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Chandigarh: पंजाब ने केरल को एजुकेशन क्वालिटी इंडेक्स में पछाड़ा, शिक्षा मंत्री ने पेश किया रिपोर्ट कार्ड
Thu, 06 Aug 2026 11:03 PM IST
Digvijay Singh
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
Published by: Digvijay Singh
Updated Thu, 06 Aug 2026 11:03 PM IST
सार
पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने प्रदेश में शिक्षा में ऐतिहासिक बदलाव का दावा किया। उन्होंने बताया कि पंजाब ने 'नीति आयोग स्कूल एजुकेशन क्वालिटी इंडेक्स 2026' में केरल को पछाड़कर शीर्ष स्थान हासिल किया।
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पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस
- फोटो : X(@harjotbains)
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विस्तार
पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने प्रदेश में शिक्षा में ऐतिहासिक बदलाव का दावा किया। उन्होंने बताया कि पंजाब ने 'नीति आयोग स्कूल एजुकेशन क्वालिटी इंडेक्स 2026' में केरल को पछाड़कर शीर्ष स्थान हासिल किया। पंजाब पहली से 12वीं कक्षा तक 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' को मुख्य विषय के रूप में शुरू करने वाला देश का पहला राज्य बना।
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हरजोत सिंह बैंस ने जुलाई 2022 में पदभार संभालने के समय स्कूलों की खराब स्थिति याद दिलाई। तब 8,000 से अधिक स्कूलों में चारदीवारी नहीं थी और 4 लाख विद्यार्थी जमीन पर बैठने को मजबूर थे। अब पाठ्यपुस्तकें 15 फरवरी तक जिला मुख्यालयों तक पहुंचती हैं और 31 मार्च तक वितरित हो जाती हैं। मंत्री ने पंजाब के 2,000 से अधिक सरकारी स्कूलों का व्यक्तिगत रूप से दौरा किया है। सरकार का 'मिशन समरथ' भारत के सबसे बड़े बुनियादी शिक्षा कार्यक्रमों में से एक है। इसके तहत विद्यार्थियों को सीखने की क्षमता के अनुसार समूहों में बांटा जाता है। सरकारी स्कूलों से नीट-यू.जी. परीक्षा पास करने वालों की संख्या 2021 में 80 से बढ़कर 2026 में 882 हुई। यह 'पंजाब अकादमिक कोचिंग फॉर एक्सीलेंस' पहल का परिणाम है, जिसमें मजीठा और दीनानगर के विद्यार्थियों ने भी सफलता पाई।
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बुनियादी ढांचे में सुधार
19,125 सरकारी स्कूलों में 2,638 करोड़ रुपये के बुनियादी ढांचे के काम हुए हैं। विश्व बैंक से सुधारों के लिए 1,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त मंजूरी भी ली गई है। कई 'स्कूल ऑफ एमिनेंस' का पूरी तरह कायाकल्प किया गया है। लुधियाना के शहीद सुखदेव थापर स्कूल ऑफ एमिनेंस पर 18 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं और इसके 17 विद्यार्थी नीट पास कर चुके हैं।
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दाखिला दर और चुनौतियां
बैंस ने सरकारी स्कूलों में घटती दाखिला दर के रुझान को देशव्यापी बताया। कोविड के बाद देश भर में सरकारी स्कूलों में दाखिले की संख्या 1.76 करोड़ तक घटी है। भारत सरकार की 2023 में शुरू अपार आई.डी. पहल से अब आंकड़े सही हो रहे हैं। पहले एक बच्चा कई स्कूलों में दाखिल होता था, पर कहीं पढ़ता नहीं था, जिसे अब सुधारा गया है।