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जमानती मामले में दंपती की गिरफ्तारी: हाईकोर्ट ने बच्चों को थाने ले जाने पर पंजाब पुलिस को लगाई फटकार

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Thu, 09 Apr 2026 09:46 AM IST
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सार

याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन है। सुप्रीम कोर्ट ने कई बार कहा है कि गिरफ्तारी सामान्य नियम नहीं है, बल्कि जरूरी होने पर ही की जानी चाहिए, खासकर उन मामलों में जिनमें सात साल तक की सजा का प्रावधान हो।

Arrest Couple in Mohali High Court Reprimands Punjab Police for Taking Children to Police Station
पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

मोहाली के एक दंपती को जमानती मामले में गिरफ्तार करने और उनके दो छोटे बच्चों को भी जबरन थाने ले जाने के मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने पंजाब सरकार को निर्देश दिया है कि इस मामले में शामिल पुलिस अधिकारियों की जांच कर उचित कार्रवाई की जाए।
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यह आदेश मोनिका छाबड़ा की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया गया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पंजाब पुलिस की कार्रवाई के तरीके पर गंभीर सवाल उठाए। 

याचिकाकर्ता के वकील मनीष गिरी ने बताया कि फेज-11 थाने में 20 नवंबर 2025 को दर्ज एफआईआर में लगाए गए आरोप जमानती थे। इसके बावजूद पुलिस सुबह घर में पहुंची और दंपति को गिरफ्तार कर लिया। जबकि गिरफ्तारी की कोई जरूरी वजह भी दर्ज नहीं की गई थी।
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पुलिस दंपती के दो छोटे बच्चों, जिनकी उम्र करीब डेढ़ साल और पांच साल है, को भी अपने साथ थाने ले गई। बच्चे किसी भी मामले में आरोपी नहीं थे। बाद में जब दंपती को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया तो साफ हुआ कि सभी धाराएं जमानती हैं। इसके बाद दंपती को उसी दिन रिहा कर दिया गया।

याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन है। सुप्रीम कोर्ट ने कई बार कहा है कि गिरफ्तारी सामान्य नियम नहीं है, बल्कि जरूरी होने पर ही की जानी चाहिए, खासकर उन मामलों में जिनमें सात साल तक की सजा का प्रावधान हो।

याचिका में यह भी कहा गया कि इस तरह की कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन है, जो समानता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार देते हैं। साथ ही, छोटे बच्चों को थाने ले जाने पर भी गंभीर चिंता जताई गई।

कोर्ट को बताया गया कि इस मामले में वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायत दी गई थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद न्याय के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर करनी पड़ी। मामले को गंभीर मानते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को संबंधित पुलिस अधिकारियों की भूमिका की जांच कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

 
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