{"_id":"697f435d10a34fbf08009399","slug":"budget-from-agriculture-to-industry-emphasis-on-msmes-will-greatly-benefit-punjab-chandigarh-news-c-74-1-lud1001-114123-2026-02-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"बजट... कृषि से उद्योग की ओर: एमएसएमई पर जोर से पंजाब को मिलेगा बड़ा लाभ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बजट... कृषि से उद्योग की ओर: एमएसएमई पर जोर से पंजाब को मिलेगा बड़ा लाभ
विज्ञापन
विज्ञापन
-नई दिशा में पंजाब की अर्थव्यवस्था का मार्गदर्शन
-- -
राजीव शर्मा
लुधियाना। पंजाब को एक कृषि प्रधान राज्य के रूप में पहचान मिली है लेकिन पिछले कुछ वर्षों में कृषि क्षेत्र में विकास की दर धीमी हो गई है। ऐसे में राज्य की अर्थव्यवस्था को नए आयामों तक पहुंचाने के लिए औद्योगिक विकास और सेवा क्षेत्र का विस्तार आवश्यक हो गया है। देश 2027 तक विकसित भारत बनने का सपना देख रहा है और इस लक्ष्य की प्राप्ति में पंजाब की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस दिशा में एक अहम कदम बढ़ाते हुए, 2023-24 के बजट में मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र को बढ़ावा देने और विश्व स्तरीय इन्फ्रास्ट्रक्चर निर्माण पर जोर दिया। बजट में माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज (एमएसएमई) सेक्टर को भविष्य का चैंपियन बनाने के लिए 10,000 करोड़ रुपये का विशेष फंड प्रस्तावित किया गया है। चूंकि पंजाब एमएसएमई के क्षेत्र में एक प्रमुख केंद्र है।
पंजाब में करीब 15 लाख एमएसएमई इकाइयां कार्यरत हैं, जो राज्य की औद्योगिक अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती हैं। इन इकाइयों का योगदान राज्य के औद्योगिक उत्पादन में लगभग 78 प्रतिशत और रोजगार में लगभग 65 प्रतिशत है। खासतौर पर, वस्त्र, साइकिल, होजरी, ट्रैक्टर, खेल उपकरण, ऑटो कंपोनेंट्स और चमड़ा उद्योग जैसे क्षेत्र प्रमुख हैं, जिनमें ये एमएसएमई इकाइयां काम करती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बजट से औद्योगिक उत्पादन और निर्यात दोनों में वृद्धि होगी। रोजगार के नए अवसर भी उत्पन्न होंगे।
बढ़ती निर्यात क्षमता
लुधियाना, अमृतसर, जालंधर और मोहाली जैसे शहरी केंद्र पंजाब में औद्योगिक विकास के प्रमुख केंद्र बने हुए हैं। इन क्षेत्रों से हर साल 60,000 करोड़ रुपये से अधिक का निर्यात किया जाता है। हालिया मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) और बजट में किए गए प्रावधानों के चलते, राज्य के निर्यात में अगले वित्त वर्ष में 10 से 15 प्रतिशत की वृद्धि की उम्मीद है। केंद्रीय बजट में मेक इन इंडिया को नई गति देने के लिए नेशनल मैन्युफैक्चरिंग मिशन की घोषणा की गई है। इसके अंतर्गत एमएसएमई के लिए ऋण और निवेश सुधारों के प्रावधान किए गए हैं। इसके साथ ही, राष्ट्रीय फाइबर योजना के तहत मानवनिर्मित फाइबर और आधुनिक फाइबर के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम उठाए गए हैं, जो पंजाब की यार्न और टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए लाभकारी सिद्ध होगा।
टेक्सटाइल पार्क और उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता
यदि पंजाब में मेगा टेक्सटाइल पार्क की स्थापना होती है तो इससे निवेश बढ़ेगा और यह क्षेत्र वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सकेगा। खादी, हथकरघा और हस्तशिल्प को प्रोत्साहन देने के लिए महात्मा गांधी ग्राम स्वराज योजना भी लागू की जाएगी जिससे राज्य की हथकरघा और हस्तशिल्प इंडस्ट्री को बल मिलेगा। बजट में एमएसएमई के लिए क्रेडिट गारंटी लोन की सीमा बढ़ाई गई है, जो इस क्षेत्र को वित्तीय सहायता प्राप्त करने में मदद करेगी। सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए यह सीमा 5 करोड़ से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये, स्टार्टअप्स के लिए 20 करोड़ रुपये और निर्यातक एमएसएमई के लिए भी 20 करोड़ रुपये तक कर दी गई है। सरकारी खरीद में एमएसएमई की 20 प्रतिशत हिस्सेदारी सुनिश्चित करने के बजट प्रावधान से इस क्षेत्र के उत्पादों को मार्केटिंग की चुनौती से भी राहत मिलेगी।
पंजाब में नए औद्योगिक पार्क व विशेष आर्थिक जोन
पंजाब में नए टेक्सटाइल पार्क, औद्योगिक पार्क, विशेष आर्थिक क्षेत्र और क्लस्टरों के विकास के प्रावधान से राज्य में औद्योगिक गतिविधियों को और गति मिलेगी। इसके अलावा, परिवहन और लॉजिस्टिक्स ढांचे को मजबूत करने के बजट एलान से उद्योगों की ट्रांजेक्शन लागत घटेगी। केंद्र सरकार की ओर से हर जिले में महिला हॉस्टल खोलने के प्रस्ताव को भी पंजाब की औद्योगिक अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस कदम से राज्य में महिलाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे, विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहां श्रमिकों की कमी है। उद्यमियों का कहना है कि एमएसएमई को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए 10,000 करोड़ रुपये का फंड अपर्याप्त है। उनका मानना है कि इसे बढ़ाकर कम से कम 1 लाख करोड़ रुपये किया जाना चाहिए।
