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पीजीआई को सफलता: एक इंजेक्शन से मिलेगी हड्डियों के दर्द से स्थायी राहत, दुनिया में पहली बार इस्तेमाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Tue, 14 Apr 2026 08:54 AM IST
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सार
कमर दर्द और जोड़ों की समस्या आज आम हो चुकी है लेकिन सटीक इलाज अब तक चुनौती बना हुआ था। चंडीगढ़ पीजीआई के न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग ने ऐसी तकनीक इजाद की है जिससे मरीजों को जल्द आराम मिलेगा।
इंजेक्शन (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
चंडीगढ़ पीजीआई ने हड्डियों और जोड़ों के लंबे समय से चले आ रहे दर्द के इलाज में बड़ी सफलता हासिल की है। संस्थान के न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग ने ऐसी नई तकनीक विकसित की है जिसमें सटीक स्थान पर लगाया गया एक इंजेक्शन मरीजों को स्थायी राहत दे रहा है।
पीजीआई के न्यूक्लियर मेडिसिन और आर्थोपेडिक विभाग की संयुक्त टीम ने पिछले तीन वर्षों में करीब 80 मरीजों पर इस तकनीक का सफल उपयोग किया है। यह शोध विश्व में अपने प्रकार का पहला माना जा रहा है और इसे वर्ष 2026 में अंतरराष्ट्रीय जर्नल ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड मॉलीक्युलर इमेजिंग में प्रकाशित किया गया है। यह जानकारी न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. अनीश भट्टाचार्य, डॉ. राजेन्द्र और आर्थोपेडिक विभाग के डॉ. विशाल ने सोमवार को प्रेसवार्ता कर दी।
विभागाध्यक्ष डॉ. अनीश भट्टाचार्य ने बताया कि कमर दर्द और जोड़ों की समस्या आज आम हो चुकी है लेकिन सटीक इलाज अब तक चुनौती बना हुआ था। इस तकनीक में फ्लोरीन-18 सोडियम फ्लोराइड पेट-सीटी स्कैन के माध्यम से शरीर में दर्द के असली स्रोत की पहचान की जाती है और फिर उसी स्थान पर रोबोटिक सहायता से इंजेक्शन दिया जाता है।
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पीजीआई के न्यूक्लियर मेडिसिन और आर्थोपेडिक विभाग की संयुक्त टीम ने पिछले तीन वर्षों में करीब 80 मरीजों पर इस तकनीक का सफल उपयोग किया है। यह शोध विश्व में अपने प्रकार का पहला माना जा रहा है और इसे वर्ष 2026 में अंतरराष्ट्रीय जर्नल ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड मॉलीक्युलर इमेजिंग में प्रकाशित किया गया है। यह जानकारी न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. अनीश भट्टाचार्य, डॉ. राजेन्द्र और आर्थोपेडिक विभाग के डॉ. विशाल ने सोमवार को प्रेसवार्ता कर दी।
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विभागाध्यक्ष डॉ. अनीश भट्टाचार्य ने बताया कि कमर दर्द और जोड़ों की समस्या आज आम हो चुकी है लेकिन सटीक इलाज अब तक चुनौती बना हुआ था। इस तकनीक में फ्लोरीन-18 सोडियम फ्लोराइड पेट-सीटी स्कैन के माध्यम से शरीर में दर्द के असली स्रोत की पहचान की जाती है और फिर उसी स्थान पर रोबोटिक सहायता से इंजेक्शन दिया जाता है।
