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105 दिन बाद मोगा की एडीसी बहाल: डबल मुआवजा विवाद में सस्पेंड हुईं थी PCS अधिकारी चारुमिता; जांच जारी रहेगी
संवाद न्यूज एजेंसी, मोगा (पंजाब)
Published by: अंकेश ठाकुर
Updated Fri, 20 Feb 2026 04:14 PM IST
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सार
मोगा की अतिरिक्त उपायुक्त (एडीसी) चारुमिता को 105 दिन बाद पंजाब सरकार ने बहाल कर दिया है। चारुमिता को 6 नवंबर 2025 को नेशनल हाईवे-703 (धरमकोट-शाहकोट मार्ग) से जुड़े भूमि अधिग्रहण मामले में कथित अनियमितताओं के चलते निलंबित किया गया था।
मोगा एडीसी चारुमिता।
- फोटो : संवाद
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विस्तार
लगभग तीन माह से अधिक समय तक निलंबित रहने के बाद मोगा की अतिरिक्त उपायुक्त (एडीसी) चारुमिता को पंजाब सरकार द्वारा पुनः सेवा में बहाल कर दिया गया है। पंजाब के मुख्य सचिव केएपी सिन्हा द्वारा जारी आदेशों के अनुसार उनकी बहाली तत्काल प्रभाव से लागू की गई है। हालांकि, उनके खिलाफ चल रही विभागीय जांच जारी रहेगी।
गौरतलब है कि चारुमिता को 6 नवंबर 2025 को नेशनल हाईवे-703 (धरमकोट-शाहकोट मार्ग) से जुड़े भूमि अधिग्रहण मामले में कथित अनियमितताओं के चलते निलंबित किया गया था। यह मामला तथाकथित डबल मुआवजा विवाद से संबंधित था, जिसमें भूमि मालिकों द्वारा अधिक मुआवजे की मांग को लेकर उच्च न्यायालय का रुख किया गया था।
जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि संबंधित भूमि वर्ष 1963 से ही संभवतः सरकारी स्वामित्व में थी, बावजूद इसके उसे नए अधिग्रहण के रूप में मानते हुए लगभग 3.7 करोड़ रुपये का अवार्ड पारित किया गया। जांच एजेंसियों ने इस प्रक्रिया में अनियमितताओं की आशंका जताई थी। हालांकि, 2014 बैच की पीसीएस अधिकारी चारुमिता ने शुरू से ही अपने ऊपर लगे आरोपों का खंडन किया है।
उनका कहना है कि उन्होंने किसी भी प्रकार के चेंज ऑफ लैंड यूज (सीएलयू) को मंजूरी नहीं दी थी और विवादित मुआवजे की राशि सरकारी खाते में ही सुरक्षित रही, जिसे किसी निजी व्यक्ति को जारी नहीं किया गया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार को किसी प्रकार का वित्तीय नुकसान नहीं हुआ है। सरकार द्वारा बहाली के आदेश जारी किए जाने के साथ ही विभागीय जांच की प्रक्रिया जारी रहेगी और अंतिम निर्णय जांच रिपोर्ट के आधार पर लिया जाएगा।
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गौरतलब है कि चारुमिता को 6 नवंबर 2025 को नेशनल हाईवे-703 (धरमकोट-शाहकोट मार्ग) से जुड़े भूमि अधिग्रहण मामले में कथित अनियमितताओं के चलते निलंबित किया गया था। यह मामला तथाकथित डबल मुआवजा विवाद से संबंधित था, जिसमें भूमि मालिकों द्वारा अधिक मुआवजे की मांग को लेकर उच्च न्यायालय का रुख किया गया था।
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जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि संबंधित भूमि वर्ष 1963 से ही संभवतः सरकारी स्वामित्व में थी, बावजूद इसके उसे नए अधिग्रहण के रूप में मानते हुए लगभग 3.7 करोड़ रुपये का अवार्ड पारित किया गया। जांच एजेंसियों ने इस प्रक्रिया में अनियमितताओं की आशंका जताई थी। हालांकि, 2014 बैच की पीसीएस अधिकारी चारुमिता ने शुरू से ही अपने ऊपर लगे आरोपों का खंडन किया है।
उनका कहना है कि उन्होंने किसी भी प्रकार के चेंज ऑफ लैंड यूज (सीएलयू) को मंजूरी नहीं दी थी और विवादित मुआवजे की राशि सरकारी खाते में ही सुरक्षित रही, जिसे किसी निजी व्यक्ति को जारी नहीं किया गया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार को किसी प्रकार का वित्तीय नुकसान नहीं हुआ है। सरकार द्वारा बहाली के आदेश जारी किए जाने के साथ ही विभागीय जांच की प्रक्रिया जारी रहेगी और अंतिम निर्णय जांच रिपोर्ट के आधार पर लिया जाएगा।