परिजनों को वित्तीय सुरक्षा देने या किसी आकस्मिक स्थिति में बीमारी के बोझ के खर्च से राहत दिलाने के लिए बीमा उत्पाद को निवेश का सबसे लोकप्रिय और उपयुक्त साधन माना जाता है। इसके बदले बीमाधारक को नियमित प्रीमियम का भुगतान करना होता है। किसी भी बीमा पॉलिसी का प्रीमियम तय करने में आपके जीवने की कई बातें असर छोड़ती हैं। इनमे शराब की लत, धूम्रपान और खतरा मोल लेकर व्यवसाय करने सहित पांच कारण प्रीमियम के बोझ को और ज्यादा बढ़ाते हैं।
इन पांच कारणों को किया नजरअंदाज, तो बढ़ेगा बीमा प्रीमियम का बोझ
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अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भारी पड़ेगी सिगरेट और शराब की लत
सिगरेट और शराब की लत सेहत को खतरे में डालने के साथ ही बीमारी और मौत की आशंका को और ज्यादा बढ़ाती है। लिहाजा बीमा कंपनियां प्रीमियम तय करने के साथ ही उपभोक्ता से इन बुरी आदतों के बारे में जानकारी इकटृठा करती हैं। यदि आप सिगरेट और शराब के आदती नहीं हैं, तो आपको प्रीमियम का भुगतान कम करना होता है। इसके उलट, अगर आप दोनों नशे के आदती हैं, तो प्रीमियम का भुगतान ज्यादा करना होता है और आपकी जेब पर भी बोझ बढ़ता है। ऐसा बीमाधारकों की उम्र और पॉलिसी में समानता होने पर संभव है।
काम में जोखिम लेना बढ़ाएगा प्रीमियम
यदि आपका व्यवसाय या कार्य ऐसा है जिसमे जिंदगी को अधिक खतरा है, जैसे समुद्र डायविंग, फायर फायटिंग आदि तो बीमा कंपनियां एक सामान्य व्यक्ति की तुलना में आपसे ज्यादा प्रीमियम वसूलती हैं। कुछ बीमा कंपनियां तो इस तरह के व्यक्ति का बीमा करने से भी इनकार कर देती हैं।
आपकी सेहत भी डालती है असर
यदि उपभोक्ता का वजन, लंबाई और उम्र के अनुपात में ज्यादा है, तो प्रीमियम की राशि भी अधिक होगी। दरअसल, मोटापे के शिकार लोगों में हृदय रोग, डायबिटीज,रक्तचाप से जुड़ी बीमारियों की आशंका ज्यादा होती है। इसके अलावा बीमा कंपनियां आवेदक की शारीरिक स्थिति का सही अनुमान लगाने के लिए स्वास्थ्य परीक्षण भी कराती हैं।
पीढ़ी दर पीढ़ी मिलने वाली बीमारियां
बीमा कंपनी आवेदक से पॉलिसी करवाते समय अनुवांशिक बीमारियों के संबंध में भी जानकारी मांगती हैं। अगर ऐसी कोई बीमारी है तो पॉलिसीधारक को ज्यादा प्रीमियम का भुगतान करना होगा। बीमा कंपनियां बीमाधारक के जीवन या स्वास्थ्य जोखिमों को सर्वाधिक अहमियत देती हैं। ऐसे में किसी अनुवांशिक बीमारी की आशंका से बीमाधारक का प्रीमियम भी बढ़ता है।