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आरुष की सफलता का फॉर्मूला: फोन से दूरी, दोस्तों से सिर्फ पढ़ाई की चर्चा, कक्षा 7 से तय था IIT बॉम्बे का लक्ष्य
माई सिटी रिपोर्टर, चंडीगढ़
Published by: Digvijay Singh
Updated Tue, 21 Apr 2026 12:12 AM IST
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सार
चंडीगढ़ के आरुष सिंघल ने जेईई मेन 2026 में 100 पर्सेंटाइल हासिल कर ऑल इंडिया रैंक 8 पाकर यह साबित कर दिया कि अनुशासन और फोकस से बड़ी से बड़ी मंजिल हासिल की जा सकती है।
आरुष सिंघल
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
चंडीगढ़ के आरुष सिंघल ने जेईई मेन 2026 में 100 पर्सेंटाइल हासिल कर ऑल इंडिया रैंक 8 पाकर यह साबित कर दिया कि अनुशासन और फोकस से बड़ी से बड़ी मंजिल हासिल की जा सकती है। उनकी सफलता सिर्फ अंकों की कहानी नहीं, बल्कि उस मजबूत इच्छाशक्ति की मिसाल है जिसमें उन्होंने खुद को सोशल मीडिया से पूरी तरह अलग कर लिया और पढ़ाई को ही प्राथमिकता बनाया।
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आरुष बताते हैं कि उन्होंने अपनी तैयारी के दौरान एक सख्त रूटीन अपनाया। वह नियमित रूप से क्लास अटेंड करते थे और इसके साथ ही रोज कम से कम 6–8 घंटे सेल्फ स्टडी करते थे। पढ़ाई के दौरान वह छोटे-छोटे ब्रेक लेते थे ताकि फोकस बना रहे। उनका मानना है कि लंबे समय तक लगातार पढ़ने से बेहतर है कि दिमाग को बीच-बीच में आराम दिया जाए। उनकी तैयारी का सबसे खास पहलू रहा—सोशल मीडिया से पूरी दूरी। आरुष ने खुद फैसला लिया कि वह तैयारी के दौरान किसी भी तरह के डिजिटल डिस्ट्रैक्शन से दूर रहेंगे। उन्होंने अपना फोन तक अपने माता-पिता को दे दिया और सिर्फ इमरजेंसी में ही उसका इस्तेमाल किया। वह कहते हैं कि जब उन्हें लगा कि फोन और सोशल नेटवर्किंग उनकी तैयारी के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं, तब उन्होंने तुरंत खुद को उससे अलग कर लिया।
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आरुष रोजाना वॉक भी करते थे, जिससे उनका दिमाग फ्रेश रहता था। इस दौरान वह अपने दोस्तों के साथ पढ़ाई और कॉन्सेप्ट्स पर चर्चा करते थे, जिससे उन्हें टॉपिक्स को बेहतर समझने में मदद मिलती थी। उनका फोकस हमेशा कंसेप्ट क्लियर करने पर रहा, न कि सिर्फ रटने पर।
आरुष सिंघल, जो श्री चैतन्य के 6 वर्षीय प्रोग्राम के छात्र हैं और भवन विद्यालय, चंडीगढ़ से पढ़ाई कर रहे हैं, ने कक्षा 7 में ही आई आई टी बॉम्बे पहुंचने का लक्ष्य तय कर लिया था। ओलंपियाड्स में भी उनकी शानदार उपलब्धियां रही हैं—आईएनएमओ, आईएनपीएचओ, आईएनसीएचओ और आईएनएओ जैसे एग्जाम के लिए क्वालीफाई कर चुके हैं और ओसीएससी कैंप में भी हिस्सा ले चुके हैं।
अपनी सफलता का श्रेय वह नियमित मॉक टेस्ट, उनके विश्लेषण और शिक्षकों के मार्गदर्शन को देते हैं। आरुष का कहना है, मैं हमेशा कंसेप्ट्स को समझने पर ध्यान देता हूं और निरंतरता बनाए रखता हूं। सही माहौल और गाइडेंस मिलने से मेरे डाउट्स जल्दी क्लियर हो जाते थे।

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