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Chandigarh News: पूर्व व वर्तमान सांसद-विधायकों पर लंबित आपराधिक मामलों की स्थिति का ब्योरा तलब
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चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने वर्तमान व पूर्व सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की जांच व सुनवाई में हो रही देरी पर कड़ा रुख अपनाते हुए हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़ व केंद्र सरकार को 8 अप्रैल तक स्टेटस रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि पूर्व के आदेश के अनुसार करनाल और मेवात के जिला एवं सत्र न्यायाधीशों ने मांगी गई रिपोर्ट जमा करवा दी है जिसे हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड पर ले लिया है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हाईकोर्ट ने माननीयों पर लंबित मामलों के निपटारे में तेजी लाने के लिए संज्ञान लिया है। इससे पहले हुई सुनवाई में हरियाणा सरकार की ओर से पेश वकील ने बताया कि राज्य में वर्तमान और पूर्व सांसदों/विधायकों के खिलाफ कुल 13 आपराधिक मामले लंबित हैं। इनमें से एक एफआईआर 2025 में दर्ज हुई थी और चालान दाखिल हो चुका है जबकि 12 मामलों में जांच अभी जारी है।
इससे पहले चीफ जस्टिस ने नाराजगी जताते हुए कहा था कि यदि यह कोई आम व्यक्ति होता तो छह महीने में जांच पूरी कर जेल भेजा जाता। पंजाब में भी वर्तमान और पूर्व जनप्रतिनिधियों के खिलाफ कुल 28 मामले लंबित हैं जिनमें से अधिकांश 2023 और 2024 में दर्ज हुए थे। हाईकोर्ट ने साफ किया था कि लंबित मामलों में तेजी लाकर निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करना आवश्यक है ताकि जनता का विश्वास कायम रहे और कानूनी प्रक्रिया में किसी भी तरह की देरी न हो। वीरवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि फिलहाल माननीयों पर लंबित मामलों का आंकड़ा तो मौजूद है लेकिन उन मामलों की वर्तमान स्थिति के बारे में सटीक जानकारी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में केंद्र सरकार सीबीआई व ईडी से जुड़े मामले व हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ पुलिस उनके पास लंबित आपराधिक मामलों की स्थिति से अगली सुनवाई पर कोर्ट को अवगत करवाए।
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सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हाईकोर्ट ने माननीयों पर लंबित मामलों के निपटारे में तेजी लाने के लिए संज्ञान लिया है। इससे पहले हुई सुनवाई में हरियाणा सरकार की ओर से पेश वकील ने बताया कि राज्य में वर्तमान और पूर्व सांसदों/विधायकों के खिलाफ कुल 13 आपराधिक मामले लंबित हैं। इनमें से एक एफआईआर 2025 में दर्ज हुई थी और चालान दाखिल हो चुका है जबकि 12 मामलों में जांच अभी जारी है।
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इससे पहले चीफ जस्टिस ने नाराजगी जताते हुए कहा था कि यदि यह कोई आम व्यक्ति होता तो छह महीने में जांच पूरी कर जेल भेजा जाता। पंजाब में भी वर्तमान और पूर्व जनप्रतिनिधियों के खिलाफ कुल 28 मामले लंबित हैं जिनमें से अधिकांश 2023 और 2024 में दर्ज हुए थे। हाईकोर्ट ने साफ किया था कि लंबित मामलों में तेजी लाकर निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करना आवश्यक है ताकि जनता का विश्वास कायम रहे और कानूनी प्रक्रिया में किसी भी तरह की देरी न हो। वीरवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि फिलहाल माननीयों पर लंबित मामलों का आंकड़ा तो मौजूद है लेकिन उन मामलों की वर्तमान स्थिति के बारे में सटीक जानकारी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में केंद्र सरकार सीबीआई व ईडी से जुड़े मामले व हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ पुलिस उनके पास लंबित आपराधिक मामलों की स्थिति से अगली सुनवाई पर कोर्ट को अवगत करवाए।