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Chandigarh News: पीएम मोदी का डेरा बल्लां दौरा पंजाब की सियासी फिजा बदलने का संकेत
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-पंजाब में 32% अनुसूचित जाति की आबादी, दलित और रविदासिया समुदाय तक पहुंच बढ़ाएगा मोदी का दौरा
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सुरिंदर पाल
जालंधर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जालंधर स्थित डेरा सचखंड बल्लां में आगमन केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है बल्कि यह पंजाब की राजनीति में गहरे सियासी संकेत भी छिपाए हुए है। मोदी पहले प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने डेरा बल्लां में जाकर नतमस्तक होकर समुदाय के प्रति अपनी नजदीकी दिखाई है। यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब पंजाब में दलित राजनीति, डेरों का सामाजिक प्रभाव और आगामी 2027 विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सभी प्रमुख राजनीतिक दल अपनी रणनीतियों पर काम कर रहे हैं।
डेरा सचखंड बल्लां को रविदासिया समुदाय का प्रमुख धार्मिक और सामाजिक केंद्र माना जाता है जिसका प्रभाव जालंधर और दोआबा क्षेत्र की राजनीति पर गहरा है। इस क्षेत्र में अनुसूचित जाति (दलित) की आबादी लगभग 32 प्रतिशत है जो राष्ट्रीय औसत से कहीं अधिक है। रविदासिया समुदाय का प्रभाव यहां निर्णायक होता है और ऐतिहासिक रूप से यह समुदाय किसी एक राजनीतिक दल के साथ स्थायी रूप से नहीं जुड़ा रहा है। समय-समय पर इसका समर्थन कांग्रेस, अकाली दल और हाल में आम आदमी पार्टी को मिलता रहा है जबकि भाजपा की उपस्थिति धीरे-धीरे बढ़ी है।
भाजपा की रणनीति
2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा का प्रदर्शन सीमित था लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने कुछ बढ़ोतरी दर्ज की। भाजपा की नजर अब दोआबा क्षेत्र की उन विधानसभा सीटों पर है जहां दलित और रविदासिया मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। पंजाब में भाजपा और दलित राजनीति का रिश्ता हमेशा सीमित रहा है, लेकिन पार्टी ने कई दलित चेहरों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश की है। इसके बावजूद, विधानसभा चुनावों में भाजपा का प्रदर्शन कई दलित प्रभाव वाले क्षेत्रों में कमजोर ही रहा।
डेरों का राजनीतिक असर
पंजाब में डेरों का राजनीतिक प्रभाव नया नहीं है। डेरा सचखंड बल्लां ने कभी औपचारिक रूप से किसी राजनीतिक दल का समर्थन नहीं किया लेकिन इसके धार्मिक आयोजनों में राजनीतिक नेताओं की मौजूदगी को सम्मान और संकेत के रूप में देखा जाता है। पीएम मोदी का डेरा बल्लां में नतमस्तक होना इस सामाजिक-राजनीतिक संदर्भ में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
आगामी चुनाव की तैयारी
भाजपा की रणनीति यही संकेत देती है कि पार्टी पंजाब में केवल पारंपरिक शहरी या सीमित वर्गीय राजनीति से बाहर निकलकर व्यापक सामाजिक संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है। रविदासिया और दलित समुदाय तक पहुंच बनाना पार्टी की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है, ताकि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी अपने लिए नया सामाजिक आधार तैयार कर सके।
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सुरिंदर पाल
जालंधर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जालंधर स्थित डेरा सचखंड बल्लां में आगमन केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है बल्कि यह पंजाब की राजनीति में गहरे सियासी संकेत भी छिपाए हुए है। मोदी पहले प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने डेरा बल्लां में जाकर नतमस्तक होकर समुदाय के प्रति अपनी नजदीकी दिखाई है। यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब पंजाब में दलित राजनीति, डेरों का सामाजिक प्रभाव और आगामी 2027 विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सभी प्रमुख राजनीतिक दल अपनी रणनीतियों पर काम कर रहे हैं।
डेरा सचखंड बल्लां को रविदासिया समुदाय का प्रमुख धार्मिक और सामाजिक केंद्र माना जाता है जिसका प्रभाव जालंधर और दोआबा क्षेत्र की राजनीति पर गहरा है। इस क्षेत्र में अनुसूचित जाति (दलित) की आबादी लगभग 32 प्रतिशत है जो राष्ट्रीय औसत से कहीं अधिक है। रविदासिया समुदाय का प्रभाव यहां निर्णायक होता है और ऐतिहासिक रूप से यह समुदाय किसी एक राजनीतिक दल के साथ स्थायी रूप से नहीं जुड़ा रहा है। समय-समय पर इसका समर्थन कांग्रेस, अकाली दल और हाल में आम आदमी पार्टी को मिलता रहा है जबकि भाजपा की उपस्थिति धीरे-धीरे बढ़ी है।
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भाजपा की रणनीति
2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा का प्रदर्शन सीमित था लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने कुछ बढ़ोतरी दर्ज की। भाजपा की नजर अब दोआबा क्षेत्र की उन विधानसभा सीटों पर है जहां दलित और रविदासिया मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। पंजाब में भाजपा और दलित राजनीति का रिश्ता हमेशा सीमित रहा है, लेकिन पार्टी ने कई दलित चेहरों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश की है। इसके बावजूद, विधानसभा चुनावों में भाजपा का प्रदर्शन कई दलित प्रभाव वाले क्षेत्रों में कमजोर ही रहा।
डेरों का राजनीतिक असर
पंजाब में डेरों का राजनीतिक प्रभाव नया नहीं है। डेरा सचखंड बल्लां ने कभी औपचारिक रूप से किसी राजनीतिक दल का समर्थन नहीं किया लेकिन इसके धार्मिक आयोजनों में राजनीतिक नेताओं की मौजूदगी को सम्मान और संकेत के रूप में देखा जाता है। पीएम मोदी का डेरा बल्लां में नतमस्तक होना इस सामाजिक-राजनीतिक संदर्भ में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
आगामी चुनाव की तैयारी
भाजपा की रणनीति यही संकेत देती है कि पार्टी पंजाब में केवल पारंपरिक शहरी या सीमित वर्गीय राजनीति से बाहर निकलकर व्यापक सामाजिक संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है। रविदासिया और दलित समुदाय तक पहुंच बनाना पार्टी की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है, ताकि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी अपने लिए नया सामाजिक आधार तैयार कर सके।
