{"_id":"6a53fb1dfa41e0d0ac0d0d63","slug":"satsang-gives-life-the-right-direction-hari-maharaj-chandigarh-news-c-16-pkl1049-1068883-2026-07-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"सत्संग से जीवन को सही दिशा मिलती है: हरि महाराज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सत्संग से जीवन को सही दिशा मिलती है: हरि महाराज
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
चंडीगढ़। सत्संग के बिना विवेक की प्राप्ति नहीं होती और भगवान श्रीराम की कृपा के बिना सच्चा सत्संग भी नहीं मिलता। सत्संग मनुष्य के जीवन को सही दिशा देकर उसके कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है। यह प्रवचन सेक्टर 23 के मुनि मंदिर में कथा व्यास हरि महाराज ने मुनि गौरवानंद गिरि जी महाराज की 39वीं पुण्यतिथि पर आयोजित धार्मिक समारोह में रविवार को दिया।
उन्होंने कहा कि जैसे पारस के स्पर्श से लोहा स्वर्ण के समान मूल्यवान बन जाता है, उसी प्रकार सत्संग का प्रभाव मनुष्य के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाता है। दुष्ट प्रवृत्ति का व्यक्ति भी सत्संग की संगति से अपने विचार और आचरण बदल सकता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को नियमित रूप से सत्संग में भाग लेना चाहिए। कथा व्यास ने हनुमान जी की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि चारों युगों में उनका प्रताप बना रहा है। कलयुग में वे भक्तों पर शीघ्र कृपा करने वाले देव हैं।
हनुमान जी भक्तों के कष्ट का निवारण करते हैं। समारोह के दौरान कथा व्यास ने ले चल अपनी नगरिया, शंकर ने खुद लिखी श्रीराम की कहानी, मुख बोलता है या तू बोलता है, मेरा दिल तुझपे कुर्बान मुरलिया और गले से लगा लो न मुझे सांवरिया सहित कई भक्तिमय भजनों की प्रस्तुति दी। भजनों पर श्रद्धालु झूमते रहे। इस अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों से आए संत-महात्मा भी उपस्थित रहे। मंदिर के प्रधान दलीप चंद गुप्ता एवं सांस्कृतिक सचिव पंडित दीप भारद्वाज ने सभी संतों का अंगवस्त्र भेंट कर सम्मान किया।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि जैसे पारस के स्पर्श से लोहा स्वर्ण के समान मूल्यवान बन जाता है, उसी प्रकार सत्संग का प्रभाव मनुष्य के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाता है। दुष्ट प्रवृत्ति का व्यक्ति भी सत्संग की संगति से अपने विचार और आचरण बदल सकता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को नियमित रूप से सत्संग में भाग लेना चाहिए। कथा व्यास ने हनुमान जी की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि चारों युगों में उनका प्रताप बना रहा है। कलयुग में वे भक्तों पर शीघ्र कृपा करने वाले देव हैं।
विज्ञापन
हनुमान जी भक्तों के कष्ट का निवारण करते हैं। समारोह के दौरान कथा व्यास ने ले चल अपनी नगरिया, शंकर ने खुद लिखी श्रीराम की कहानी, मुख बोलता है या तू बोलता है, मेरा दिल तुझपे कुर्बान मुरलिया और गले से लगा लो न मुझे सांवरिया सहित कई भक्तिमय भजनों की प्रस्तुति दी। भजनों पर श्रद्धालु झूमते रहे। इस अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों से आए संत-महात्मा भी उपस्थित रहे। मंदिर के प्रधान दलीप चंद गुप्ता एवं सांस्कृतिक सचिव पंडित दीप भारद्वाज ने सभी संतों का अंगवस्त्र भेंट कर सम्मान किया।
विज्ञापन