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बिजली बिलिंग पर घमासान: जेईआरसी जनसुनवाई में गड़बड़ियों का मुद्दा उठा
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चंडीगढ़। शहर में बिजली बिलिंग को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। सेक्टर-10 के कॉलेज सभागार में बुधवार को आयोजित संयुक्त विद्युत नियामक आयोग (जेईआरसी) की जनसुनवाई में उपभोक्ताओं ने बिलिंग गड़बड़ियों को लेकर कड़ी आपत्तियां दर्ज कराईं। जनसुनवाई की अध्यक्षता आलोक टंडन और ज्योति प्रसाद ने की जबकि चंडीगढ़ पावर डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (सीपीडीएल) के निदेशक अरुण वर्मा समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
इंडियन सिटीजन्स फोरम (आईसीएफ) के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि नई केवीएएच आधारित बिलिंग प्रणाली के चलते गैर-घरेलू उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। उनके अनुसार 1 नवंबर 2025 से लागू इस व्यवस्था में कई स्थानों पर लगे मीटर अभी भी केवीएएच रीडिंग दर्ज करने में सक्षम नहीं हैं। इसके बावजूद केडब्ल्यूएच खपत को एक तय पावर फैक्टर (0.85) के आधार पर केवीएएच में बदलकर बिलिंग की जा रही है जिससे वास्तविक खपत का सही आकलन नहीं हो पा रहा।
फोरम ने केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के नियमों का हवाला देते हुए कहा कि मीटरों में सभी जरूरी मापदंडों को रिकॉर्ड और प्रदर्शित करने की सुविधा होनी चाहिए, लेकिन वर्तमान व्यवस्था में उपभोक्ताओं को गलत बिल दिए जा रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए जेईआरसी ने हस्तक्षेप किया। अध्यक्ष आलोक टंडन ने निर्देश दिए कि पहले से बदले जा चुके 25 हजार मीटरों के अलावा शेष 20 हजार मीटरों को भी प्राथमिकता के आधार पर जल्द अपग्रेड किया जाए। आयोग ने भरोसा दिलाया कि बिलिंग प्रणाली को पारदर्शी और सटीक बनाने के लिए आवश्यक सुधार किए जाएंगे, ताकि उपभोक्ताओं को राहत मिल सके।
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इंडियन सिटीजन्स फोरम (आईसीएफ) के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि नई केवीएएच आधारित बिलिंग प्रणाली के चलते गैर-घरेलू उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। उनके अनुसार 1 नवंबर 2025 से लागू इस व्यवस्था में कई स्थानों पर लगे मीटर अभी भी केवीएएच रीडिंग दर्ज करने में सक्षम नहीं हैं। इसके बावजूद केडब्ल्यूएच खपत को एक तय पावर फैक्टर (0.85) के आधार पर केवीएएच में बदलकर बिलिंग की जा रही है जिससे वास्तविक खपत का सही आकलन नहीं हो पा रहा।
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फोरम ने केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के नियमों का हवाला देते हुए कहा कि मीटरों में सभी जरूरी मापदंडों को रिकॉर्ड और प्रदर्शित करने की सुविधा होनी चाहिए, लेकिन वर्तमान व्यवस्था में उपभोक्ताओं को गलत बिल दिए जा रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए जेईआरसी ने हस्तक्षेप किया। अध्यक्ष आलोक टंडन ने निर्देश दिए कि पहले से बदले जा चुके 25 हजार मीटरों के अलावा शेष 20 हजार मीटरों को भी प्राथमिकता के आधार पर जल्द अपग्रेड किया जाए। आयोग ने भरोसा दिलाया कि बिलिंग प्रणाली को पारदर्शी और सटीक बनाने के लिए आवश्यक सुधार किए जाएंगे, ताकि उपभोक्ताओं को राहत मिल सके।