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हाईराइज बिल्डिंग से बिगड़ेगा चंडीगढ़ का स्वरूप, ऐसा नहीं होने देंगे: क्राफ्ड

Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 01 Jun 2026 01:08 AM IST
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High-rise buildings will spoil the look of Chandigarh, we will not allow this to happen: CRAFD
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चंडीगढ़। हाईराइज बिल्डिंग चंडीगढ़ के दिल को खराब कर देगी, ऐसा नहीं होने देंगे। चंडीगढ़ की मूल पहचान, हरियाली और नियोजित ढांचे के साथ किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। अगर जरूरत पड़ी तो आंदोलन भी किया जाएगा। यह बातें सेक्टर-9 अमर उजाला कार्यालय में रविवार को अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में चंडीगढ़ रेजिडेंट्स एसोसिएशन वेलफेयर फेडरेशन (क्राफ्ड) के पदाधिकारियों ने कहीं।

संवाद में क्राफ्ड के चेयरमैन हितेश पुरी, राजेश राय, तरसेम शर्मा, जोगिंदर सिंह, अतुल गुप्ता, आरएल गोयल, अमनदीप सिंह सैनी, अमृतपाल सिंह, सुशील मल्होत्रा, हरीश थापर, आईपी सिंह, केएल सचदेवा, कुणाल कपिला, अरविंद दुबे, कुलजिंदर सरां और अमित मित्तल सहित कई पदाधिकारी मौजूद रहे। सभी ने हाईराइज बिल्डिंग योजना का विरोध करते हुए कहा कि इससे शहर का इंफ्रास्ट्रक्चर पूरी तरह चरमरा जाएगा।
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क्राफ्ड चेयरमैन हितेश पुरी ने कहा कि चंडीगढ़ स्वतंत्रता के बाद करीब पांच लाख आबादी के हिसाब से बसाया गया था जबकि आज शहर की आबादी 15 लाख के करीब पहुंच चुकी है। ऐसे में यदि हाईराइज बिल्डिंग बनाई गईं तो पानी, बिजली, सीवर, ट्रांसपोर्ट, अस्पताल और स्कूल जैसी मूलभूत सुविधाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यह योजना शहरवासियों के हित में नहीं है और इससे चंडीगढ़ दो हिस्सों में बंट जाएगा।
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राजेश राय ने कहा कि चंडीगढ़ पूरी दुनिया में अपनी विशेष पहचान रखता है। हाईराइज बिल्डिंग का प्रस्ताव विकास नहीं बल्कि विनाश का मॉडल है। उन्होंने कहा कि शहर के लोगों और सामाजिक संगठनों से चर्चा किए बिना इस तरह की नीतियां नहीं बननी चाहिए। तरसेम शर्मा और जोगिंदर सिंह ने कहा कि नई योजना से ट्रैफिक और पार्किंग की समस्या और गंभीर होगी। उन्होंने आशंका जताई कि इसके पीछे बिल्डर और प्रॉपर्टी लॉबी का दबाव भी हो सकता है।
अतुल गुप्ता ने कहा कि शहर पहले ही ट्रैफिक, पानी की कमी, पार्किंग और खराब सड़कों जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। ऐसे में ऊंची इमारतें पर्यावरण और संसाधनों पर अतिरिक्त बोझ डालेंगी। आरएल गोयल और अमनदीप सिंह सैनी ने कहा कि हाईराइज निर्माण से चंडीगढ़ कंक्रीट का जंगल बन जाएगा और शहर की पहचान खत्म हो जाएगी।
अमृतपाल सिंह ने कहा कि चंडीगढ़ भूकंपीय क्षेत्र में आता है इसलिए हाईराइज निर्माण से पहले सुरक्षा पहलुओं पर गंभीरता से विचार जरूरी है। सुशील मल्होत्रा ने कहा कि ऊंची इमारतों के लिए बड़ी संख्या में पेड़ कटेंगे, जिससे हरियाली और पर्यावरण प्रभावित होगा। हरीश थापर ने कहा कि शहर का मौजूदा ढांचा पहले ही दबाव में है और अब यह अतिरिक्त बोझ नहीं उठा सकता। आईपी सिंह ने कहा कि चंडीगढ़ पंजाब और हरियाणा दोनों की राजधानी है, इसलिए किसी भी बड़े फैसले से पहले दोनों राज्यों और स्थानीय नागरिकों से चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि न्यू चंडीगढ़, पंचकूला और मोहाली में बेहतर स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं का अभाव होने के कारण पूरा दबाव चंडीगढ़ पर आ रहा है।
केएल सचदेवा ने कहा कि जो प्राप्त है वही पर्याप्त है। कुणाल कपिला ने सुझाव दिया कि खाली जमीन पर अस्पताल और शैक्षणिक संस्थान बनाए जाने चाहिए। अरविंद दुबे ने शहर की ग्रीनरी बचाने पर जोर दिया, जबकि कुलजिंदर सरां ने कहा कि टूटी सड़कें और पानी की समस्या पहले से गंभीर हैं, ऐसे में हाईराइज बिल्डिंग की योजना समझ से परे है। अमित मित्तल ने कहा कि शहर को खुला वातावरण और हरियाली चाहिए, न कि ऊंची इमारतें।
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