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बड़ी लाचार है चंडीगढ़ पुलिस: चार माह में 50 से ज्यादा बम धमकियां मिलीं, फिर भी खाली हाथ पुलिस; उलझी जांच

संदीप खत्री, संवाद, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Tue, 21 Apr 2026 04:07 PM IST
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सार

जिन ईमेल आईडी से धमकियां भेजी जा रही हैं, वे तीन साल से अधिक पुरानी हैं। उस समय ईमेल अकाउंट बनाने के लिए मोबाइल नंबर या कड़े सत्यापन की जरूरत नहीं होती थी। इसी का फायदा उठाकर फर्जी पहचान के साथ अकाउंट बनाए गए, जिन्हें ट्रेस करना अब बेहद मुश्किल साबित हो रहा है।

Chandigarh Police Over 50 Bomb Threats Received in Four Months Empty Handed
chandigarh police - फोटो : संवाद
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विस्तार

लगातार मिल रही बम धमकियों के बीच चंडीगढ़ पुलिस लाचार बनी हुई है। पिछले चार महीनों में 50 से अधिक धमकी भरे ईमेल भेजे जा चुके हैं। इनमें स्कूलों से लेकर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट, सचिवालय, पासपोर्ट कार्यालय और एयरपोर्ट तक को धमकी दी गई लेकिन पुलिस अब तक एक भी आरोपी की पहचान नहीं कर पाई है।
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धमकियों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। कई स्कूलों, जिला अदालत, हाईकोर्ट और सरकारी दफ्तरों को बार-बार ईमेल के जरिये बम से उड़ाने की चेतावनी दी जा चुकी है। हर बार सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर आती हैं, तलाशी अभियान चलाए जाते हैं लेकिन नतीजा शून्य ही रहता है। ऐसे में आम लोगों में भी असुरक्षा की भावना बढ़ने लगी है।
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जांच को आगे बढ़ाने के लिए साइबर क्राइम पुलिस ने अब देशभर के करीब 20 इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स (आईएसपी) से वीपीएन इस्तेमाल करने वाले यूजर्स का डाटा मांगा है। पुलिस सूत्रों के अनुसार इस डेटा का विस्तृत विश्लेषण कर यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि धमकी वाले ईमेल भेजे जाने के समय किन-किन कनेक्शनों का इस्तेमाल हुआ। अधिकारियों को उम्मीद है कि कुछ सेकंड के लिए सक्रिय रहे संदिग्ध कनेक्शन आरोपियों तक पहुंचने में मदद कर सकते हैं।

पुलिस का मानना है कि आरोपी बेहद शातिर तरीके से काम कर रहे हैं। पहले से तैयार कंटेंट को केवल कुछ सेकंड के लिए वीपीएन के जरिये ईमेल के रूप में भेजा जाता है जिससे उनकी असली लोकेशन छिप जाती है। यही कारण है कि अब तक जांच हर बार तकनीकी उलझनों में फंसकर रह गई है।

जांच में यह भी सामने आया है कि जिन ईमेल आईडी से धमकियां भेजी जा रही हैं, वे तीन साल से अधिक पुरानी हैं। उस समय ईमेल अकाउंट बनाने के लिए मोबाइल नंबर या कड़े सत्यापन की जरूरत नहीं होती थी। इसी का फायदा उठाकर फर्जी पहचान के साथ अकाउंट बनाए गए, जिन्हें ट्रेस करना अब बेहद मुश्किल साबित हो रहा है। पुलिस ने गूगल से भी इन ईमेल्स के आईपी एड्रेस की जानकारी मांगी है, लेकिन अब तक कोई ठोस जवाब नहीं मिल पाया है।

विदेशी आईपी एड्रेस भी सामने आए

कई मामलों में विदेशी आईपी एड्रेस भी सामने आए हैं। करीब 30 स्कूलों और सचिवालय को भेजी गई धमकियों में आईपी एड्रेस अमेरिका का पाया गया जबकि रिकवरी ईमेल बांग्लादेश से जुड़ा मिला। हालांकि, पुलिस का कहना है कि वीपीएन के जरिये लोकेशन बदलकर जांच को गुमराह किया जा रहा है। इसके अलावा जांच एजेंसियां अब वेबसाइट सर्च पैटर्न और डाटा एक्सेस की भी पड़ताल कर रही हैं। यह देखा जा रहा है कि जिन संस्थानों को धमकी मिली, उनकी जानकारी किन-किन वेबसाइट्स पर उपलब्ध है और उन साइट्स को किसने ज्यादा सर्च किया। इन डिजिटल संकेतों के आधार पर संदिग्धों की पहचान की कोशिश की जा रही है।

ईमेल की गहन जांच जारी

मामले की गंभीरता को देखते हुए चंडीगढ़ पुलिस उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली पुलिस के साथ समन्वय बनाकर जांच कर रही है। भारतपोल जैसी एजेंसियों की मदद भी ली जा रही है। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस सफलता हाथ नहीं लगी है। आईजी चंडीगढ़ पुष्पेंद्र कुमार ने बताया कि सभी बम धमकियों के मामलों में ईमेल की गहन जांच जारी है और तकनीकी स्तर पर हर पहलू खंगाला जा रहा है।
 
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