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Chandigarh News: चंडीगढ़ की सड़कों पर फिर किसान, थम गई रफ्तार<bha>;</bha> स्कूलों की करानी पड़ी छुट्टी
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चंडीगढ़। चार दिन पहले किसानों के मटका चौक मार्च ने आधे शहर को घंटों जाम में झोंक दिया था। स्कूली बच्चे, मरीज, बुजुर्ग और दफ्तर जाने वाले कर्मचारी लंबे समय तक सड़कों पर फंसे रहे थे। इससे सबक लेते हुए सोमवार को प्रशासन पहले से कहीं अधिक सतर्क नजर आया। भारत-अमेरिका प्रस्तावित व्यापार समझौते, पंजाब सरकार की लैंड पूलिंग नीति और अन्य किसान मुद्दों के विरोध में निकली पंजाब के किसानों की बाइक रैली को देखते हुए रूट पर पड़ने वाले कई सरकारी और निजी स्कूलों की समय से पहले छुट्टी करा दी गई, ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया गया और करीब दो हजार सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई। इसके बावजूद सेक्टर-36 चौक पर करीब एक किलोमीटर लंबा जाम लग गया और लोगों को तेज धूप में करीब 20 मिनट तक इंतजार करना पड़ा।
सोमवार दोपहर मोहाली के वाईपीएस चौक से सैकड़ों बाइकों और करीब 50 अन्य वाहनों का काफिला चंडीगढ़ में दाखिल हुआ। किसान भारत-अमेरिका ट्रेड डील, पंजाब सरकार की लैंड पूलिंग नीति और अन्य मांगों के समर्थन में बाइक मार्च निकाल रहे थे। रैली के निर्धारित मार्ग पर पहुंचते ही सेक्टर-34, 35 और 36 के आसपास यातायात रोककर डायवर्ट कर दिया गया। किसान भवन से अटावा चौक तक वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। सबसे अधिक दबाव सेक्टर-36 चौक पर देखने को मिला, जहां दोपहर करीब एक बजे करीब 20 मिनट तक यातायात प्रभावित रहा।
तेज धूप और उमस के बीच वाहन चालकों को सड़क पर रुककर इंतजार करना पड़ा। कई लोगों ने इंजन बंद कर गाड़ियों के भीतर ही समय बिताया जबकि कुछ दोपहिया चालक छांव की तलाश में सड़क किनारे खड़े दिखाई दिए। इस दौरान कार्यालय जाने वाले कर्मचारी, ऑटो चालक और राहगीरों को सबसे अधिक परेशानी हुई। मुख्य मार्गों पर दबाव बढ़ने से सेक्टर-36 और आसपास की आंतरिक सड़कों पर भी यातायात धीमा पड़ गया।
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शुक्रवार के अनुभव से बदली रणनीति
शुक्रवार को मटका चौक तक निकले किसान मार्च के दौरान शहर के प्रमुख मार्ग घंटों जाम की चपेट में रहे थे। उस दिन 15 मिनट का सफर एक घंटे से अधिक में पूरा हुआ था और स्कूली बच्चे, मरीज तथा बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हुए थे। सोमवार को ऐसी स्थिति दोबारा न बने इसके लिए प्रशासन ने पहले ही स्कूलों की छुट्टी समय से पहले करा दी। रैली स्थल के आसपास की अंदरूनी सड़कें पहले से बंद कर दी गईं और ट्रैफिक को वैकल्पिक मार्गों पर भेजा गया। इससे हालात पहले की तुलना में काफी नियंत्रित रहे, हालांकि सेक्टर-36 चौक पर कुछ समय के लिए दबाव बना रहा।
दो हजार जवानों के सुरक्षा घेरे में निकला मार्च
रैली के मद्देनजर चंडीगढ़ पुलिस ने सुरक्षा का व्यापक घेरा बनाया। करीब 1,500 से 2,000 पुलिसकर्मियों के अलावा सीआरपीएफ, बीएसएफ और आईटीबीपी के जवान तैनात किए गए। सेक्टर-34 और सेक्टर-35 क्षेत्र में ही एक हजार से अधिक सुरक्षाकर्मी ड्यूटी पर रहे। जगह-जगह बैरिकेडिंग, ट्रैफिक डायवर्जन, क्विक रिस्पांस टीमें और वायरलेस के जरिये लगातार निगरानी की जाती रही। पुलिस अधिकारियों का पूरा फोकस इस बात पर रहा कि शुक्रवार जैसी स्थिति दोबारा पैदा न हो। रैली शांतिपूर्वक संपन्न होने के बाद चरणबद्ध तरीके से यातायात सामान्य कर दिया गया।
कोट
किसान रैली के लिए पहले से विस्तृत ट्रैफिक और सुरक्षा योजना लागू की गई थी। रूट पर पड़ने वाले स्कूलों की छुट्टी समय से पहले कराई गई और सभी विभागों के समन्वय से व्यवस्था संभाली गई। जहां कुछ समय के लिए यातायात का दबाव बढ़ा, वहां पुलिस ने तत्काल ट्रैफिक सामान्य कराया। -निशांत कुमार यादव, उपायुक्त, चंडीगढ़
