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जानकीदास हत्याकांड: एक माह बाद भी दो सवालों में उलझी जांच
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चंडीगढ़। सेक्टर-11 स्थित श्रीकुमार केमिस्ट के कैशियर जानकीदास हत्याकांड को सोमवार को एक माह पूरा हो जाएगा। इस दौरान चंडीगढ़ पुलिस मामले में आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर पूछताछ कर चुकी है लेकिन जांच अब भी दो अहम सवालों पर अटकी हुई है। पहला, हत्या में इस्तेमाल हुई जिगाना पिस्टल कहां है और दूसरा, शूटरों का वास्तविक निशाना कौन था। मृतक की पत्नी ईना देवी का आरोप है कि इन दोनों सवालों के जवाब अब तक पुलिस के पास नहीं हैं।
ईना देवी ने कहा कि 13 जून को हुई हत्या के बाद परिवार अंतिम संस्कार के लिए हिमाचल प्रदेश के रोहडू गया था और सभी रस्में पूरी कर वापस भी लौट आया लेकिन इस पूरे एक महीने में न तो किसी पुलिस अधिकारी ने उनसे संपर्क किया और न ही जांच की प्रगति से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि घटना के बाद दस्तावेजी प्रक्रिया के लिए परिवार स्वयं सेक्टर-11 थाना गया था। इसके बाद थाना पुलिस या किसी वरिष्ठ अधिकारी की ओर से कोई संपर्क नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि मीडिया के माध्यम से जानकारी मिली कि पुलिस आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, लेकिन अब तक जांच किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंची है।
एक माह बाद भी नहीं मिली जिगाना पिस्टल
ईना देवी ने कहा कि एक महीने की जांच के बाद पुलिस को केवल कजहेड़ी के जंगलों से शूटरों के कपड़े मिले हैं। हत्या में इस्तेमाल की गई जिगाना पिस्टल और शूटरों के असली टारगेट का अब तक कोई सुराग नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस यह कह रही है कि आरोपी साक्ष्य मिटाने के लिए पिस्टल वापस पाकिस्तान भेज चुके हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि पाकिस्तान से हथियार भारत में आ सकते हैं और वारदात के बाद वापस भी भेजे जा सकते हैं तो यह सुरक्षा व्यवस्था के लिए बेहद गंभीर मामला है।
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बेटे के भविष्य की चिंता, अब तक नहीं मिला जवाब
ईना देवी ने बताया कि वह पिछले डेढ़ वर्ष से पति जानकीदास और इकलौते बेटे के साथ धनास में किराये के मकान में रह रही थीं। उनका बेटा बीकॉम की पढ़ाई कर रहा है। पति की हत्या के बाद परिवार पूरी तरह टूट गया है। उन्होंने कहा कि पुलिस अभी तक यह भी स्पष्ट नहीं कर पाई कि हत्या की असली वजह क्या थी। परिवार आज भी न्याय और सच्चाई सामने आने का इंतजार कर रहा है।
बॉक्स : क्या है जिगाना पिस्टल
जिगाना पिस्टल का निर्माण तुर्की की कंपनी टीशाश करती है। यह सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल 9×19 मिमी कैलिबर में उपलब्ध होती है और मॉडल के अनुसार इसकी मैगजीन क्षमता 15 से 17 राउंड तक होती है। इसे मूल रूप से सेना, पुलिस और लाइसेंसी नागरिकों के लिए विकसित किया गया था, लेकिन भारत में अवैध तस्करी के जरिए यह कुछ आपराधिक गिरोहों तक पहुंच चुकी है। अवैध बाजार में इसकी कीमत करीब सात से नौ लाख रुपये बताई जाती है।
बॉक्स : सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड के बाद चर्चा में आई
जिगाना पिस्टल पहली बार व्यापक चर्चा में तब आई जब सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड में इसके इस्तेमाल की बात सामने आई। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि ऐसे हथियार तुर्की से चीन और फिर पाकिस्तान के रास्ते भारत पहुंचते हैं। हालांकि अब तक ऐसा कोई कथित सप्लायर गिरफ्तार नहीं हुआ है, जिससे इस पूरे नेटवर्क की आधिकारिक पुष्टि हो सके।
ईना देवी ने कहा कि 13 जून को हुई हत्या के बाद परिवार अंतिम संस्कार के लिए हिमाचल प्रदेश के रोहडू गया था और सभी रस्में पूरी कर वापस भी लौट आया लेकिन इस पूरे एक महीने में न तो किसी पुलिस अधिकारी ने उनसे संपर्क किया और न ही जांच की प्रगति से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि घटना के बाद दस्तावेजी प्रक्रिया के लिए परिवार स्वयं सेक्टर-11 थाना गया था। इसके बाद थाना पुलिस या किसी वरिष्ठ अधिकारी की ओर से कोई संपर्क नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि मीडिया के माध्यम से जानकारी मिली कि पुलिस आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, लेकिन अब तक जांच किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंची है।
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एक माह बाद भी नहीं मिली जिगाना पिस्टल
ईना देवी ने कहा कि एक महीने की जांच के बाद पुलिस को केवल कजहेड़ी के जंगलों से शूटरों के कपड़े मिले हैं। हत्या में इस्तेमाल की गई जिगाना पिस्टल और शूटरों के असली टारगेट का अब तक कोई सुराग नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस यह कह रही है कि आरोपी साक्ष्य मिटाने के लिए पिस्टल वापस पाकिस्तान भेज चुके हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि पाकिस्तान से हथियार भारत में आ सकते हैं और वारदात के बाद वापस भी भेजे जा सकते हैं तो यह सुरक्षा व्यवस्था के लिए बेहद गंभीर मामला है।
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बेटे के भविष्य की चिंता, अब तक नहीं मिला जवाब
ईना देवी ने बताया कि वह पिछले डेढ़ वर्ष से पति जानकीदास और इकलौते बेटे के साथ धनास में किराये के मकान में रह रही थीं। उनका बेटा बीकॉम की पढ़ाई कर रहा है। पति की हत्या के बाद परिवार पूरी तरह टूट गया है। उन्होंने कहा कि पुलिस अभी तक यह भी स्पष्ट नहीं कर पाई कि हत्या की असली वजह क्या थी। परिवार आज भी न्याय और सच्चाई सामने आने का इंतजार कर रहा है।
बॉक्स : क्या है जिगाना पिस्टल
जिगाना पिस्टल का निर्माण तुर्की की कंपनी टीशाश करती है। यह सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल 9×19 मिमी कैलिबर में उपलब्ध होती है और मॉडल के अनुसार इसकी मैगजीन क्षमता 15 से 17 राउंड तक होती है। इसे मूल रूप से सेना, पुलिस और लाइसेंसी नागरिकों के लिए विकसित किया गया था, लेकिन भारत में अवैध तस्करी के जरिए यह कुछ आपराधिक गिरोहों तक पहुंच चुकी है। अवैध बाजार में इसकी कीमत करीब सात से नौ लाख रुपये बताई जाती है।
बॉक्स : सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड के बाद चर्चा में आई
जिगाना पिस्टल पहली बार व्यापक चर्चा में तब आई जब सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड में इसके इस्तेमाल की बात सामने आई। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि ऐसे हथियार तुर्की से चीन और फिर पाकिस्तान के रास्ते भारत पहुंचते हैं। हालांकि अब तक ऐसा कोई कथित सप्लायर गिरफ्तार नहीं हुआ है, जिससे इस पूरे नेटवर्क की आधिकारिक पुष्टि हो सके।