{"_id":"697f4932d07d8315ae0713da","slug":"the-world-msme-forum-called-the-budget-directionless-and-criticized-the-finance-minister-chandigarh-news-c-74-1-lud1001-114122-2026-02-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chandigarh News: बजट... वर्ल्ड एमएसएमई फोरम ने बजट को दिशाहीन बताया, वित्त मंत्री पर साधा निशाना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chandigarh News: बजट... वर्ल्ड एमएसएमई फोरम ने बजट को दिशाहीन बताया, वित्त मंत्री पर साधा निशाना
विज्ञापन
विज्ञापन
-एमएसएमई बजट में कटौती, 22,896 करोड़ से घटकर 11,800 करोड़ रुपये
-- -
लुधियाना। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए 2026 के बजट को वर्ल्ड एमएसएमई फोरम ने पूरी तरह से दिशाहीन करार दिया है। फोरम ने कहा कि इस बजट ने देश की अर्थव्यवस्था को गहरी चोट पहुंचाई है और विशेष रूप से एमएसएमई सेक्टर को बर्बादी के कगार पर ला खड़ा किया है। फोरम का आरोप है कि बजट में 16.95 लाख करोड़ रुपये के भारी-भरकम राजकोषीय घाटे का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिससे देश की आर्थिक सेहत पर गंभीर असर पड़ेगा। इतना ही नहीं, केंद्र सरकार को केवल ब्याज भुगतान के लिए 14.03 लाख करोड़ रुपये खर्च करने होंगे, जो कुल बजट का लगभग 20 प्रतिशत है।
वर्ल्ड एमएसएमई फोरम के प्रधान बदीश जिंदल ने कहा कि पिछले दो वर्षों में भारत का निर्यात 456 अरब डॉलर से घटकर 442 अरब डॉलर रह गया है, जबकि आयात लगातार बढ़ रहा है। इसके परिणामस्वरूप, पिछले वर्ष देश को 287 अरब डॉलर (करीब 24 लाख करोड़ रुपये) का भारी व्यापार घाटा हुआ। इसके अलावा, भारतीय रुपया भी एशिया की सबसे कमजोर मुद्राओं में शामिल हो गया है, जो एक साल में डॉलर के मुकाबले 84 से गिरकर 92 तक पहुंच गया है। फोरम ने आर्थिक सर्वेक्षण का हवाला देते हुए कहा कि जीडीपी में उद्योगों की हिस्सेदारी घट रही है, बावजूद इसके सरकार ने निर्यात प्रोत्साहन, फ्रेट सब्सिडी और ब्याज सब्सिडी जैसे अहम कदम नहीं उठाए।
एमएसएमई सेक्टर के लिए बजट में की गई भारी कटौती पर फोरम ने कड़ा विरोध जताया। 2025-26 के लिए एमएसएमई का बजट 22,896 करोड़ रुपये था, जिसे घटाकर मात्र 11,800 करोड़ रुपये कर दिया गया। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना का बजट भी 11,954 करोड़ से घटाकर 2,548 करोड़ रुपये कर दिया गया। इसी तरह, कौशल विकास योजना में भी 6,100 करोड़ रुपये से घटाकर 2,703 करोड़ रुपये कर दी गई। नए आईटीआई स्थापित करने के लिए 3,000 करोड़ रुपये का बजट घटाकर केवल 356 करोड़ रुपये कर दिया गया। फोरम का कहना है कि यह आंकड़े संशोधित हैं, और वास्तविक खर्च इससे भी कम रहने की आशंका है। फोरम ने आरोप लगाया कि पंजाब को इस बजट में पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है और कहा कि इन कटौतियों ने साबित कर दिया है कि बजट दस्तावेज़ की कोई विश्वसनीयता नहीं रह गई है।
Trending Videos
लुधियाना। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए 2026 के बजट को वर्ल्ड एमएसएमई फोरम ने पूरी तरह से दिशाहीन करार दिया है। फोरम ने कहा कि इस बजट ने देश की अर्थव्यवस्था को गहरी चोट पहुंचाई है और विशेष रूप से एमएसएमई सेक्टर को बर्बादी के कगार पर ला खड़ा किया है। फोरम का आरोप है कि बजट में 16.95 लाख करोड़ रुपये के भारी-भरकम राजकोषीय घाटे का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिससे देश की आर्थिक सेहत पर गंभीर असर पड़ेगा। इतना ही नहीं, केंद्र सरकार को केवल ब्याज भुगतान के लिए 14.03 लाख करोड़ रुपये खर्च करने होंगे, जो कुल बजट का लगभग 20 प्रतिशत है।
वर्ल्ड एमएसएमई फोरम के प्रधान बदीश जिंदल ने कहा कि पिछले दो वर्षों में भारत का निर्यात 456 अरब डॉलर से घटकर 442 अरब डॉलर रह गया है, जबकि आयात लगातार बढ़ रहा है। इसके परिणामस्वरूप, पिछले वर्ष देश को 287 अरब डॉलर (करीब 24 लाख करोड़ रुपये) का भारी व्यापार घाटा हुआ। इसके अलावा, भारतीय रुपया भी एशिया की सबसे कमजोर मुद्राओं में शामिल हो गया है, जो एक साल में डॉलर के मुकाबले 84 से गिरकर 92 तक पहुंच गया है। फोरम ने आर्थिक सर्वेक्षण का हवाला देते हुए कहा कि जीडीपी में उद्योगों की हिस्सेदारी घट रही है, बावजूद इसके सरकार ने निर्यात प्रोत्साहन, फ्रेट सब्सिडी और ब्याज सब्सिडी जैसे अहम कदम नहीं उठाए।
विज्ञापन
विज्ञापन
एमएसएमई सेक्टर के लिए बजट में की गई भारी कटौती पर फोरम ने कड़ा विरोध जताया। 2025-26 के लिए एमएसएमई का बजट 22,896 करोड़ रुपये था, जिसे घटाकर मात्र 11,800 करोड़ रुपये कर दिया गया। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना का बजट भी 11,954 करोड़ से घटाकर 2,548 करोड़ रुपये कर दिया गया। इसी तरह, कौशल विकास योजना में भी 6,100 करोड़ रुपये से घटाकर 2,703 करोड़ रुपये कर दी गई। नए आईटीआई स्थापित करने के लिए 3,000 करोड़ रुपये का बजट घटाकर केवल 356 करोड़ रुपये कर दिया गया। फोरम का कहना है कि यह आंकड़े संशोधित हैं, और वास्तविक खर्च इससे भी कम रहने की आशंका है। फोरम ने आरोप लगाया कि पंजाब को इस बजट में पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है और कहा कि इन कटौतियों ने साबित कर दिया है कि बजट दस्तावेज़ की कोई विश्वसनीयता नहीं रह गई है।