यातायात पुलिस ने पहले ही एडवाइजरी जारी कर दी थी। किसानों ने भी निर्धारित रूट और पुलिस के निर्देशों का पूरा पालन किया। पूरे मार्च के दौरान कानून-व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में रही और ट्रैफिक को चरणबद्ध तरीके से सामान्य किया गया। -नीरज सरना, डीएसपी ट्रैफिक, चंडीगढ़
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सोमवार दोपहर मोहाली के वाईपीएस चौक से सैकड़ों बाइकों और करीब 50 अन्य वाहनों का काफिला चंडीगढ़ में दाखिल हुआ। किसान भारत-अमेरिका ट्रेड डील, पंजाब सरकार की लैंड पूलिंग नीति और अन्य मांगों के समर्थन में बाइक मार्च निकाल रहे थे। रैली के निर्धारित मार्ग पर पहुंचते ही सेक्टर-34, 35 और 36 के आसपास यातायात रोककर डायवर्ट कर दिया गया। किसान भवन से अटावा चौक तक वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। सबसे अधिक दबाव सेक्टर-36 चौक पर देखने को मिला, जहां दोपहर करीब एक बजे करीब 20 मिनट तक यातायात प्रभावित रहा।
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तेज धूप और उमस के बीच वाहन चालकों को सड़क पर रुककर इंतजार करना पड़ा। कई लोगों ने इंजन बंद कर गाड़ियों के भीतर ही समय बिताया जबकि कुछ दोपहिया चालक छांव की तलाश में सड़क किनारे खड़े दिखाई दिए। इस दौरान कार्यालय जाने वाले कर्मचारी, ऑटो चालक और राहगीरों को सबसे अधिक परेशानी हुई। मुख्य मार्गों पर दबाव बढ़ने से सेक्टर-36 और आसपास की आंतरिक सड़कों पर भी यातायात धीमा पड़ गया।
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शुक्रवार के अनुभव से बदली रणनीति
शुक्रवार को मटका चौक तक निकले किसान मार्च के दौरान शहर के प्रमुख मार्ग घंटों जाम की चपेट में रहे थे। उस दिन 15 मिनट का सफर एक घंटे से अधिक में पूरा हुआ था और स्कूली बच्चे, मरीज तथा बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हुए थे। सोमवार को ऐसी स्थिति दोबारा न बने इसके लिए प्रशासन ने पहले ही स्कूलों की छुट्टी समय से पहले करा दी। रैली स्थल के आसपास की अंदरूनी सड़कें पहले से बंद कर दी गईं और ट्रैफिक को वैकल्पिक मार्गों पर भेजा गया। इससे हालात पहले की तुलना में काफी नियंत्रित रहे, हालांकि सेक्टर-36 चौक पर कुछ समय के लिए दबाव बना रहा।
दो हजार जवानों के सुरक्षा घेरे में निकला मार्च
रैली के मद्देनजर चंडीगढ़ पुलिस ने सुरक्षा का व्यापक घेरा बनाया। करीब 1,500 से 2,000 पुलिसकर्मियों के अलावा सीआरपीएफ, बीएसएफ और आईटीबीपी के जवान तैनात किए गए। सेक्टर-34 और सेक्टर-35 क्षेत्र में ही एक हजार से अधिक सुरक्षाकर्मी ड्यूटी पर रहे। जगह-जगह बैरिकेडिंग, ट्रैफिक डायवर्जन, क्विक रिस्पांस टीमें और वायरलेस के जरिये लगातार निगरानी की जाती रही। पुलिस अधिकारियों का पूरा फोकस इस बात पर रहा कि शुक्रवार जैसी स्थिति दोबारा पैदा न हो। रैली शांतिपूर्वक संपन्न होने के बाद चरणबद्ध तरीके से यातायात सामान्य कर दिया गया।
कोट
किसान रैली के लिए पहले से विस्तृत ट्रैफिक और सुरक्षा योजना लागू की गई थी। रूट पर पड़ने वाले स्कूलों की छुट्टी समय से पहले कराई गई और सभी विभागों के समन्वय से व्यवस्था संभाली गई। जहां कुछ समय के लिए यातायात का दबाव बढ़ा, वहां पुलिस ने तत्काल ट्रैफिक सामान्य कराया। -निशांत कुमार यादव, उपायुक्त, चंडीगढ़
यातायात पुलिस ने पहले ही एडवाइजरी जारी कर दी थी। किसानों ने भी निर्धारित रूट और पुलिस के निर्देशों का पूरा पालन किया। पूरे मार्च के दौरान कानून-व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में रही और ट्रैफिक को चरणबद्ध तरीके से सामान्य किया गया। -नीरज सरना, डीएसपी ट्रैफिक, चंडीगढ़