हाईकोर्ट का अहम फैसला: पुराने के बदले नए वीआईपी नंबर पर नहीं लगेगी कोई फीस, हरियाणा सरकार का आदेश रद्द
हाईकोर्ट ने कहा कि हरियाणा सरकार ने किसी वैधानिक नियम के बजाय केवल मेमो और सर्कुलर जारी कर नीति लागू करने का प्रयास किया, जबकि इसके लिए कानून में कोई अधिकार नहीं दिया गया था। इसी आधार पर विवादित आदेश अवैध है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पुराने और पसंदीदा वाहन नंबर रखने वाले हजारों वाहन मालिकों को बड़ी राहत देते हुए हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि दशकों पुरानी सीरीज के नंबरों को नई सीरीज में बदलने पर वाहन मालिकों से प्रेफरेंशियल (पसंदीदा) नंबर की फीस नहीं वसूली जा सकती है।
अदालत ने साफ कर दिया कि पुराने नंबरों को नई सीरीज में बदला जा सकता है, लेकिन इसके लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जा सकता, चाहे वह वीआईपी या पसंदीदा नंबर ही क्यों न हो। जस्टिस जगमोहन बंसल ने 14 से अधिक याचिकाओं का एक साथ निपटारा करते हुए यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया।
अदालत ने अपने फैसले में उल्लेख किया कि यह मुद्दा तीसरी बार न्यायालय के समक्ष आया है। विवाद उन वाहनों के पंजीकरण नंबरों को लेकर है जो मोटर वाहन अधिनियम, 1988 लागू होने से पहले जारी किए गए थे और जिनकी शुरुआत एचआर के बजाय पुराने अक्षरों से होती थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि सरकार पहले भी कई बार अदालत में आश्वासन दे चुकी है कि पुराने नंबरों को नई सीरीज में बिना किसी शुल्क के बदला जाएगा। इसके बावजूद 8 नवंबर 2019 को जारी आदेश के जरिए सरकार ने अपना रुख बदल लिया और पसंदीदा नंबर रखने वालों से फीस मांगनी शुरू कर दी।
वाहन पंजीकरण चिह्नों की वैधता का अधिकार केवल केंद्र के पास
हाईकोर्ट ने कहा कि वाहन पंजीकरण चिह्नों की वैधता और उनके नवीनीकरण से जुड़े नियम बनाने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है। राज्य सरकार को इस विषय में नियम बनाने या ऐसे आदेश जारी करने का अधिकार नहीं है।
हरियाणा सरकार ने किसी वैधानिक नियम के बजाय केवल मेमो और सर्कुलर जारी कर नीति लागू करने का प्रयास किया, जबकि इसके लिए कानून में कोई अधिकार नहीं दिया गया था। इसी आधार पर विवादित आदेश अवैध है।
फैसले में कोर्ट ने 2010 और 2019 के अपने पुराने आदेशों का भी उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार पहले ही यह स्वीकार कर चुके थे कि पुराने सीरीज के नंबर वाहन मालिकों के पास बने रह सकते हैं और यदि उन्हें नई सीरीज में बदला जाए तो समान मूल्य वाला नंबर बिना अतिरिक्त शुल्क दिए आवंटित किया जाएगा। उदाहरण के तौर पर एचआरके-4 को एचआर 0004 तथा एचआरओ -10 को एचआर-0010 नंबरों में बदला जा सकता है।
इस फैसले का लाभ उन हजारों वाहन मालिकों को मिलेगा जिनके पास संयुक्त पंजाब या पुरानी सीरीज के विशेष और वीआईपी नंबर हैं। अब यदि ऐसे नंबरों को नई एचआर सीरीज में बदला जाता है तो सरकार उनसे कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं वसूल सकेगी। इतना ही नहीं, अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि यह राहत केवल सामान्य नंबरों तक सीमित नहीं है, बल्कि पसंदीदा और वीआईपी नंबरों पर भी समान रूप से लागू होगी।