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मोहाली में बदहाल कानून व्यवस्था: हाईकोर्ट सख्त, पूछा-पीएम सुरक्षा चूक से जुड़े अधिकारी को एसएसपी कैसे लगाया

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो Updated Fri, 06 Feb 2026 03:05 AM IST
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सार

एसएसपी कार्यालय के बाहर फायरिंग, चौकीदार की पिटाई व जेलों में अपराधियों के नेटवर्क पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए पंजाब के डीजीपी को इस बारे में विस्तृत जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।

How was the officer involved in the PM's security breach appointed as the SSP of Mohali?
पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

मोहाली में बिगड़ती कानून-व्यवस्था पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए पुलिस प्रशासन को कठघरे में खड़ा कर दिया है। 
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अदालत ने एसएसपी हरमनदीप सिंह हंस की नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए डीजीपी से पूछा है कि प्रधानमंत्री की सुरक्षा चूक से जुड़े अधिकारी को मोहाली जैसे संवेदनशील जिले में कैसे तैनात किया गया।

एसएसपी कार्यालय के बाहर फायरिंग, चौकीदार की पिटाई व जेलों में अपराधियों के नेटवर्क पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए पंजाब के डीजीपी को इस बारे में विस्तृत जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने डीजीपी को निर्देश दिए कि पेट्रोलिंग, चेक पोस्टों पर तैनात पुलिस बल और वीआईपी सुरक्षा में लगाए गए कर्मियों का पूरा विवरण हलफनामे के साथ पेश किया जाए।
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खंडपीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हालात चिंताजनक हैं और पुलिस की निष्क्रियता बर्दाश्त नहीं की जा सकती। कोर्ट ने कहा कि मोहाली कोर्ट के कर्मचारी की दिन दहाड़े पिटाई कर कोर्ट परिसर में बलपूर्वक प्रवेश हुआ और मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) के स्पष्ट आदेशों के बाद भी आठ महीने तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, अब कैंसिलेशन रिपोर्ट की तैयारी है। कोर्ट ने इसे अत्यंत गंभीर और चिंताजनक करार देते हुए कहा कि क्या आप मूक दर्शक बनकर सब कुछ देखते रहेंगे।

वीसी से पेश हुए पुलिस महानिदेशक

वीसी के जरिये पेश हुए पुलिस महानिदेशक गौरव यादव को अदालत ने चौकीदार की पिटाई के मामले में मोहाली के एसएसपी के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश देते हुए चेताया कि यदि प्रशासन ने कदम नहीं उठाए तो न्यायालय को स्वयं आदेश पारित करने पड़ेंगे। डीजीपी ने बताया कि मोहाली एसएसपी कार्यालय के बाहर हुई फायरिंग में शूटरों की पहचान कर दो अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य में अब तक 7,000 से अधिक हथियार सील किए गए, 700 से ज्यादा आर्म्स लाइसेंस रद्द किए गए हैं। साथ ही प्रदेश में 1,100 से अधिक वसूली के मामलों में केस दर्ज हुए हैं।

बरामदगी केवल जिम्मेदारी से बचने जैसा

फिरौती से जुड़ी कुछ शिकायतों में रिकवरी के प्रयासों की दलील पर हाईकोर्ट ने कहा कि इसका अर्थ है कि पुलिस हालात पर नियंत्रण पाने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही है। यदि राज्य केवल शिकायतें दर्ज कर राशि की बरामदगी तक ही सीमित है, तो यह केवल जिम्मेदारी से बचने जैसा है। कोर्ट ने कहा कि संगठित अपराध और गैंगवार अंकुश लगाना पुलिस का सांविधानिक दायित्व है।
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