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Chandigarh News: मां की प्रेरणा से बेटियों ने दुनिया में लहराया तिरंगा

Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 08 Mar 2026 02:33 AM IST
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Inspired by their mother, daughters hoisted the tricolor across the world
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चंडीगढ़। महिला दिवस केवल महिलाओं के अधिकार और समानता की बात नहीं करता बल्कि उनके उस जज्बे और ताकत को भी सलाम करता है जो नई पीढ़ी को आगे बढ़ने की राह दिखाती है। शहर की दो अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी क्रिकेटर हरलीन देयोल और निशानेबाज अंजुम मोदगिल इसका अनुकरीय उदाहरण हैं। दोनों खिलाड़ियों की सफलता के पीछे उनकी माताओं का मार्गदर्शन, अनुशासन और प्रेरणा रही, जिसने बेटियों को बचपन से ही बड़े सपने देखने और उन्हें हासिल करने का हौसला दिया। महिला दिवस पर ये कहानियां बताती हैं कि महिलाएं केवल खुद ही नहीं आगे बढ़तीं बल्कि अगली पीढ़ी को भी सफलता की राह दिखाती हैं। मां के रूप में, मार्गदर्शक के रूप में और प्रेरणा के रूप में उनका योगदान समाज को नई दिशा देता है।
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मां के साथ शुरू हुआ सफर... टीम इंडिया तक पहुंचीं हरलीन

भारतीय महिला क्रिकेट टीम की स्टार खिलाड़ी हरलीन देयोल की सफलता के पीछे उनकी मां चरणजीत कौर की बड़ी भूमिका रही है। चरणजीत कौर पुडा में नौकरी करती थीं लेकिन बेटी के सपनों को साकार करने के लिए उन्होंने कभी समय या मेहनत की कमी नहीं होने दी। हरलीन वाईपीएस स्कूल में पढ़ती थीं। जब उन्होंने क्रिकेट खेलने की इच्छा जताई तो मां ने न सिर्फ उनका हौसला बढ़ाया बल्कि खुद भी खेल के माहौल से जुड़ गईं। नौकरी के साथ वह रोजाना बेटी को ट्रेनिंग सेंटर लेकर जातीं और वापस लेकर आतीं। ट्रेनिंग के दौरान वह घर से खाना लेकर जातीं और हरलीन की डाइट का खास ध्यान रखतीं। मां के इस सहयोग और हरलीन की मेहनत का असर जल्द ही दिखाई देने लगा। मात्र आठ साल की उम्र में हरलीन ने स्कूल की क्रिकेट टीम में जगह बना ली। इसके बाद 2010 में पंजाब टीम और फिर भारतीय महिला क्रिकेट टीम तक का सफर तय किया। आज वह टीम इंडिया की ऑलराउंडर हैं और महिला प्रीमियर लीग में भी शानदार प्रदर्शन कर रही हैं।
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मां से सीखी निशानेबाजी, अंजुम ने दिलाया ओलंपिक कोटा

शहर की अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज अंजुम मोदगिल की सफलता भी उनकी मां शुभ मोदगिल की प्रेरणा से जुड़ी है। शुभ मोदगिल एनसीसी ऑफिसर होने के साथ खुद भी निशानेबाज थीं और नियमित रूप से सेक्टर-25 के शूटिंग रेंज में अभ्यास करती थीं। अक्सर वह छोटी अंजुम को भी साइकिल पर बैठाकर शूटिंग रेंज ले जाती थीं। मां को निशानेबाजी करते देख अंजुम के मन में भी इस खेल के प्रति रुचि जागी। आठवीं कक्षा में उन्होंने स्कूल में एनसीसी ज्वाइन कर लिया। शूटिंग की शुरुआती जानकारी और प्रशिक्षण मां ने ही दिया। गर्मी हो या सर्दी, मां रोज बेटी के साथ अभ्यास के लिए जातीं और उसे मानसिक रूप से मजबूत बनने की प्रेरणा देतीं। धीरे-धीरे अंजुम ने राज्य स्तर पर पदक जीतने शुरू किए और फिर राष्ट्रीय टीम में जगह बना ली। 2018 में दक्षिण कोरिया में आयोजित विश्व चैंपियनशिप में अंजुम ने 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में रजत पदक जीतकर टोक्यो ओलंपिक के लिए कोटा हासिल किया। इसके साथ ही वह महिला वर्ग में भारत को ओलंपिक कोटा दिलाने वाली पहली भारतीय निशानेबाज बन गईं।
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