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कांग्रेस ने करवाए दो सर्वे: एक में मिल रही कड़ी चुनौती तो दूसरे में आ रही सरकार, मालवा पर खास फोकस जरूरी

मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Sharukh Khan Updated Wed, 03 Jun 2026 03:41 PM IST
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सार

पंजाब में कांग्रेस ने दो सर्वे करवाए हैं। इनमें एक में कड़ी चुनौती मिल रही है तो दूसरे में सरकार आ रही है। कमजोर सीटों पर राहुल और खरगे का चिंतन-मंथन हुआ है। सत्ता हासिल करने के लिए कांग्रेस हाईकमान ने की रणनीतिक चर्चा की है। 

Punjab Polls 2027 Congress Reviews Two Surveys, Mixed Signals on Electoral Prospects
Punjab Polls 2027 - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव के दौरान बहुमत हासिल कर सत्ता पर काबिज कैसा हुआ जाए, इस पर हाईकमान ने चिंतन शुरू कर दिया है। पांच दिन के भीतर नई दिल्ली में हुईं दो हाई लेवल मीटिंग के दौरान इसी संदर्भ में कांग्रेसी नेता राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, केसी वेणुगोपाल, पंजाब के प्रभारी भूपेश बघेल समेत अन्य वरिष्ठ नेताओं ने रणनीतिक चर्चा की। पंजाब में कौन सी सीटें मजबूत हैं, कड़े मुकाबले वाली हैं और कहां पार्टी कमजोर है, इस पर आला नेताओं ने मंथन किया।
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सूबे में आठ महीने बाद विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। दोबारा सत्ता हासिल करने के लिए पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीपीसीसी) के साथ-साथ ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) भी खासी गंभीर है। सीट-टू-सीट रणनीति पर काम शुरू कर दिया गया है।
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इसी कड़ी में पार्टी ने पंजाब में दो अहम सर्वे करवाए हैं। एक राहुल गांधी के निर्देशों पर एआईसीसी ने करवाया है जबकि दूसरा पीपीसीसी ने। सीट-टू-सीट किया गया सर्वे पंजाब में मतदाताओं के बीच पार्टी की स्थिति, नेताओं की लोकप्रियता, पंजाब कांग्रेस का नेतृत्व और सूबे के ज्वलंत चुनावी मुद्दों पर केंद्रित है।

 

सूत्र बताते हैं कि हाईकमान और पंजाब कांग्रेस द्वारा करवाए गए सर्वे के दौरान कुछ बिंदुओं पर थोड़ा फर्क सामने आया है। एआईसीसी के सर्वे में पंजाब में सरकार बनाने के लिए कड़ी चुनाैती पेश आ रही है। इस सर्वे में कांग्रेस पंजाब में 52 से 54 सीटें जीत रही है जबकि सत्ता में आने के लिए 117 में से 59 सीटों की जरूरत है। पीपीसीसी के सर्वे में 64 से 68 सीटों के साथ आसानी से सरकार बन रही है।
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इसी फर्क पर राहुल गांधी, खरगे और बघेल ने दोनों सर्वे एजेंसियों को आमने-सामने बैठाकर चर्चा की। कांग्रेस के सर्वे के दाैरान पंजाब के ज्वलंत सियासी मुद्दों में नशा-हथियार तस्करी, गैंगस्टरवाद, बिगड़ी कानून-व्यवस्था, पंथक संगठनों और सरकार के बीच टकराव व किसानों का संघर्ष बड़े मसलों के रूप में सामने आए हैं।

मालवा पर खास फोकस जरूरी
2022 के विधानसभा चुनाव में मालवा क्षेत्र में कांग्रेस का प्रदर्शन बहुत खराब रहा था। क्षेत्र की 69 में से कांग्रेस महज दो ही सीटें जीत पाई थी। सर्वे में इस क्षेत्र पर खास फोकस करने को कहा गया है। इसके अलावा विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों 15 से 20 हेविवेट नेता कांग्रेस जॉइन करना चाहते हैं।

इनको कब शामिल किया जा सकता है और इनके शामिल होने के बाद संबंधित क्षेत्र में किसी प्रकार की गुटबाजी व विवाद न हो, इस पर भी विमर्श किया गया। सर्वे में जो विधानसभा सीटें कमजोर हैं वहां की जिम्मेदारी किस मजबूत नेता को दी जाए, इस पर भी आला नेताओं के बीच मंत्रणा हुई। कुछ सेलिब्रेटी चेहरों को भी सामने लाने पर विचार हुआ।

नेतृत्व बदलने पर भी सर्वे में फर्क
पंजाब का नेतृत्व बदला जाए या नहीं, इस बिंदु पर हुए आईसीसी और पीपीसीसी के सर्वे में भी फर्क सामने आया है। हाईकमान का सर्वे कहता हैं कि सूबे में पार्टी नेतृत्व बदलने की मांग जोर पकड़ रही है और इसी मसले पर कई आला नेताओं में मतभेद है। उधर पीपीसीसी का सर्वे कहता है कि 2027 विधानसभा चुनाव माैजूदा अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और प्रभारी भूपेश बघेल के नेतृत्व में ही लड़ा जाए मगर माैजूदा प्रदेशाध्यक्ष के साथ एक दलित नेता को बताैर कार्यकारी प्रधान लगाया जाए।

एआईसीसी की सर्वे टीम ने नेतृत्व परिवर्तन के दाैरान कुछ नेताओं के नाम भी सुझाए हैं। इनमें दो हिंदू चेहरे राणा केपी (कंवरपाल सिंह) व विजेंदर सिंगला, दो एससी चेहरे सांसद डाॅ. अमर सिंह व चरणजीत सिंह चन्नी और चार जट्ट सिख चेहरे पूर्व डिप्टी सीएम सुखजिंदर सिंह रंधावा, विधायक व एआईसीसी के सचिव परगट सिंह, नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा व विधायक सुखपाल सिंह खैरा का नाम शामिल है। 
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