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Chandigarh News: पीजीआई में 200 डॉक्टर बच्चों की गंभीर बीमारियों पर करेंगे मंथन
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तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में बच्चों के फेफड़ों की सुरक्षा, बिना मशीन के सांस दिलाने की तकनीक, संक्रमण से बचाव और मरीजों की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर होगी चर्चा
संवाद न्यूज एजेंसी
चंडीगढ़। बच्चों के गंभीर बीमारी के इलाज से जुड़ा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन पीजीआई में 20 से 22 फरवरी तक होगा। इसे चौथी एशियन पीडियाट्रिक मैकेनिकल वेंटिलेशन फोरम (एपीएमवीएफ) नाम दिया है। सम्मेलन पीजीआई के एडवांस्ड पीडियाट्रिक्स सेंटर की पीडियाट्रिक क्रिटिकल केयर यूनिट की ओर से किया जा रहा है। इसमें एशिया और अन्य देशों से बच्चों के आईसीयू और वेंटिलेशन विशेषज्ञ शामिल होंगे। लगभग 200 डॉक्टर और स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसमें भाग लेंगे। सम्मेलन में बच्चों के फेफड़ों की सुरक्षा, बिना मशीन के सांस दिलाने की तकनीक, संक्रमण से बचाव और मरीजों की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी विस्तार से चर्चा होगी।
इस वर्ष का विषय सुरक्षित, आसान और दीर्घकालिक उपचार पद्धतियां रखा गया है। इसका उद्देश्य ऐसे उपचार तरीकों को बढ़ावा देना है जिन्हें सीमित या पर्याप्त संसाधनों वाले अस्पतालों में भी आसानी से लागू किया जा सके। 20 फरवरी को प्री-कॉन्फ्रेंस वर्कशॉप आयोजित की जाएगी। इसके बाद दो दिनों तक विभिन्न वैज्ञानिक सत्र, विशेषज्ञों की चर्चाएं, केस स्टडी प्रस्तुतियां और प्रश्नोत्तर कार्यक्रम होंगे। एक विशेष वर्कशॉप लिबरेशन, अर्ली अवेकनिंग एंड एक्टिविटी इन पीआईसीयू विषय पर आधारित होगी। यह मुख्य रूप से नर्सों, फिजियोथेरेपिस्ट और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के लिए है, जो वेंटिलेटर पर भर्ती बच्चों की देखभाल करते हैं। इसमें सिखाया जाएगा कि बच्चों को किस प्रकार सुरक्षित और जल्द वेंटिलेटर से हटाया जाए तथा उनकी रिकवरी प्रक्रिया को तेज किया जा सके। सम्मेलन में बच्चों के फेफड़ों की सुरक्षा, बिना मशीन के सांस दिलाने की तकनीक, संक्रमण से बचाव और मरीजों की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी विस्तार से चर्चा होगी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
चंडीगढ़। बच्चों के गंभीर बीमारी के इलाज से जुड़ा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन पीजीआई में 20 से 22 फरवरी तक होगा। इसे चौथी एशियन पीडियाट्रिक मैकेनिकल वेंटिलेशन फोरम (एपीएमवीएफ) नाम दिया है। सम्मेलन पीजीआई के एडवांस्ड पीडियाट्रिक्स सेंटर की पीडियाट्रिक क्रिटिकल केयर यूनिट की ओर से किया जा रहा है। इसमें एशिया और अन्य देशों से बच्चों के आईसीयू और वेंटिलेशन विशेषज्ञ शामिल होंगे। लगभग 200 डॉक्टर और स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसमें भाग लेंगे। सम्मेलन में बच्चों के फेफड़ों की सुरक्षा, बिना मशीन के सांस दिलाने की तकनीक, संक्रमण से बचाव और मरीजों की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी विस्तार से चर्चा होगी।
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इस वर्ष का विषय सुरक्षित, आसान और दीर्घकालिक उपचार पद्धतियां रखा गया है। इसका उद्देश्य ऐसे उपचार तरीकों को बढ़ावा देना है जिन्हें सीमित या पर्याप्त संसाधनों वाले अस्पतालों में भी आसानी से लागू किया जा सके। 20 फरवरी को प्री-कॉन्फ्रेंस वर्कशॉप आयोजित की जाएगी। इसके बाद दो दिनों तक विभिन्न वैज्ञानिक सत्र, विशेषज्ञों की चर्चाएं, केस स्टडी प्रस्तुतियां और प्रश्नोत्तर कार्यक्रम होंगे। एक विशेष वर्कशॉप लिबरेशन, अर्ली अवेकनिंग एंड एक्टिविटी इन पीआईसीयू विषय पर आधारित होगी। यह मुख्य रूप से नर्सों, फिजियोथेरेपिस्ट और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के लिए है, जो वेंटिलेटर पर भर्ती बच्चों की देखभाल करते हैं। इसमें सिखाया जाएगा कि बच्चों को किस प्रकार सुरक्षित और जल्द वेंटिलेटर से हटाया जाए तथा उनकी रिकवरी प्रक्रिया को तेज किया जा सके। सम्मेलन में बच्चों के फेफड़ों की सुरक्षा, बिना मशीन के सांस दिलाने की तकनीक, संक्रमण से बचाव और मरीजों की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी विस्तार से चर्चा होगी।