Trending Videos
राजीव शर्मा
लुधियाना। पंजाब को एक कृषि प्रधान राज्य के रूप में पहचान मिली है लेकिन पिछले कुछ वर्षों में कृषि क्षेत्र में विकास की दर धीमी हो गई है। ऐसे में राज्य की अर्थव्यवस्था को नए आयामों तक पहुंचाने के लिए औद्योगिक विकास और सेवा क्षेत्र का विस्तार आवश्यक हो गया है। देश 2027 तक विकसित भारत बनने का सपना देख रहा है और इस लक्ष्य की प्राप्ति में पंजाब की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस दिशा में एक अहम कदम बढ़ाते हुए, 2023-24 के बजट में मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र को बढ़ावा देने और विश्व स्तरीय इन्फ्रास्ट्रक्चर निर्माण पर जोर दिया। बजट में माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज (एमएसएमई) सेक्टर को भविष्य का चैंपियन बनाने के लिए 10,000 करोड़ रुपये का विशेष फंड प्रस्तावित किया गया है। चूंकि पंजाब एमएसएमई के क्षेत्र में एक प्रमुख केंद्र है।
विज्ञापन
विज्ञापन
पंजाब में करीब 15 लाख एमएसएमई इकाइयां कार्यरत हैं, जो राज्य की औद्योगिक अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती हैं। इन इकाइयों का योगदान राज्य के औद्योगिक उत्पादन में लगभग 78 प्रतिशत और रोजगार में लगभग 65 प्रतिशत है। खासतौर पर, वस्त्र, साइकिल, होजरी, ट्रैक्टर, खेल उपकरण, ऑटो कंपोनेंट्स और चमड़ा उद्योग जैसे क्षेत्र प्रमुख हैं, जिनमें ये एमएसएमई इकाइयां काम करती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बजट से औद्योगिक उत्पादन और निर्यात दोनों में वृद्धि होगी। रोजगार के नए अवसर भी उत्पन्न होंगे।
बढ़ती निर्यात क्षमता
लुधियाना, अमृतसर, जालंधर और मोहाली जैसे शहरी केंद्र पंजाब में औद्योगिक विकास के प्रमुख केंद्र बने हुए हैं। इन क्षेत्रों से हर साल 60,000 करोड़ रुपये से अधिक का निर्यात किया जाता है। हालिया मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) और बजट में किए गए प्रावधानों के चलते, राज्य के निर्यात में अगले वित्त वर्ष में 10 से 15 प्रतिशत की वृद्धि की उम्मीद है। केंद्रीय बजट में मेक इन इंडिया को नई गति देने के लिए नेशनल मैन्युफैक्चरिंग मिशन की घोषणा की गई है। इसके अंतर्गत एमएसएमई के लिए ऋण और निवेश सुधारों के प्रावधान किए गए हैं। इसके साथ ही, राष्ट्रीय फाइबर योजना के तहत मानवनिर्मित फाइबर और आधुनिक फाइबर के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम उठाए गए हैं, जो पंजाब की यार्न और टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए लाभकारी सिद्ध होगा।
टेक्सटाइल पार्क और उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता
यदि पंजाब में मेगा टेक्सटाइल पार्क की स्थापना होती है तो इससे निवेश बढ़ेगा और यह क्षेत्र वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सकेगा। खादी, हथकरघा और हस्तशिल्प को प्रोत्साहन देने के लिए महात्मा गांधी ग्राम स्वराज योजना भी लागू की जाएगी जिससे राज्य की हथकरघा और हस्तशिल्प इंडस्ट्री को बल मिलेगा। बजट में एमएसएमई के लिए क्रेडिट गारंटी लोन की सीमा बढ़ाई गई है, जो इस क्षेत्र को वित्तीय सहायता प्राप्त करने में मदद करेगी। सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए यह सीमा 5 करोड़ से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये, स्टार्टअप्स के लिए 20 करोड़ रुपये और निर्यातक एमएसएमई के लिए भी 20 करोड़ रुपये तक कर दी गई है। सरकारी खरीद में एमएसएमई की 20 प्रतिशत हिस्सेदारी सुनिश्चित करने के बजट प्रावधान से इस क्षेत्र के उत्पादों को मार्केटिंग की चुनौती से भी राहत मिलेगी।
पंजाब में नए औद्योगिक पार्क व विशेष आर्थिक जोन
पंजाब में नए टेक्सटाइल पार्क, औद्योगिक पार्क, विशेष आर्थिक क्षेत्र और क्लस्टरों के विकास के प्रावधान से राज्य में औद्योगिक गतिविधियों को और गति मिलेगी। इसके अलावा, परिवहन और लॉजिस्टिक्स ढांचे को मजबूत करने के बजट एलान से उद्योगों की ट्रांजेक्शन लागत घटेगी। केंद्र सरकार की ओर से हर जिले में महिला हॉस्टल खोलने के प्रस्ताव को भी पंजाब की औद्योगिक अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस कदम से राज्य में महिलाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे, विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहां श्रमिकों की कमी है। उद्यमियों का कहना है कि एमएसएमई को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए 10,000 करोड़ रुपये का फंड अपर्याप्त है। उनका मानना है कि इसे बढ़ाकर कम से कम 1 लाख करोड़ रुपये किया जाना चाहिए।
