रेडिट, और समय पर भुगतान को प्रोत्साहन की मांग उठी।
- कर व्यवस्था पर उद्योग ने कहा कि टीडीएस/टीसीएस के जटिल प्रावधान नकदी प्रवाह और प्रशासनिक बोझ बढ़ाते हैं।
- आयकर अधिनियम, 2025 को लेकर भी आधे से अधिक उत्तरदाताओं का मानना है कि यह सरलीकरण और निश्चितता के उद्देश्यों को केवल आंशिक रूप से ही पूरा करेगा।
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