सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   High Court Landmark Verdict No Fee for New VIP Numbers in Exchange for Old Ones Haryana Government

हाईकोर्ट का अहम फैसला: पुराने के बदले नए वीआईपी नंबर पर नहीं लगेगी कोई फीस, हरियाणा सरकार का आदेश रद्द

विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Mon, 01 Jun 2026 10:43 AM IST
विज्ञापन
सार

हाईकोर्ट ने कहा कि हरियाणा सरकार ने किसी वैधानिक नियम के बजाय केवल मेमो और सर्कुलर जारी कर नीति लागू करने का प्रयास किया, जबकि इसके लिए कानून में कोई अधिकार नहीं दिया गया था। इसी आधार पर विवादित आदेश अवैध है। 
 

High Court Landmark Verdict No Fee for New VIP Numbers in Exchange for Old Ones Haryana Government
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार

पुराने और पसंदीदा वाहन नंबर रखने वाले हजारों वाहन मालिकों को बड़ी राहत देते हुए हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि दशकों पुरानी सीरीज के नंबरों को नई सीरीज में बदलने पर वाहन मालिकों से प्रेफरेंशियल (पसंदीदा) नंबर की फीस नहीं वसूली जा सकती है। 



अदालत ने साफ कर दिया कि पुराने नंबरों को नई सीरीज में बदला जा सकता है, लेकिन इसके लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जा सकता, चाहे वह वीआईपी या पसंदीदा नंबर ही क्यों न हो। जस्टिस जगमोहन बंसल ने 14 से अधिक याचिकाओं का एक साथ निपटारा करते हुए यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया।
विज्ञापन
विज्ञापन


अदालत ने अपने फैसले में उल्लेख किया कि यह मुद्दा तीसरी बार न्यायालय के समक्ष आया है। विवाद उन वाहनों के पंजीकरण नंबरों को लेकर है जो मोटर वाहन अधिनियम, 1988 लागू होने से पहले जारी किए गए थे और जिनकी शुरुआत एचआर के बजाय पुराने अक्षरों से होती थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि सरकार पहले भी कई बार अदालत में आश्वासन दे चुकी है कि पुराने नंबरों को नई सीरीज में बिना किसी शुल्क के बदला जाएगा। इसके बावजूद 8 नवंबर 2019 को जारी आदेश के जरिए सरकार ने अपना रुख बदल लिया और पसंदीदा नंबर रखने वालों से फीस मांगनी शुरू कर दी।

विज्ञापन
Trending Videos

वाहन पंजीकरण चिह्नों की वैधता का अधिकार केवल केंद्र के पास

हाईकोर्ट ने कहा कि वाहन पंजीकरण चिह्नों की वैधता और उनके नवीनीकरण से जुड़े नियम बनाने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है। राज्य सरकार को इस विषय में नियम बनाने या ऐसे आदेश जारी करने का अधिकार नहीं है। 


हरियाणा सरकार ने किसी वैधानिक नियम के बजाय केवल मेमो और सर्कुलर जारी कर नीति लागू करने का प्रयास किया, जबकि इसके लिए कानून में कोई अधिकार नहीं दिया गया था। इसी आधार पर विवादित आदेश अवैध है। 

फैसले में कोर्ट ने 2010 और 2019 के अपने पुराने आदेशों का भी उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार पहले ही यह स्वीकार कर चुके थे कि पुराने सीरीज के नंबर वाहन मालिकों के पास बने रह सकते हैं और यदि उन्हें नई सीरीज में बदला जाए तो समान मूल्य वाला नंबर बिना अतिरिक्त शुल्क दिए आवंटित किया जाएगा। उदाहरण के तौर पर एचआरके-4 को एचआर 0004 तथा एचआरओ -10 को एचआर-0010 नंबरों में बदला जा सकता है।

इस फैसले का लाभ उन हजारों वाहन मालिकों को मिलेगा जिनके पास संयुक्त पंजाब या पुरानी सीरीज के विशेष और वीआईपी नंबर हैं। अब यदि ऐसे नंबरों को नई एचआर सीरीज में बदला जाता है तो सरकार उनसे कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं वसूल सकेगी। इतना ही नहीं, अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि यह राहत केवल सामान्य नंबरों तक सीमित नहीं है, बल्कि पसंदीदा और वीआईपी नंबरों पर भी समान रूप से लागू होगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed