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खौफ के साये में पुलिस थाने-चौकियां: एक साल में 19 आतंकी मॉड्यूल ध्वस्त, सवाल- खतरा टला या नहीं? अब भी किलेबंदी

अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़ Published by: Sharukh Khan Updated Mon, 08 Jun 2026 01:33 PM IST
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सार

पंजाब में पुलिस थाने और चौकियां अब भी खौफ के साये में हैं। कहीं दीवारें 15 फीट तक ऊंची की गईं तो कहीं बैरिकेड और सुरक्षा नेट नहीं हटे हैं। अमृतसर में एक साल पहले हुए बम और ग्रेनेड हमलों के बाद  सुरक्षा नेट व लोहे की शीटें लगाई गई थीं।

Punjab News Police Claims Major Anti-Terror Successes, But Security Fortifications Still Stand
Punjab News - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

पंजाब पुलिस पिछले एक वर्ष से आतंकवाद, सीमा पार से संचालित नेटवर्क और गैंगस्टर-आतंकी गठजोड़ के खिलाफ बड़ी कामयाबियों का दावा कर रही है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2025 में 19 आतंकी मॉड्यूल ध्वस्त किए गए, 131 लोगों को गिरफ्तार किया गया और 12 आतंकी घटनाओं का पर्दाफाश हुआ। 
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पुलिस ने 12 आईईडी, 11.62 किलोग्राम आरडीएक्स, 54 हैंड ग्रेनेड और चार आरपीजी सहित बड़ी मात्रा में हथियार भी बरामद किए। इसके बावजूद राज्य के कई पुलिस थाने आज भी किलेबंदी के साये में हैं।
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पिछले वर्ष पुलिस थानों और चौकियों पर हुए बम व ग्रेनेड हमलों के बाद लगाए गए सुरक्षा नेट, लोहे की शीटें और बैरिकेड अब भी अधिकांश स्थानों पर जस के तस खड़े हैं। फिरोजपुर समेत कई जिलों में तो थानों की बाहरी दीवारों की ऊंचाई जाल लगाकर करीब 15 फीट तक कर दी गई है। सीसीटीवी निगरानी और सुरक्षा कर्मियों की संख्या भी बढ़ाई गई है।
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ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि यदि पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार बीकेआई, आईएसआई समर्थित नेटवर्क तथा अन्य आतंकी मॉड्यूलों पर लगातार शिकंजा कसा जा रहा है और हालात नियंत्रण में हैं तो फिर थानों के बाहर अस्थायी सुरक्षा ढांचे अब तक क्यों नहीं हटाए गए। क्या खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है या फिर सुरक्षा एजेंसियां किसी नए खतरे की आशंका को लेकर सतर्क हैं?

खतरा टला या नहीं? थानों के बाहर अब भी कायम है किलेबंदी
पुलिस का दावा- हालात नियंत्रण में, फिर सुरक्षा प्रबंध हटाने में क्यों हो रही देरी?

अमृतसर जिले में पिछले वर्ष पुलिस थानों और चौकियों को निशाना बनाकर किए गए बम और ग्रेनेड हमलों के बाद सुरक्षा के नाम पर की गई ‘किलेबंदी’ आज भी बरकरार है। हमलों के बाद लगाए गए सुरक्षा नेट, लोहे की शीटें, बैरिकेड और अन्य सुरक्षा अवरोधक एक वर्ष से अधिक समय बीतने के बावजूद अधिकांश थानों के बाहर जस के तस खड़े हैं। ऐसे में इनकी मौजूदा जरूरत को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

हमलों के बाद सुरक्षा एजेंसियों की सिफारिश पर राज्यभर के कई थानों और चौकियों के बाहर अतिरिक्त सुरक्षा ढांचा तैयार किया गया था। संभावित विस्फोटों के असर को कम करने के लिए इमारतों के सामने सुरक्षा नेट लगाए गए जबकि कई स्थानों पर लोहे की शीटें भी लगाई गईं। इसका उद्देश्य पुलिस कर्मियों और सरकारी संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करना था।

 

इस बीच पंजाब पुलिस लगातार आतंकवादी मॉड्यूल, गैंगस्टर नेटवर्क तथा सीमा पार से संचालित तस्करी और हथियार सप्लाई के मामलों में बड़ी कार्रवाई के दावे करती रही है। कई आरोपियों की गिरफ्तारी और हथियारों की बरामदगी भी हुई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि खतरे पर काफी हद तक काबू पा लिया गया है तो थानों के बाहर अब भी अस्थायी किलेबंदी क्यों बनी हुई है।

सुरक्षा के लिहाज से किए थे प्रबंध
रिटायर्ड एसएसपी चमन लाल शर्मा का कहना है कि सुरक्षा प्रबंध मौजूदा खतरे के आकलन के आधार पर तय होने चाहिए। परिस्थितियां बदलने पर उनकी समीक्षा भी जरूरी है। वहीं पुलिस कमिश्नर गुरप्रीत सिंह भुल्लर ने कहा कि सुरक्षा के लिहाज से ये प्रबंध किए गए थे। अब स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और जल्द ही इन्हें हटाकर व्यवस्था पहले जैसी कर दी जाएगी।

फिरोजपुर... थानों की दीवारें जाल की मदद से 15 फीट तक ऊंची
सीसीटीवी और जवानों की संख्या में भी इजाफा

पंजाब में हाल के महीनों के दौरान विभिन्न पुलिस थानों पर बम फेंकने और हमले की घटनाओं के बाद सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जा रहा है। इसी कड़ी में फिरोजपुर जिले के कई पुलिस थानों की बाहरी दीवारों की ऊंचाई करीब 15 फीट तक कर दी गई है।

 

पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह कदम किसी भी संभावित हमले और संदिग्ध गतिविधि को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है। इसके साथ ही थानों के आसपास निगरानी बढ़ा दी गई है। सुरक्षा व्यवस्था को और पुख्ता बनाने के लिए सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ाई गई है तथा अतिरिक्त सुरक्षा कर्मी भी तैनात किए गए हैं। पुलिस का कहना है कि संवेदनशील प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। 
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