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Chandigarh: मध्य प्रदेश जेल से चल रहा था ट्राइसिटी का हथियार तस्करी नेटवर्क, अब 'भाई जान' पर कसेगा शिकंजा

संदीप खत्री, संवाद, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Fri, 24 Apr 2026 10:20 AM IST
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सार

गिरोह केवल हथियार तस्करी तक सीमित नहीं था। चंडीगढ़, झामपुर, जुझारनगर, जीरकपुर और पंचकूला में व्यापारियों और अन्य लोगों से लक्की पटियाल के नाम पर रंगदारी वसूली भी की जा रही थी।

Chandigarh TriCity Arms Smuggling Network Operated from Madhya Pradesh Jail
चंडीगढ़ पुलिस - फोटो : संवाद/फाइल
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विस्तार

चंडीगढ़ ऑपरेशन सेल की ओर से गिरफ्तार आठ आरोपियों से पूछताछ में अंतरराज्यीय हथियार तस्करी नेटवर्क का खुलासा हुआ है। 

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जांच में सामने आया है कि इस पूरे गिरोह का संचालन मध्य प्रदेश की जेल में बंद कुख्यात तस्कर भाई जान कर रहा था। पुलिस अब उसे प्रोडक्शन वारंट पर चंडीगढ़ लाकर गहन पूछताछ की तैयारी में है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार भाई जान जेल में रहते हुए भी अपने गुर्गों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिये ट्राइसिटी में हथियारों की सप्लाई का पूरा नेटवर्क संचालित कर रहा था। इस मामले में गिरफ्तार मुख्य आरोपी मुकेश उर्फ गुल्लू गुहाना समेत 8 आरोपियों से पूछताछ में कई अहम खुलासे हुए हैं। 

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आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर रहा पूरा नेटवर्क 

गुल्लू को सेक्टर-25 स्थित रैली ग्राउंड के पास मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया गया था। इस दौरान आरोपी ने पुलिस टीम पर तीन राउंड फायर किए जबकि जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने दो राउंड फायर कर उसे काबू किया। पूछताछ में सामने आया कि गिरोह के तार मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश से जुड़े हुए हैं और हथियारों की सप्लाई इन्हीं राज्यों से ट्राइसिटी तक पहुंचाई जा रही थी।

जांच में यह भी सामने आया है कि पूरा नेटवर्क आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर रहा था। इंस्टाग्राम, टेलीग्राम और सिग्नल जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए हथियारों की डील फाइनल की जाती थी। इसके बाद मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश से हथियार मंगवाकर चंडीगढ़ में मौजूद नेटवर्क को सौंप दिए जाते थे। मांग आने पर तुरंत सप्लाई की जाती थी। पुलिस ने अब तक आरोपियों के कब्जे से 15 हथियार और 14 कारतूस बरामद किए हैं। इनमें 12 पिस्टल और सेमी-ऑटोमैटिक हथियार शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, चंडीगढ़ में यह पहली बार है जब इतनी बड़ी संख्या में सेमी-ऑटोमैटिक हथियार बरामद किए गए हैं। जांच में यह भी सामने आया कि मनीमाजरा निवासी राहुल उर्फ रैली और मोनू उर्फ कांडू, जो लक्की पटियाल गैंग से जुड़े बताए जा रहे हैं, इस नेटवर्क में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। मोनू, गुल्लू गुहाना का भांजा बताया जा रहा है।

रंगदारी और ड्रग्स नेटवर्क की भी जांच

पुलिस जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि यह गिरोह केवल हथियार तस्करी तक सीमित नहीं था। चंडीगढ़, झामपुर, जुझारनगर, जीरकपुर और पंचकूला में व्यापारियों और अन्य लोगों से लक्की पटियाल के नाम पर रंगदारी वसूली भी की जा रही थी। इसके अलावा ड्रग्स तस्करों से मासिक उगाही का भी आरोप है। ऑपरेशन सेल अब इस पूरे रंगदारी नेटवर्क की भी गहन जांच कर रही है। गिरफ्तार सभी आरोपियों के खिलाफ पहले से ही कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। वहीं गुल्लू गुहाना के भाई और जेल में बंद गैंगस्टर सन्नी गुहाना का नाम धनास में अमरजीत उर्फ तोता पर फायरिंग केस में भी सामने आ चुका है।

प्रारंभिक जांच में मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश से हथियार तस्करी का संगठित नेटवर्क सामने आया है। पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और अन्य कड़ियों को जोड़ने का प्रयास जारी है। - विकास श्योकंद, डीएसपी

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