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मेरा शहर, मेरी सरकार: भाजपा को पिछली जीत दोहराने की चुनौती, सैनी की भी परीक्षा; विपक्ष मजबूत पर बदले समीकरण
आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Sharukh Khan
Updated Tue, 14 Apr 2026 04:13 PM IST
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सार
हरियाणा के सात निकाय चुनाव में भाजपा को पिछली जीत दोहराने की चुनौती होगी। सीएम सैनी की भी परीक्षा होगी। नगर निकाय चुनावों के जरिये परखा जाएगा कि सैनी सरकार की अब भी पकड़ है या पार्टी के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर कायम है या नहीं।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी।(फाइल फोटो)
- फोटो : संवाद
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विस्तार
हरियाणा के सात निकायों में घोषित चुनाव भाजपा के लिए सिर्फ स्थानीय सत्ता का प्रश्न नहीं, बल्कि व्यापक राजनीतिक संदेश देने का अवसर भी हैं। पंचकूला, अंबाला और सोनीपत नगर निगम चुनावों को विशेष रूप से देखा जा रहा है, क्योंकि ये चुनाव राज्य की नायब सरकार के लिए एक तरह की परीक्षा के रूप में भी देखा जा रहा है।
नायब सरकार को राज्य की सत्ता में स्थापित हुए डेढ़ साल से ज्यादा का वक्त बीत चुका है। भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी पिछली सफलताओं को दोहराने की है। पिछले नगर निगम चुनावों में पार्टी ने 11 में से दस सीटों पर मेयर पद जीतकर अपना मजबूत आधार दिखाया था।
ऐसे में इस बार अपेक्षाएं और अधिक बढ़ गई हैं। पार्टी का लक्ष्य केवल जीत हासिल करना नहीं, बल्कि अपने विजयी रथ को निरंतर आगे बढ़ाना है, ताकि यह संदेश जाए कि शहरी क्षेत्रों में भी उसकी पकड़ मजबूत बनी हुई है।
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नायब सरकार को राज्य की सत्ता में स्थापित हुए डेढ़ साल से ज्यादा का वक्त बीत चुका है। भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी पिछली सफलताओं को दोहराने की है। पिछले नगर निगम चुनावों में पार्टी ने 11 में से दस सीटों पर मेयर पद जीतकर अपना मजबूत आधार दिखाया था।
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ऐसे में इस बार अपेक्षाएं और अधिक बढ़ गई हैं। पार्टी का लक्ष्य केवल जीत हासिल करना नहीं, बल्कि अपने विजयी रथ को निरंतर आगे बढ़ाना है, ताकि यह संदेश जाए कि शहरी क्षेत्रों में भी उसकी पकड़ मजबूत बनी हुई है।
नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में भाजपा ने हाल ही में लगातार तीसरी बार हरियाणा में सरकार बनाई है, जो अपने आप में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। नगर निकाय चुनावों के जरिये परखा जाएगा कि सैनी सरकार की अब भी पकड़ है या पार्टी के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर कायम है या नहीं।
रोचक बात यह है कि जिन तीन प्रमुख नगर निगमों में चुनाव हो रहे हैं, उनमें पहले विपक्ष की मजबूत उपस्थिति रही है। सोनीपत में कांग्रेस के टिकट पर निखिल मदान और अंबाला सिटी में शक्ति रानी शर्मा ने मेयर पद जीता था मगर राजनीतिक समीकरण तेजी से बदले हैं।
निखिल मदान और शक्ति रानी शर्मा विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा का दामन थामकर विधानसभा पहुंच गए। इससे यह संकेत मिलता है कि भाजपा ने न केवल अपने संगठन को मजबूत किया है, बल्कि विपक्ष के प्रभावशाली चेहरों को भी अपने साथ जोड़ने में सफलता पाई है।
भाजपा इन चुनावों में अच्छा प्रदर्शन करती है, तो यह न केवल राज्य में उसकी स्थिति को और मजबूत करेगा, बल्कि भविष्य के चुनावों के लिए भी सकारात्मक माहौल बनाएगा। भाजपा के लिए यह एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जहां उसे अपनी नीतियों, नेतृत्व और संगठन की क्षमता को फिर से साबित करना होगा।
तीनों निगमों में कांग्रेस के सांसद, भाजपा के नौ विधायक
अंबाला और पंचकूला, अंबाला लोकसभा क्षेत्र में आते हैं, जहां 2024 में कांग्रेस के वरुण चौधरी सांसद बने थे। वहीं सोनीपत नगर निगम, सोनीपत लोकसभा सीट के अंतर्गत आता है, जिसे कांग्रेस के सतपाल ब्रह्मचारी ने जीता था। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन गड़बड़ा गया था।
अंबाला और पंचकूला, अंबाला लोकसभा क्षेत्र में आते हैं, जहां 2024 में कांग्रेस के वरुण चौधरी सांसद बने थे। वहीं सोनीपत नगर निगम, सोनीपत लोकसभा सीट के अंतर्गत आता है, जिसे कांग्रेस के सतपाल ब्रह्मचारी ने जीता था। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन गड़बड़ा गया था।
सोनीपत लोकसभा क्षेत्र की 9 विधानसभा सीटों में कांग्रेस केवल 2 ही सीटें जुलाना (विनेश फोगाट) और बरोदा (इंदु राज नरवाल) जीत पाई। बाकी 6 सीटें भाजपा के खाते में गईं, जबकि एक सीट निर्दलीय उम्मीदवार ने जीती।
अंबाला लोकसभा क्षेत्र में कांग्रेस ने 9 में से 6 विधानसभा सीटें जीतीं, जबकि भाजपा ने 3 सीटों पर कब्जा बरकरार रखा।
भाजपा चुनाव के लिए हर वक्त तैयार रहती है। पार्टी ने अपनी तैयार कर रखी है। चुनाव लड़ने के इच्छुक उम्मीदवारों से आवेदन मांगे जा चुके हैं। भाजपा सभी निगमों पर चुनाव जीतेगी।-मोहन लाल बड़ौली, प्रदेश अध्यक्ष
