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पीजीआई-पीयू की स्टडी: चंडीगढ़ में जानलेवा साबित हो रही हीटवेव, 65 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को खतरा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो Updated Fri, 06 Feb 2026 03:04 AM IST
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सार

शोध के अनुसार, सामान्य दिनों में पुरुषों में औसतन रोजाना मौतों की संख्या महिलाओं से अधिक रही, लेकिन हीटवेव के दौरान दोनों के लिए जोखिम लगभग समान पाया गया। पीयू के पर्यावरण अध्ययन विभाग की प्रोफेसर डॉ. सुमन मोर ने बढ़ती गर्मी को देखते हुए हीट एक्शन प्लान की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया।

The heatwave in Chandigarh is proving deadly, posing a risk to those over 65 years of age.
हीटस्ट्रोक - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार

चंडीगढ़ में हीटवेव जानलेवा साबित हो सकती है, खासकर 65 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए। पीजीआई और पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) के संयुक्त अध्ययन में सामने आया है कि बुजुर्गों में हीटवेव से मौत का खतरा सामान्य आबादी की तुलना में करीब डेढ़ गुना अधिक हो जाता है। 
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रिपोर्ट के अनुसार अत्यधिक गर्मी के दौरान चंडीगढ़ में मृत्यु जोखिम में स्पष्ट बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जब शहर में अधिकतम तापमान 33.8 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंचता है, तो मौतों का खतरा तेजी से बढ़ने लगता है। इस दौरान रोजाना मृत्यु दर में औसतन 4.1 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई।
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यह अध्ययन पीजीआई के कम्युनिटी मेडिसिन एवं स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ विभाग के प्रोफेसर डॉ. रविंद्र खैवाल के नेतृत्व में किया गया। इसमें वर्ष 2010 से 2015 तक के छह वर्षों के दैनिक मृत्यु आंकड़ों और मौसम रिकॉर्ड का विस्तृत विश्लेषण किया गया, जिसके बाद ये चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। अध्ययन को अंतरराष्ट्रीय जर्नल नेचर साइंटिफिक रिपोर्ट्स में प्रकाशित किया गया है।

शोध के अनुसार, सामान्य दिनों में पुरुषों में औसतन रोजाना मौतों की संख्या महिलाओं से अधिक रही, लेकिन हीटवेव के दौरान दोनों के लिए जोखिम लगभग समान पाया गया। पीयू के पर्यावरण अध्ययन विभाग की प्रोफेसर डॉ. सुमन मोर ने बढ़ती गर्मी को देखते हुए हीट एक्शन प्लान की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे प्लान वार्ड स्तर तक तैयार किए जाने चाहिए, ताकि अधिक जोखिम वाले क्षेत्रों और लोगों की समय रहते पहचान कर उन्हें सुरक्षित किया जा सके। उन्होंने कहा कि यह अध्ययन वास्तविक मृत्यु आंकड़ों पर आधारित है और सरकार व प्रशासन के लिए चेतावनी है कि जलवायु परिवर्तन और बढ़ती गर्मी से निपटने के लिए ठोस और जमीनी कदम उठाए जाएं, ताकि विशेष रूप से बुजुर्गों और कमजोर वर्गों की जान बचाई जा सके।
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