{"_id":"697b9e331152995d1404f7c2","slug":"high-court-acquits-94-year-old-man-in-murder-case-2026-01-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"94 साल के कैदी को कोर्ट ने दी राहत: हत्या के मामले में हाईकोर्ट ने किया बरी, 25 साल लड़ी कानूनी लड़ाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
94 साल के कैदी को कोर्ट ने दी राहत: हत्या के मामले में हाईकोर्ट ने किया बरी, 25 साल लड़ी कानूनी लड़ाई
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
Published by: शाहिल शर्मा
Updated Thu, 29 Jan 2026 11:22 PM IST
विज्ञापन
सार
हाईकोर्ट ने करीब ढाई दशक पुराने मामले में 94 वर्षीय व्यक्ति को राहत देते हुए उसे हत्या के दोष से मुक्त कर दिया है।
पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
विस्तार
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने करीब ढाई दशक पुराने मामले में 94 वर्षीय व्यक्ति को राहत देते हुए उसे हत्या के दोष से मुक्त कर दिया है। कोर्ट ने इसे गैर इरादतन हत्या का मामला मानते हुए सजा को पहले से ही जेल में बिताए गए समय तक सीमित कर दिया। जस्टिस एनएस शेखावत और एचएस ग्रेवाल की खंडपीठ ने आरोपी की वृद्धावस्था और जेल में बिताए समय को ध्यान में रखा।
दिसंबर 2000 का है मामला
अदालत ने कहा कि वर्तमान मामले के विशिष्ट तथ्यों और परिस्थितियों में मामला गैर इरादतन हत्या के अंतर्गत आएगा। आरोप के मुताबिक करनाल निवासी स्वर्ण सिंह को शक था कि उसकी बेटी का अवैध संबंध है और दिसंबर 2000 में हुई हाथापाई के दौरान उसने चाकू से हमला करके कथित प्रेमी को घायल कर दिया और बाद में उसकी मौत हो गई।
6 साल 4 महीने की सजा काट चुका था दोषी
अपीलकर्ता की वृद्धावस्था और उसके द्वारा भुगते गए समय को ध्यान में रखते हुए अपीलकर्ता पर लगाई गई सजा को उसके जेल में भुगते गए समय तक कम कर दिया गया है। राज्य द्वारा उपलब्ध कराए गए हिरासत प्रमाण पत्र के अनुसार, आरोपी पहले ही 6 साल और 4 महीने से अधिक की सजा काट चुका है। निचली अदालत के आदेश में इस हद तक संशोधन किया जाता है कि आरोपी को गैर इरादतन हत्या के अपराध में दोषी ठहराया जाता है और उसे जुर्माने की राशि में कोई परिवर्तन किए बिना, उसके द्वारा पहले से भुगती गई अवधि की सजा सुनाई गई।
Trending Videos
दिसंबर 2000 का है मामला
अदालत ने कहा कि वर्तमान मामले के विशिष्ट तथ्यों और परिस्थितियों में मामला गैर इरादतन हत्या के अंतर्गत आएगा। आरोप के मुताबिक करनाल निवासी स्वर्ण सिंह को शक था कि उसकी बेटी का अवैध संबंध है और दिसंबर 2000 में हुई हाथापाई के दौरान उसने चाकू से हमला करके कथित प्रेमी को घायल कर दिया और बाद में उसकी मौत हो गई।
विज्ञापन
विज्ञापन
6 साल 4 महीने की सजा काट चुका था दोषी
अपीलकर्ता की वृद्धावस्था और उसके द्वारा भुगते गए समय को ध्यान में रखते हुए अपीलकर्ता पर लगाई गई सजा को उसके जेल में भुगते गए समय तक कम कर दिया गया है। राज्य द्वारा उपलब्ध कराए गए हिरासत प्रमाण पत्र के अनुसार, आरोपी पहले ही 6 साल और 4 महीने से अधिक की सजा काट चुका है। निचली अदालत के आदेश में इस हद तक संशोधन किया जाता है कि आरोपी को गैर इरादतन हत्या के अपराध में दोषी ठहराया जाता है और उसे जुर्माने की राशि में कोई परिवर्तन किए बिना, उसके द्वारा पहले से भुगती गई अवधि की सजा सुनाई गई।