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हरियाणा विधानसभा में नया विवाद: अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण ने हुड्डा को लिखा पत्र, मांगा इन बातों का स्पष्टीकरण
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
Published by: शाहिल शर्मा
Updated Tue, 28 Apr 2026 06:01 PM IST
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सार
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा है कि यह कृत्य न केवल संसदीय परंपराओं के विपरीत प्रतीत होता है, बल्कि विधानसभा की गरिमा और स्थापित प्रक्रियाओं व नियमों पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा और विधानसभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण ने विधानसभा परिसर के बाहर तथाकथित समानांतर सत्र चलाने के नाम पर विधायकों को एकत्रित किए जाने के मामले को गंभीरता से लेते हुए नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा से औपचारिक स्पष्टीकरण देने के लिए पत्र लिखा है। इसके साथ ही विधान सभा सचिवालय ने प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव से भी इस विषय पर टिप्पणी मांगी है।
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा है कि यह कृत्य न केवल संसदीय परंपराओं के विपरीत प्रतीत होता है, बल्कि विधानसभा की गरिमा और स्थापित प्रक्रियाओं व नियमों पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष से पूछा है कि उन्होंने किन नियमों व संसदीय प्रथाओं के तहत इस प्रकार की अवांछित गतिविधि की है।
विधानसभा अध्यक्ष की ओर से लिखे गए पत्र में यह भी पूछा गया है कि 27 अप्रैल को आयोजित हरियाणा विधानसभा के विशेष सत्र व उसकी कार्यवाही को उनके द्वारा किस संवैधानिक या प्रक्रियात्मक आधार पर असंवैधानिक करार दिया गया। इसके अतिरिक्त, सदन में नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में प्रस्तुत सरकारी प्रस्ताव को ‘असंवैधानिक’ बताने के पीछे क्या ठोस आधार हैं। इस संबंध में भी विस्तृत जवाब मांगा गया है।
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि विधानसभा की कार्यवाही संविधान, नियमों और स्थापित संसदीय परंपराओं के अनुरूप संचालित होती है और किसी भी प्रकार की समानांतर या भ्रामक गतिविधि लोकतांत्रिक संस्थाओं तथा इनके सदस्यों की गरिमा व प्रतिष्ठा को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष से अपेक्षा जताई है कि वे इस विषय पर जल्द और स्पष्ट जवाब देकर स्थिति को स्पष्ट करेंगे, ताकि लोकतांत्रिक मर्यादाओं और संसदीय परंपराओं की गरिमा बनी रहे
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विधानसभा अध्यक्ष ने कहा है कि यह कृत्य न केवल संसदीय परंपराओं के विपरीत प्रतीत होता है, बल्कि विधानसभा की गरिमा और स्थापित प्रक्रियाओं व नियमों पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष से पूछा है कि उन्होंने किन नियमों व संसदीय प्रथाओं के तहत इस प्रकार की अवांछित गतिविधि की है।
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विधानसभा अध्यक्ष की ओर से लिखे गए पत्र में यह भी पूछा गया है कि 27 अप्रैल को आयोजित हरियाणा विधानसभा के विशेष सत्र व उसकी कार्यवाही को उनके द्वारा किस संवैधानिक या प्रक्रियात्मक आधार पर असंवैधानिक करार दिया गया। इसके अतिरिक्त, सदन में नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में प्रस्तुत सरकारी प्रस्ताव को ‘असंवैधानिक’ बताने के पीछे क्या ठोस आधार हैं। इस संबंध में भी विस्तृत जवाब मांगा गया है।
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि विधानसभा की कार्यवाही संविधान, नियमों और स्थापित संसदीय परंपराओं के अनुरूप संचालित होती है और किसी भी प्रकार की समानांतर या भ्रामक गतिविधि लोकतांत्रिक संस्थाओं तथा इनके सदस्यों की गरिमा व प्रतिष्ठा को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष से अपेक्षा जताई है कि वे इस विषय पर जल्द और स्पष्ट जवाब देकर स्थिति को स्पष्ट करेंगे, ताकि लोकतांत्रिक मर्यादाओं और संसदीय परंपराओं की गरिमा बनी रहे
