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हाईकोर्ट का फैसला: सास-ससुर दिवंगत बहू के कानूनी प्रतिनिधि, मुआवजा मांगने के हकदार; ट्रिब्यूनल का फैसला पलटा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Wed, 03 Jun 2026 10:05 AM IST
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सार

1 फरवरी 2000 को हरियाणा के करनाल में हुए एक सड़क हादसे में बलविंदर सिंह और उनकी पत्नी शोभा रानी की मौत हो गई थी। बलविंदर सिंह के माता-पिता ने बेटे के साथ ही बहू की मृत्यु पर भी मुआवजा मांगा था।

High Court overturned Motor Accident Claims Tribunal ruling daughter in law death claim compensation
पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में यह स्पष्ट कर दिया कि गृहिणी द्वारा परिवार के लिए दी जाने वाली सेवाओं का आर्थिक मूल्य होता है और दुर्घटना मुआवजे का निर्धारण करते समय इन सेवाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। 



अदालत ने एक वृद्ध दंपति को उनकी बहू की सड़क दुर्घटना में मृत्यु के लिए 8.66 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया। जस्टिस यशवीर सिंह राठौर की पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि सास-ससुर अपनी दिवंगत बहू के कानूनी प्रतिनिधि और आश्रित के रूप में मुआवजा मांगने के हकदार हैं।
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अदालत ने दंपति के बेटे बलविंदर सिंह की मृत्यु पर पहले दिए गए 1.38 लाख रुपये के मुआवजे को बढ़ाकर 7.14 लाख रुपये कर दिया। मामला 1 फरवरी 2000 को हरियाणा के करनाल में हुए एक सड़क हादसे से जुड़ा है। दुर्घटना में बलविंदर सिंह और उनकी पत्नी शोभा रानी की मौत हो गई थी। आरोप था कि एक ट्रक चालक ने लापरवाही और तेज गति से वाहन चलाते हुए दोनों को टक्कर मार दी थी।

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बहू की मृत्यु के लिए मांगा था मुआवजा

हादसे के बाद बलविंदर सिंह के माता-पिता ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण में मुआवजे की याचिका दायर की। उन्होंने अपने बेटे के साथ-साथ बहू शोभा रानी की मृत्यु के लिए भी मुआवजे की मांग की। अक्टूबर 2002 में ट्रिब्यूनल ने बेटे की मृत्यु के लिए 1.38 लाख रुपये का मुआवजा तो दिया, लेकिन बहू शोभा रानी के संबंध में दावा खारिज कर दिया। 

हाईकोर्ट ने पलटा फैसला

ट्रिब्यूनल का मानना था कि सास-ससुर न तो बहू के कानूनी उत्तराधिकारी हैं और न ही उसके आश्रित, इसलिए वे मुआवजे के पात्र नहीं हैं। इसके बाद वृद्ध दंपति ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल के फैसले को पलटते हुए कहा कि शोभा रानी एक गृहिणी थीं और वे अपने परिवार के लिए महत्वपूर्ण सेवाएं प्रदान कर रही थीं। अदालत ने कहा कि गृहिणी का योगदान केवल आय अर्जित करने तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह परिवार के संचालन और सदस्यों की देखभाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। शोभा रानी की घरेलू सेवाओं को आर्थिक मूल्य देते हुए अदालत ने उनके सास-ससुर को 8.66 लाख रुपये का मुआवजा प्रदान किया। वहीं बेटे बलविंदर सिंह के मामले में भी मुआवजा बढ़ाकर 7.14 लाख रुपये किया गया।

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