लोकसभा चुनाव 2024: हरियाणा में नए गठबंधन की कवायद, बसपा पर कांग्रेस और इनेलो की निगाहें
लोकसभा चुनाव से ठीक पहले हरियाणा में कांग्रेस और इनेलो की निगाहें बसपा पर आ टिकी हैं। दोनों ही दल अब बसपा को साधने में जुटे हैं। हालांकि बसपा सुप्रीमो मायावती पहले ही साफ कर चुकी हैं कि वह किसी भी दल से गठबंधन नहीं करेंगी। मगर सियासी गलियारों में गठबंधन की कवायद की चर्चा है।
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हरियाणा में लोकसभा चुनाव से पहले नए गठबंधन की चर्चा तेज हो गई है। प्रदेश में प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस और दोबारा से रानीतिक जमीन मजबूत करने में जुटी इनेलो (इंडियन नेशनल लोकदल) की नजर बसपा (बहुजन समाज पार्टी) पर है। हालांकि, कुछ दिन पहले ही बसपा सुप्रीमो ने किसी से भी गठबंधन नहीं करने का एलान कर चुकी हैं। बावजूद इसके दिल्ली में बसपा को साधने की कोशिशें की जा रही हैं।
हरियाणा में लगातार राजनीतिक समीकरण बदल रहे हैं। कांग्रेस और आप के गठबंधन के बाद अब इनेलो महागठबंधन में शामिल होने की कोशिश में हैं। इससे पहले, ताऊ देवीलाल की जयंती पर हुई रैली के माध्यम से भी इसकी कोशिश की गई थी। अगर इनेलो महागठबंधन में शामिल नहीं हो सका तो वह बसपा के साथ हाथ मिला सकता है। इससे पहले 2018 में भी बसपा और इनेलो का गठबंधन हुआ था, हालांकि, कुछ ही माह बाद यह यह बिखर गया था।
गौर हो कि पिछले लोकसभा चुनाव में बसपा ने चार प्रतिशत वोट हासिल किए थे और इस बार आठ प्रतिशत का टारगेट रखा है। बसपा पार्टी के हर हलके में पक्के मतदाता हैं और वह अन्य किसी दल को वोट देने की बजाय अपनी पार्टी के प्रति समर्पित रहते हैं। बसपा के इसी वोट बैंक पर कांग्रेस और इनेलो की नजर है।
यात्रा के बाद अब जिला स्तर पर सम्मेलन करेगी बसपा
चुनाव से ठीक पहले हरियाणा बसपा ने प्रदेशभर में यात्रा निकाल कर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का प्रयास किया है। बसपा के प्रदेशाध्यक्ष राजबीर सौरखी की अगुवाई में निकली इस यात्रा के बाद से कार्यकर्ताओं में जोश का संचार हुआ है। अब जिला स्तर पर बसपा अपने सम्मेलन करेगी और अपने कार्यकर्ताओं को एकजुट करेगी। इस बारे में प्रदेशाध्यक्ष राजबीर सौरखी का कहना है कि किसी दल से गठबंधन को लेकर कोई फैसला नहीं हुआ है। हरियाणा की मौजूदा स्थिति की रिपोर्ट हाईकमान को भेजी जाएगी और अंतिम फैसला बसपा सुप्रीमो ही करेंगी।