सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   High Court Paves Way for Motherhood Woman Over 50 years Permitted to Continue IVF treatment

हाईकोर्ट ने खोला मातृत्व का रास्ता: कनाडा निवासी महिला को IVF जारी रखने की अनुमति, 50 से अधिक हो चुकी है उम्र

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Tue, 14 Apr 2026 08:31 AM IST
विज्ञापन
सार

याचिकाकर्ता दंपती ने वर्ष 2019 में एक आईवीएफ केंद्र और नर्सिंग होम से संपर्क किया था। उस समय उनकी आयु क्रमशः 47 और 48 वर्ष थी। चिकित्सीय प्रक्रिया के तहत 17 दिसंबर 2019 को चार भ्रूण तैयार किए गए।

High Court Paves Way for Motherhood Woman Over 50 years Permitted to Continue IVF treatment
पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने मानवीय दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कनाडा में रहने वाले एक दंपती को भारत में सहायक प्रजनन तकनीक (आईवीएफ) के माध्यम से दूसरा बच्चा पैदा करने की अनुमति दे दी है। 
Trending Videos


अदालत ने स्पष्ट किया कि पहले से तैयार भ्रूण के आधार पर उपचार जारी रखने से केवल आयु सीमा का हवाला देकर इनकार नहीं किया जा सकता।

जस्टिस जगमोहन बंसल की पीठ ने 50 वर्ष से अधिक आयु की महिला को भ्रूण प्रत्यारोपण कराने की अनुमति प्रदान की। यह भ्रूण छह वर्ष पहले तब तैयार किए गए थे, जब महिला निर्धारित आयु सीमा के भीतर थी। 
विज्ञापन
विज्ञापन


याचिकाकर्ता दंपती ने वर्ष 2019 में एक आईवीएफ केंद्र और नर्सिंग होम से संपर्क किया था। उस समय उनकी आयु क्रमशः 47 और 48 वर्ष थी। चिकित्सीय प्रक्रिया के तहत 17 दिसंबर 2019 को चार भ्रूण तैयार किए गए, जिनमें से एक से एक बालिका का जन्म हुआ जबकि तीन भ्रूण अब भी सुरक्षित रखे गए हैं।

बाद में महिला की आयु 50 वर्ष से अधिक हो जाने के कारण संबंधित प्राधिकरणों ने आगे की प्रक्रिया पर आपत्ति जताई। इसके बाद दंपती ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए शेष सुरक्षित भ्रूणों के उपयोग की अनुमति मांगी। याची पक्ष ने दलील दी कि भ्रूण उस समय तैयार किए गए थे जब महिला आयु सीमा के भीतर थी। 

दूसरी ओर, आईवीएफ केंद्र ने अदालत को बताया कि महिला पूरी तरह स्वस्थ है और गर्भधारण में कोई गंभीर चिकित्सीय बाधा नहीं है। हालांकि, यह शर्त रखी कि यदि उपचार के दौरान कोई चिकित्सीय जटिलता उत्पन्न होती है तो उसकी जिम्मेदारी दंपती को स्वयं उठानी होगी। दंपती ने इस शर्त को स्वीकार करते हुए आवश्यक हलफनामा देने पर सहमति जताई। 

सभी पक्षों की दलीलों और पूर्व निर्णय को ध्यान में रखते हुए अदालत ने याचिका स्वीकार कर ली और निर्देश दिया कि दंपती संबंधित प्राधिकरण के समक्ष एक दिन के भीतर आवश्यक आश्वासन प्रस्तुत करें। इसके बाद चिकित्सा संस्थान उपचार आगे बढ़ाने के लिए स्वतंत्र होगा।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed